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खेतों में उगने वाली इस घास में छिपे हैं औषधीय गुण, जानिए 6 बड़े फायदे

Last Updated:October 30, 2026, 13:59 IST

खेतों, बगीचों और घरों के आसपास उगने वाली दूर्वा घास को अक्सर लोग सामान्य घास समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों वाली वनस्पति माना गया है. इसकी ठंडी तासीर और कसैले स्वाद के कारण त्वचा से लेकर पेट और मूत्र संबंधी समस्याओं में इसके पारंपरिक इस्तेमाल बताए गए हैं. आइए जानते हैं आयुर्वेदिक चिकित्सक से दूर्वा के फायदे और इसके उपयोग के बारे में.

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के अनुसार, दूर्वा का स्वाद कषाय यानी कसैला और मधुर माना जाता है. इसकी तासीर शीतल यानी ठंडी होती है. आयुर्वेदिक दृष्टि से इसे शरीर में पित्त और कफ दोष को शांत करने वाली वनस्पति माना जाता है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल अलग-अलग पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रयोगों में किया जाता रहा है.

दूर्वा के पेस्ट या रस को त्वचा पर लगाने की परंपरा रही है. आयुर्वेदिक चिकित्सक के मुताबिक, इसका इस्तेमाल जलन और खुजली जैसी परेशानियों में किया जाता है. कुछ पारंपरिक प्रयोगों में दूर्वा को हल्दी के साथ मिलाकर भी त्वचा पर लगाया जाता है. एक्जिमा और सोरायसिस जैसी समस्याओं में भी इसका पारंपरिक उपयोग बताया गया है.

खानपान में गड़बड़ी और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों को गैस और एसिडिटी की समस्या हो सकती है. आयुर्वेद में दूर्वा के रस का पारंपरिक रूप से सेवन किया जाता है. इसे पाचन तंत्र और एसिडिटी से जुड़ी परेशानियों में लाभकारी माना जाता है.

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खानपान में गड़बड़ी और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों को गैस और एसिडिटी की समस्या हो सकती है. आयुर्वेद में दूर्वा के रस का पारंपरिक रूप से सेवन किया जाता है. इसे पाचन तंत्र और एसिडिटी से जुड़ी परेशानियों में लाभकारी माना जाता है.

ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह ओस से भीगी दूर्वा घास पर नंगे पैर चलने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे आंखों को फायदा मिलता है और रोशनी बेहतर होती है. आयुर्वेदिक चिकित्सक के मुताबिक, दूर्वा की शीतल प्रकृति के कारण इसे पारंपरिक रूप से आंखों के लिए भी उपयोगी माना गया है. हालांकि, आंखों की रोशनी बढ़ने का यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका नहीं है.

दूर्वा का पारंपरिक इस्तेमाल मूत्र तंत्र से जुड़ी समस्याओं में भी बताया जाता है. डॉ. ऋचा श्रीवास्तव के अनुसार, इसके रस का सेवन पेशाब में होने वाली जलन में राहत देने के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता है. हालांकि, पेशाब में जलन संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में पर्याप्त पानी पीने के साथ जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.

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October 30, 2026, 13:59 IST

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