ISRO NVS-03 Satellite Launch Live Updates | इसरो का नया नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 आज रात होगा लॉन्च, अमेरिकी जीपीएस की निर्भरता खत्म करने की तैयारी

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लॉन्च सीक्वेंस शुरू, कुछ मिनटों में NVS-03 सैटेलाइट को लेकर उड़ेगा ISRO रॉकेट
Last Updated:October 30, 2026, 23:40 IST
ISRO NVS-03 Satellite Launch LIVE: इसरो आज रात 11.51 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिए एनवीएस-03 सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है. यह भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक की द…और पढ़ें
इसरो आज रात लॉन्च करेगा NVS-03 सैटेलाइट, NavIC को मिलेगी नई ताकत. (Photo : AI Generated)
ISRO NVS-03 Satellite Launch LIVE: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज (30 अक्टूबर) रात एक बड़ा स्पेस मिशन अंजाम देने जा रहा है. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट उड़ान भरेगा. इस रॉकेट के जरिए भारत की दूसरी पीढ़ी का तीसरा नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस-03 अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. इसका तय समय आज रात 23 बजकर 51 मिनट रखा गया है. यह सैटेलाइट भारत के अपने रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम यानी NavIC की सेवाओं को बिना रुकावट जारी रखने के लिए तैयार किया गया है. इस मिशन की कामयाबी से देश के नेविगेशन नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही सीमा सुरक्षा और नागरिक सेवाओं में लोकेशन ट्रैकिंग पहले से ज्यादा सटीक हो जाएगी.
ISRO के NVS-03 सैटेलाइट में ऐसा क्या खास है और यह कैसे काम करेगा?
एनवीएस-03 सैटेलाइट को भारत की जरूरतों के मुताबिक बेहद आधुनिक पेलोड के साथ तैयार किया गया है.
इस सैटेलाइट में देश में ही विकसित रूबिडियम एटॉमिक घड़ी लगाई गई है. इसके साथ कुछ अन्य आयातित एटॉमिक घड़ियां भी इसमें मौजूद हैं.
यह सिस्टम भारत की पूरी मुख्य भूमि के अलावा देश की सीमा से करीब 1500 किलोमीटर बाहर तक सटीक पोजीशन और समय की जानकारी देगा.
इसमें आम लोगों के लिए स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस दी जाएगी. इसके अलावा सुरक्षा बलों और अधिकृत एजेंसियों के लिए खास एन्क्रिप्टेड रेस्ट्रिक्टेड सर्विस की व्यवस्था भी रहेगी.
आम आदमी की जिंदगी में क्या बदलाव आएगा?
इसरो की एनवीएस सीरीज के इस नए सैटेलाइट में सिविलियन इस्तेमाल के लिए एल1 फ्रीक्वेंसी बैंड जोड़ा गया है. पहले के सैटेलाइट्स में यह बैंड न होने से आम मोबाइल फोन्स में इसका सीधा इस्तेमाल सीमित था.
अब नए स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर्स सीधे NavIC के सिग्नल्स को आसानी से पकड़ सकेंगे. इससे आम यूजर्स को मैप्स या अन्य नेविगेशन ऐप्स पर रास्ता तलाशते वक्त बेहतर एक्यूरेसी मिलेगी.
इसरो इस सीरीज में कुल 5 सैटेलाइट्स भेजने की योजना पर काम कर रहा है. इससे विदेशी जीपीएस नेटवर्क पर देश की निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी.
ISRO NVS-03 Satellite Launch LIVE | इसरो सैटेलाइट लॉन्च लाइव अपडेट
October 30, 202623:40 IST
ISRO Launch LIVE: लॉन्च सीक्वेंस शुरू, NVS-03 को किस कक्षा में स्थापित किया जाएगा?
जीएसएलवी-एफ18 पहले एनवीएस-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट यानी जीटीओ में पहुंचाएगा. इसकी शुरुआती कक्षा में पृथ्वी से निकटतम दूरी करीब 170 किलोमीटर और अधिकतम दूरी करीब 37,023 किलोमीटर होगी. इसके बाद सैटेलाइट में लगे लिक्विड अपोजी मोटर की मदद से इसकी कक्षा को बदला जाएगा. आखिरकार इसे लगभग 37,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाली निर्धारित जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाएगा. यह प्रक्रिया सफल होने के बाद ही सैटेलाइट को उसकी निर्धारित स्थिति में काम करने के लिए तैयार किया जा सकेगा.
October 30, 202623:36 IST
ISRO NVS-03 Satellite Launch LIVE: L1, L5 और S बैंड सिग्नल का क्या काम है?
