Rajasthan

Sirohi News | Sirohi History | Rajasthan History

सिरोही. जिले के सिरोही शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर बना सारणेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह सिरोही के पुराने राजपरिवार के इतिहास को भी अपने अंदर समेटे हुए है. मंदिर परिसर में बने मंदाकिनी कुंड के किनारे बनी करीब 1 दर्जन खूबसूरत छतरियां आज भी देवड़ा चौहान राजवंश की पुरानी परंपराओं और इतिहास की याद दिलाती हैं. इन छतरियों को देखने के लिए दूर-दूर से इतिहास में रुचि रखने वाले लोग और पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं.

स्थानीय रहवासी अशोक पंडित के अनुसार मंदाकिनी कुंड के पास सिरोही राजपरिवार के सदस्यों की कई कलात्मक छात्राएं बनी हुई है. जो एक स्मारक के रूप में पहचानी जाती है. सारणेश्वर मंदिर के पास का यह स्थान सिरोही के महाराव और उनके परिवार का शाही अंतिम संस्कार स्थल हुआ करता था. पुराने समय में राजपरिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर इसी जगह उनका अंतिम संस्कार किया जाता था. इसके बाद उनकी याद में पत्थरों से छतरियां बनाई जाती थीं.

राजपूताना शैली के साथ सोलंकी और परमार कला का असर मंदिर के पास बनी इन छतरियों की कलात्मक निर्माण शैली यहां आने वाले लोगों को काफी आकर्षित करती है. इन पर लगे शिलालेख और कई तरह की आकृतियां उकेरी हुई होती है. इनमें राजा के साथ उनकी रानियों की आकृतियां भी बनी हुई हैं. यहां राजपूताना शैली के साथ सोलंकी और परमार कला का असर देखने को मिलता है. ऊंचे चबूतरे, नक्काशीदार खंभे और गुंबद वाली छतें इनकी खूबसूरती बढ़ाती हैं. कुछ पुरानी छतरियों में 14वीं और 15वीं सदी की बनावट दिखाई देती है, जबकि बाद के समय में बनी इमारतों में मुगल शैली का असर भी नजर आता है.

राजपरिवार के कई सदस्यों की छतरियां कायम16वीं शताब्दी की नंदिनी की छतरी, खेतला जी की छतरी, 18वीं शताब्दी की सोमसिंह, सुरमल, विक्रम सिंह, सुंदर रावत, शिवभान सिंह, सहस्त्रमल, सूर्यदेव राव की छतरी, वैरिमल रायमल, रानी चंद्रावती, रणमल सिंह, राजा कल्हण, पुखराज राव की छतरी, प्रताप सिंह, कृष्णराज, धुंधकसिंह, धर्म वर्ष की छतरी, धारा बाई और 19 वीं शताब्दी की रूपवती कंवर, रतन कंवर, दूधासिंह के अलावा राजपरिवार के कई सदस्यों की छतरियां इस क्षेत्र में बनी हुई है.

अलाउद्दीनखिलजी की सेना ने किया था हमले का प्रयास
सारणेश्वर महादेव मंदिर सिरोही के देवड़ा चौहान राजपरिवार के इष्टदेव माने जाते हैं. मंदिर परिसर से जुड़ी लोककथाओं में अलाउद्दीन खिलजी की सेना का भी जिक्र मिलता है. मान्यता है कि खिलजी की सेना ने मंदिर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में मंदाकिनी कुंड के पानी से जुड़ी चमत्कारिक घटना के बाद मंदिर को नुकसान पहुंचाना बंद कर दिया गया. इस कहानी को स्थानीय लोग आज भी सुनाते हैं.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj