Haiti El Salvador Hostage Crisis :लोकल गुंडों ने विदेशी सेना को बनाया बंधक, हैती-अल सल्वाडोर के बीच ऐलान-ए-जंग? रातों-रात उतारी 1,000 की फौज

जब किसी देश में कानून का राज खत्म हो जाता है, तो वहां बंदूकों और माफिया गिरोहों का हुकूमत चलने लगता है. कैरेबियाई देश हैती आज कुछ ऐसे ही खौफनाक दौर से गुजर रहा है. इस देश में फैली तबाही में एक नया और बड़ा भूचाल आ गया है. अल सल्वाडोर की सरकार ने अपने करीब 1,000 सैनिक अचानक हैती भेज दिए हैं. अल सल्वाडोर के सैनिकों के इतनी बड़ी संख्या में पहुंचने के पीछे एक चौंकाने घटना है, यहां संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा मिशन में तैनात अल सल्वाडोर के चार सैनिकों को ही होस्टेज बना लिया गया है. दावा किया जा रहा है कि ये इंटरनेशनल क्राइम करने की जुर्रत हैती के एक खौफनाक लोकल क्रिमिनल गैंग की है.
हैती में चल क्या रहा है?
हैती की स्थिति को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा. साल 2021 में हैती के राष्ट्रपति जोवोनेल मोइस की उनके ही घर में हत्या कर दी गई थी. इस हत्या के बाद देश की राजनीति और कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. तख्तापलट और अराजकता के इस माहौल का फायदा उठाकर हैती के खूंखार सशस्त्र गिरोहों ने सड़कों पर कब्जा करना शुरू कर दिया.
राजधानी पर गैंग्स का कब्जा: आज हैती की राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस और उसके आसपास के लगभग 80-90% इलाके पर इन आपराधिक गिरोहों का हुकूमत चलता है.
अत्याचार और पलायन: ये गैंग्स आम लोगों से जबरन वसूली, अपहरण, हत्याएं और हिंसक हमले करते हैं. इस तबाही की वजह से अब तक लगभग 15 लाख लोग अपना घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर हो चुके हैं.
चुनाव में देरी: हिंसा इतनी बढ़ चुकी है कि देश में कई सालों से आम चुनाव तक नहीं हो पाए हैं.
हालात इतने बेकाबू हो गए कि हैती की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से मदद मांगी. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल वहां भेजा गया, जिसका काम इन गैंग्स का सफाया करना था.
फिर 18 अक्टूबर को ऐसा क्या हुआ, जिसने सब बदल दिया?
18 अक्टूबर 2026 को राजधानी के बाहरी इलाके में अल सल्वाडोर के सैनिकों और तकनीशियनों के एक दल पर गैंग्स ने घात लगाकर जानलेवा हमला कर दिया.
अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले के अनुसार, उनके वायुसेना के चार तकनीशियन बाजार से अपने बेस की तरफ लौट रहे थे. तभी अपराधियों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और उसमें आग लगा दी. जान बचाने के लिए चारों जवान जलती हुई गाड़ी से कूद पड़े, जिसके बाद से वो रहस्यमयी तरीके से लापता हैं. आशंका जताई जा रही है कि उन्हें हैती के किसी खूंखार गैंग ने बंधक बना लिया है.
हालांकि, हैती के सबसे कुख्यात ‘400 मावोजो’ गैंग के सरगना विल्सन जोसेफ ने वीडियो जारी कर इस हमले में अपना हाथ होने या जवानों को बंधक बनाने से साफ इनकार किया है. लेकिन राष्ट्रपति बुकेले ने अपने जवानों को खोजने और छुड़ाने के लिए एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू कर दिया.
क्या होता है कि दूसरे देश के सैनिकों को बंधक बना लेने का मतलब?
जब कोई स्थानीय क्रिमिनल गैंग या माफिया किसी दूसरे देश के सैनिकों को बंधक बना लेता है, तो इसका सीधा मतलब यs होता है कि उस देश की सरकार और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है और वहां कानून नाम की कोई चीज नहीं बची है. ये स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ी शर्मिंदगी और गंभीर संकट मानी जाती है, क्योंकि इससे ये साबित होता है कि अपराधी इतने ताकतवर हो चुके हैं कि वो विदेशी सेना को भी चुनौती दे रहे हैं. ऐसी हरकत सीधे तौर पर उस देश की संप्रभुता पर बहुत बड़ा हमला होती है, जिसके बाद बंधक बनाने वाले देश के पास अपनी सेना भेजकर बदला लेने या सैन्य कार्रवाई करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है.
