Narayan Seva Sansthan: हादसे में गंवाया अगला पैर, अब फिर दौड़ सकेगी गौमाता, नारायण सेवा संस्थान की अनूठी पहल

Last Updated:October 26, 2026, 10:43 IST
Narayan Seva Sansthan Udaipur: उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान ने राजसमंद के घोड़ाघाटी में हादसे में अगला बायां पैर गंवा चुकी गौमाता को मॉड्यूलर कृत्रिम पैर लगाया है. संस्थान की विशेषज्ञ टीम की मेहनत से अब गौमाता दोबारा खड़ी होकर चलने में सक्षम हो रही है. बेजुबान के दर्द को समझकर की गई यह पहल इंसानियत और आधुनिक तकनीक की अनूठी मिसाल बन गई है.
उदयपुर. इंसान हो या बेजुबान जानवर, दर्द हर किसी को होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि इंसान अपनी परेशानी बता सकता है, लेकिन बेजुबान जानवर अपनी तकलीफ शब्दों में नहीं कह पाते. ऐसे ही एक बेजुबान की पीड़ा को समझते हुए उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान ने सराहनीय पहल की है. राजसमंद जिले के घोड़ाघाटी में दुर्घटना के कारण अपना अगला बायां पैर गंवा चुकी गोमाता को संस्थान की टीम ने मॉड्यूलर कृत्रिम पैर लगाया है. इसकी मदद से अब गोमाता को दोबारा खड़े होने और चलने में मदद मिल रही है.
दरअसल, कुछ दिन पहले नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल को जानकारी मिली कि घोड़ाघाटी में एक गोमाता का दुर्घटना में अगला बायां पैर कट गया है. पैर नहीं होने के कारण उसे चलने-फिरने में काफी परेशानी हो रही थी. इसके बाद संस्थान ने उसकी मदद करने का फैसला किया और प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स (पीएंडओ) विभाग की विशेषज्ञ टीम को मौके पर भेजा. टीम ने मौके पर पहुंचकर गोमाता की स्थिति का जायजा लिया.
कृत्रिम पैर तैयार कर गौमाता को लगाया
विशेषज्ञों ने उसके शरीर की बनावट, प्रभावित पैर और कृत्रिम अंग लगाने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जरूरी माप लिए. इसके बाद गोमाता की जरूरत के अनुसार कृत्रिम पैर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई. संस्थान के पीएंडओ विभाग की प्रमुख डॉ. मानस रंजन साहू ने इस काम की तकनीकी जिम्मेदारी संभाली. विशेष सामग्री और आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसा मॉड्यूलर कृत्रिम पैर तैयार किया गया, जिसे गोमाता की शारीरिक बनावट के अनुसार फिट किया जा सके. कृत्रिम पैर तैयार होने के बाद विशेषज्ञों की टीम एक बार फिर घोड़ाघाटी पहुंची. यहां गोमाता को कृत्रिम पैर लगाया गया और उसे खड़ा करने के साथ चलाने का प्रयास किया गया. टीम की मेहनत रंग लाई और गोमाता कृत्रिम पैर के सहारे खड़ी होकर चलने में सफल रही. लंबे समय से चलने में परेशानी झेल रही गोमाता को दोबारा आगे बढ़ते देखकर मौके पर मौजूद लोगों के चेहरे पर खुशी नजर आई.
इस पहल पर संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल कहा कि दिव्यांग व्यक्ति अपनी तकलीफ बता सकते हैं, लेकिन बेजुबान जानवरों के दर्द को समझने के लिए संवेदनशीलता जरूरी है. गोमाता अपनी परेशानी बता नहीं सकती थी, लेकिन उसकी पीड़ा को समझकर मदद करना संस्थान ने अपना दायित्व माना. उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि संस्थान की तकनीकी विशेषज्ञता और सेवा भावना से गोमाता को फिर से खड़े होने और चलने में मदद मिली. नारायण सेवा संस्थान लंबे समय से दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध करवाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है. अब गोमाता की मदद के लिए किया गया यह प्रयास भी चर्चा में है. यह पहल बताती है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ इंसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि बेजुबान जीवों की तकलीफ कम करने और उन्हें नई उम्मीद देने के लिए भी किया जा सकता है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
October 26, 2026, 10:43 IST



