Success Story: 8 बहनों के बीच पली 19 साल की ‘चुकी’ ने रच दिया इतिहास, पोल वॉल्ट में बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड

जयपुर. राजस्थान के एक छोटे से गांव की बेटी ने ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब खेल जगत में हो रही है. जिस परिवार में आठ बेटियों के बीच सबसे छोटी बेटी को प्यार से ‘चुकी’ कहकर बुलाया जाता है, उसी बेटी ने पोल वॉल्ट में नया नेशनल रिकॉर्ड बनाकर परिवार और प्रदेश का नाम रोशन किया है. महज 19 साल की चुकी बिरड़ा ने चेन्नई में आयोजित नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अंडर-20 महिला पोल वॉल्ट स्पर्धा में 3.91 मीटर की छलांग लगाई. इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.
खास बात यह है कि चुकी बिरड़ा का खेलों से जुड़ाव किसी बड़े स्टेडियम या महंगी ट्रेनिंग से नहीं, बल्कि स्कूल के दिनों से शुरू हुआ था. तब शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि गांव की यह लड़की एक दिन राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करेगी. परिवार की आर्थिक परेशानियों और सीमित संसाधनों के बावजूद चुकी बिरड़ा ने मेहनत जारी रखी. उनकी इस सफलता के पीछे परिवार के साथ स्कूल के शिक्षकों का भी बड़ा योगदान रहा है.
आठ बहनों में सबसे छोटी, घर में प्यार से बुलाते हैं ‘चुकी’
नागौर जिले के एक छोटे से गांव हीरावाटी की रहने वाली चुकी बिरड़ा अपने माता-पिता की आठ बेटियों में सबसे छोटी हैं. घर में सभी उन्हें प्यार से ‘चुकी’ कहते हैं. उनका नाम राजस्थान में ‘पुल स्टार’ या ‘अब और नहीं’ जैसे अर्थों से जोड़कर देखा जाता है. परिवार में सबसे छोटी होने के कारण उन्हें सभी का भरपूर प्यार मिला. चुकी बिरड़ा की इस उपलब्धि ने पूरे परिवार को खुशी से भर दिया है. उनकी सफलता यह भी बताती है कि बेटियों को मौका और सहयोग मिले तो वे खेल के मैदान में बड़ी पहचान बना सकती हैं.
स्कूल के शिक्षक ने पहचानी प्रतिभा
चुकी बिरड़ा के खेल सफर की शुरुआत स्कूल से हुई थी. उनके शिक्षक राम निवास साहू ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. शुरुआत में चुकी बिरड़ा ने लंबी कूद और दूसरी एथलेटिक्स स्पर्धाओं में हिस्सा लिया. इसके बाद शिक्षक की सलाह पर उन्होंने पोल वॉल्ट में हाथ आजमाया. शुरुआत आसान नहीं थी. पोल वॉल्ट ऐसा खेल है, जिसमें खिलाड़ी को लंबे पोल के सहारे ऊंचाई पार करनी होती है. इसके लिए ताकत, संतुलन और लगातार अभ्यास जरूरी है.
कबड्डी छोड़कर पोल वॉल्ट में बनाया करियर
चुकी बिरड़ा को बचपन में कबड्डी खेलना भी पसंद था. लेकिन कबड्डी की पूरी टीम नहीं बन पाने के कारण उनका ध्यान व्यक्तिगत खेलों की ओर गया. उन्होंने पोल वॉल्ट को चुना और नियमित अभ्यास शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी. स्कूल स्तर से शुरू हुआ सफर अब राष्ट्रीय रिकॉर्ड तक पहुंच चुका है.
परिवार की आर्थिक स्थिति भी नहीं थी मजबूत
चुकी बिरड़ा का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है. उनके पिता किसान हैं और परिवार की जिम्मेदारियां भी बड़ी हैं. ऐसे में खेल के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाना आसान नहीं था. इसके बावजूद परिवार ने बेटी का हौसला बढ़ाया. शिक्षक और परिवार के सहयोग से चुकी बिरड़ा लगातार अभ्यास करती रहीं. आज उनकी सफलता गांव की दूसरी बेटियों के लिए भी प्रेरणा बन रही है.
अब अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता
नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3.91 मीटर की छलांग लगाने के बाद चुकी बिरड़ा का आत्मविश्वास बढ़ा है. अब उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने पर है. गांव से निकलकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तक पहुंचने वाली चुकी बिरड़ा की कहानी बताती है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों में नहीं होती. सही मार्गदर्शन, परिवार का साथ और लगातार मेहनत मिले तो छोटे गांव की बेटियां भी खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकती है.