अल सल्वाडोर का बड़ा कदम: 1,000 सैनिकों की अचानक तैनाती
अपने चार लापता जवानों को बचाने के लिए अल सल्वाडोर ने बिना वक्त गंवाए करीब 1,000 सैनिकों की एक विशाल टुकड़ी हैती भेज दी.
अमेरिका की मदद: अमेरिका ने इन सैनिकों को तुरंत हैती पहुंचाने के लिए अपने पावरफुल C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट मुहैया कराए.
अल सल्वाडोर ने अब तक क्या-क्या किया : इस घटना से पहले अल सल्वाडोर के महज 124 जवान हैती में मौजूद थे, जो मुख्य रूप से घायल सैनिकों को एयरलिफ्ट करने और तकनीकी मदद के लिए भेजे गए थे. लेकिन अब 1,000 लड़ाकू सैनिकों की एंट्री से अल सल्वाडोर इस पूरे गैंग-वॉर में एक बड़ा खिलाड़ी बन गया है.
अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले खुद अपने देश में ‘क्राइम पर सख्त रुख’ अपनाने के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं. उन्होंने अपने देश में गैंग्स का सफाया कर भारी लोकप्रियता हासिल की है, हालांकि मानवाधिकार संगठन उन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप भी लगाते रहे हैं.
यूएन मिशन की नाकामी और ‘ब्लैकवाटर’ का प्राइवेट कनेक्शन
धीमी रफ्तार और इच्छाशक्ति की कमी: यूएन-समर्थित इस शांति सेना में कुल 5,000 से ज्यादा सैनिक तैनात किए जाने थे, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी वहां केवल 2,000 के करीब ही जवान पहुंच पाए हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूएन के पास इस समस्या को जड़ से खत्म करने की राजनीतिक ताकत ही नहीं है.
प्राइवोट आर्मी की एंट्री: यूएन की सुस्ती को देखते हुए हैती सरकार ने अमेरिका के चर्चित सुरक्षा ठेकेदार और ‘ब्लैकवाटर’ के संस्थापक एरिक प्रिंस की एक प्राइवोट मिलिट्री कंपनी की सेवाएं भी ले रखी हैं. ये कंपनी 2025 से हैती में ड्रोन ऑपरेशन के जरिए गैंग्स पर हमले कर रही है.
इंडिपेंडेंट ऑपरेशन की संभावना: डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अल सल्वाडोर के ये नए 1,000 सैनिक शायद यूएन के ढीले-ढाले कमान ढांचे के तहत काम न करें. वो एरिक प्रिंस की प्राइवोट आर्मी के साथ मिलकर अपने लापता जवानों को ढूंढने के लिए सीधा और आक्रामक ऑपरेशन चला सकते हैं.
आम लोगों की चिंता: ‘हर रहने वाला गैंगस्टर नहीं होता’
अल सल्वाडोर की इस तुरंत कार्रवाई का हैती के मानवाधिकार संगठनों ने स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही एक गंभीर चेतावनी भी दी है.
हैती के ‘नेशनल ह्यूमन राइट्स डिफेंस नेटवर्क’ के प्रमुख पियरे एस्परेंस ने कहा कि सैनिकों की इतनी तेजी से तैनाती राहत की बात है, ताकि आम नागरिकों को आतंकित करने वाले गैंग्स पर लगाम लगाई जा सके. लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘सैन्य ऑपरेशन के दौरान गैंग्स के कब्जे वाले इलाकों में फंसे बेकसूर नागरिकों को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए. गैंग-कंट्रोल इलाकों में रहने वाला हर इंसान गैंगस्टर नहीं होता’.
नए युद्ध की आहट?
1,000 सल्वाडोरन सैनिकों के हैती पहुंचने से अब युद्ध के एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है. अगर लापता जवानों की लोकेशन मिल जाती है, तो उसके बाद अल सल्वाडोर की सेना हैती के खूंखार गैंग्स के साथ सीधे और लंबे युद्ध में उतर सकती है.
फिलहाल, पूरा कैरेबियाई क्षेत्र और इंटरनेशनल कम्यूनिटी ये देखने का इंतजार कर रहा है कि क्या अल सल्वाडोर के सैनिक हैती को गैंग्स के इस खौफनाक चंगुल से आजाद करा पाएंगे, या फिर हैती का ये दलदल उन्हें भी अपने अंदर खींच लेगा.



