Kota News: साल में सिर्फ एक दिन बंशी धारण करते हैं बिहारी जी, 3.5 किलो चांदी के आभूषणों से हुआ श्रृंगार

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साल में एक दिन बंशी धारण करते हैं बिहारी जी, चांदी के आभूषणों से हुआ श्रृंगार
Last Updated:October 26, 2026, 18:22 IST
Kota Banke Bihari Mandir : कोटा के रंगबाड़ी स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा पर ठाकुर जी का साढ़े तीन किलो चांदी के आभूषणों और श्वेत वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया गया. साल में केवल इसी दिन भक्तों को ठाकुर जी के इस विशेष स्वरूप के दर्शन करने का अवसर मिलता है. इस दिन ठाकुर जी का श्वेत वस्त्रों और चांदी के आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया जाता है.
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कोटा. शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर कोटा के रंगबाड़ी स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला. इस अवसर पर ठाकुर जी ने सफेद पोशाक धारण कर भक्तों को दर्शन दिए. सफेद बंगले में विराजित ठाकुर जी का करीब साढ़े तीन किलो चांदी के आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया. चांदी का मुकुट, बंशी, कमरबंद और पायजेब धारण किए ठाकुर जी की मनमोहक छवि के दर्शन करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही. मंदिर में विशेष विद्युत सजावट भी की गई.
मंदिर से जुड़े राजेंद्र खंडेलवाल ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुर श्री बांके बिहारी जी बंशी धारण करते हैं. साल में केवल इसी दिन भक्तों को ठाकुर जी के इस विशेष स्वरूप के दर्शन करने का अवसर मिलता है. इस दिन ठाकुर जी का श्वेत वस्त्रों और चांदी के आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया जाता है. सफेद बंगले में विराजित ठाकुर जी की दिव्य छटा भक्तों को आकर्षित करती है.
चांदी के मुकुट से लेकर बंशी तक का अनूठा श्रृंगारशरद पूर्णिमा पर ठाकुर जी को करीब साढ़े तीन किलो चांदी से बने आभूषण धारण कराए गए. इनमें सवा किलो चांदी का मुकुट, करीब 325 ग्राम की बंशी, 250 ग्राम का कमरबंद और सवा 100 ग्राम की पायजेब शामिल हैं. इसके अलावा, ठाकुर जी स्वर्ण आभूषणों में कड़े और नथनी भी धारण करते हैं. विशेष श्रृंगार के बाद ठाकुर जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा.
हर महीने निकलती है हरिनाम संकीर्तन परिक्रमाराजेंद्र खंडेलवाल ने बताया कि मंदिर में वर्ष 2010 में ठाकुर जी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से हर महीने हरिनाम संकीर्तन परिक्रमा निकाली जा रही है. शरद पूर्णिमा पर भी सुबह 6:30 बजे रंगबाड़ी के विभिन्न मार्गों से हरिनाम संकीर्तन परिक्रमा निकाली गई, जो मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई. इसके बाद सुबह 7:30 बजे से ठाकुर जी के विशेष दर्शन शुरू हुए. शाम को भी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे.
रात 9 से 12 बजे तक भजन संध्या और महारासशरद पूर्णिमा के अवसर पर रात 9 बजे से 12 बजे तक भजन संध्या और महारास का आयोजन किया गया. एलन के डायरेक्टर गोविंद माहेश्वरी के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को भक्ति संगीत का आनंद लेने का अवसर मिला. आधी रात के बाद भक्तों को अमृत खीर का प्रसाद वितरित किया गया. शरद पूर्णिमा पर खीर के प्रसाद का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.
भक्तों के लिए दूसरा वृंदावन है रंगबाड़ी का मंदिरराजेंद्र खंडेलवाल ने बताया कि रंगबाड़ी का बांके बिहारी मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. यहां प्रतिदिन श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन शरद पूर्णिमा पर ठाकुर जी के बंशी धारण किए हुए स्वरूप के दर्शन का विशेष महत्व रहता है. भजन-कीर्तन, आरती और ठाकुर जी के मनमोहक श्रृंगार से मंदिर परिसर कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आया. श्रद्धालु इस आयोजन को दूसरे वृंदावन जैसा अनुभव बताते हैं.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Kota,Kota,Rajasthan
First Published :
October 26, 2026, 18:22 IST