एनवीएस-03 में तीन अलग-अलग सिग्नल बैंड शामिल हैं.
एल1 बैंड: आधुनिक स्मार्टफोन और नेविगेशन चिपसेट के साथ अनुकूलता बढ़ाने में मदद करेगा.
एल5 बैंड: सटीक नेविगेशन और पोजिशनिंग सेवाओं के लिए इस्तेमाल होता है.
एस बैंड: नाविक की मौजूदा नेविगेशन व्यवस्था का हिस्सा है.
एल1 सिग्नल जुड़ने से मोबाइल कंपनियों और डिवाइस निर्माताओं के लिए NavIC को अपनाना आसान हो सकता है. हालांकि इसके लिए संबंधित उपकरणों में जरूरी हार्डवेयर सपोर्ट भी होना चाहिए.
October 30, 202623:25 IST
ISRO NVS-03 Satellite Launch LIVE: NVS-03 सैटेलाइट का वजन और आकार कितना है?
एनवीएस-03 का वजन लगभग 2250 किलोग्राम है. इसे इसरो के आई-2के सैटेलाइट बस प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है. इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सैटेलाइट के अलग-अलग उपकरणों को एक साथ संचालित करने के लिए होता है. इसमें नेविगेशन पेलोड के अलावा संचार और समय निर्धारण से जुड़े उपकरण लगाए गए हैं. इसकी पावर हैंडलिंग क्षमता करीब 3 किलोवाट है. सैटेलाइट को लंबे समय तक अंतरिक्ष में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है.
October 30, 202623:15 IST
ISRO Satellite Launch LIVE: NVS-03 में एटॉमिक क्लॉक क्यों लगाई गई है?
नेविगेशन सैटेलाइट में एटॉमिक क्लॉक सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक है. यह बेहद सटीक समय बताती है. सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल के समय के आधार पर रिसीवर अपनी लोकेशन का पता लगाता है. एनवीएस-03 में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ खरीदी गई क्लॉक भी मौजूद हैं. इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
(Photo : ISRO/X)
October 30, 202622:50 IST
ISRO NVS-03 Launch LIVE: इस सैटेलाइट से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
एनवीएस-03 में एल1 बैंड की सुविधा दी गई है. यह आधुनिक स्मार्टफोन और दूसरे नेविगेशन उपकरणों के लिए उपयोगी है. इससे नाविक सिस्टम की दूसरे ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम के साथ अनुकूलता बेहतर हो सकती है. इस तकनीक का इस्तेमाल वाहन ट्रैकिंग, समुद्री नेविगेशन, आपातकालीन सेवाओं और परिवहन व्यवस्था में किया जा सकता है.
October 30, 202622:42 IST
ISRO Launch LIVE: NavIC सिस्टम को अभी NVS-03 की जरूरत क्यों है?
नाविक सिस्टम में पहले कई सैटेलाइट की एटॉमिक क्लॉक में खराबी आई थी. जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ एनवीएस-02 भी अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था. जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक नाविक के पास पोजिशनिंग सेवाओं के लिए तीन काम कर रहे सैटेलाइट थे. स्वतंत्र पोजिशनिंग सेवा के लिए कम से कम चार सैटेलाइट जरूरी हैं. ऐसे में एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण इस व्यवस्था को मजबूत करने में अहम है.
October 30, 202622:25 IST
ISRO GSLV F18 NVS 03 Launch LIVE: क्या है इसरो के एनवीएस-03 सैटेलाइट की खासियत?
(Photo : ISRO)
एनवीएस-03 भारत की अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा सैटेलाइट है. इसका उद्देश्य आईआरएनएसएस सीरीज की नेविगेशन सेवाओं को निरंतर बनाए रखना है. इस सैटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ खरीदी गई एटॉमिक क्लॉक भी लगाई गई हैं. इसमें मौजूदा एल5 और एस सिग्नल के अलावा एल1 सिग्नल भी शामिल है. इससे भारत की जमीन और सीमाओं से 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में नेविगेशन कवरेज मिलेगा.

October 30, 202622:17 IST
ISRO GSLV-F18 Launch LIVE: NVS-03 सैटेलाइट से मजबूत होगी भारत की नेविगेशन सेवा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का जीएसएलवी-एफ18 मिशन भारत की नेविगेशन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम है. इस मिशन के तहत एनवीएस-03 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा. यह जीएसएलवी रॉकेट की 20वीं उड़ान है. इसका प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकंड लॉन्च पैड से प्रस्तावित है.
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
October 30, 2026, 22:13 IST



