दीवाली पर क्यों लगाते है सेवन का वृक्ष? लक्ष्मी-नारायण से जुड़ी मान्यता ने इस परंपरा को बनाया खास, जानें वजह

Last Updated:October 28, 2026, 18:38 IST
Diwali Special: जालोर में दीपावली के अवसर पर सेवन के वृक्ष को लेकर विशेष धार्मिक आस्था देखने को मिलती है. इस वृक्ष को लक्ष्मी-नारायण से जुड़ी मान्यताओं के कारण खास महत्व दिया जाता है. दीपावली पर इसे लगाने की परंपरा स्थानीय संस्कृति और धार्मिक विश्वासों को दर्शाती है. यह परंपरा त्योहार के दौरान प्रकृति और आस्था के संबंध को भी उजागर करती है.
ख़बरें फटाफट
जालौर: दीपावली पर जब हर घर में मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां होती हैं, तब जालोर में एक ऐसे वृक्ष की चर्चा भी खास हो जाती है. जिसे लक्ष्मी-नारायण का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं में इस वृक्ष को सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है. इसे घरों के बाहर ही नहीं, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास भी श्रद्धा के साथ लगाया जाता है. दीपावली के मौके पर घरों की साफ-सफाई और सजावट के साथ लोग मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां करते हैं. इसी दौरान सेवन के पौधे को लेकर जुड़ी मान्यता भी लोगों के बीच चर्चा में रहती है.
माना जाता है कि सेवन का वृक्ष लक्ष्मी-नारायण का प्रतीक है और इसकी मौजूदगी घर के वातावरण में सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक होती है. कई परिवारों में इस वृक्ष को इतना शुभ माना जाता है कि लोग सुबह इसके दर्शन और प्रणाम करने के बाद ही अपने जरूरी कामों के लिए घर से निकलते हैं.
नेगेटिविटी नहीं रहती और सकारात्मक वातावरण बनामाता रानी भटियाणी नर्सरी के संचालक भरत सिंह राजपुरोहित ने लोकल 18 को बताया कि सेवन का वृक्ष लक्ष्मी-नारायण का प्रतीक माना जाता है. इसे धार्मिक स्थलों और घरों के बाहर लगाया जाता है. काफी लोग ऐसे हैं, जो सुबह सेवन के वृक्ष के दर्शन करके ही घर से निकलते हैं. लोगों की मान्यता है कि इससे किसी तरह की नेगेटिविटी नहीं रहती और सकारात्मक वातावरण बना रहता है. दीपावली पर जब लक्ष्मी जी का पूजन होता है, उस समय भी इस पौधे को लोग आस्था से जोड़कर देखते हैं.
हरियाली बढ़ाने वाले पेड़-पौधों की अपनी अलग अहमियत सेवन के वृक्ष की खासियत सिर्फ इसकी धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है. पर्यावरण की दृष्टि से भी इसे उपयोगी माना जाता है. यह घना वृक्ष होने के कारण गर्मी के मौसम में अच्छी छाया देता है. इसके आसपास पक्षियों को बैठने और आश्रय लेने की जगह मिलती है. जालोर जैसे गर्म और शुष्क क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने वाले पेड़-पौधों की अपनी अलग अहमियत है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
और पढ़ेंLocation :
Jalor,Rajasthan
First Published :
October 28, 2026, 18:38 IST



