21 साल की सरपंच प्रेरणा नरुका का गांव बदलने का सपना, बेटियों के लिए लाइब्रेरी तो महिलाओं को रोजगार

Alwar: अलवर जिले की रैणी पंचायत समिति के गढ़ गांव की 21 वर्षीय सरपंच प्रेरणा नरुका इन दिनों अपने गांव के विकास को लेकर चर्चा में हैं. फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रहीं प्रेरणा पंचायत की जिम्मेदारी के साथ बेटियों की शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और गांव की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का सपना देख रही हैं. खास बात यह है कि प्रेरणा फिजियोथेरेपी की छात्रा हैं और मेडिकल की पढ़ाई के साथ पंचायत की जिम्मेदारी भी निभाना चाहती हैं. उनके सपनों में गांव की बेहतर सड़कें, बेटियों के लिए लाइब्रेरी, महिलाओं को रोजगार और ऐतिहासिक सालार बाबा धाम का विकास शामिल है. एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने सरपंच बनने की प्रेरणा, परिवार के सहयोग और गांव के विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में खुलकर बात की.
प्रेरणा पहले जयपुर में रहती थीं. गांव आने-जाने के दौरान उन्होंने वहां की बुनियादी समस्याओं को करीब से देखा. उनके मुताबिक गांव में सड़कें अच्छी नहीं थीं, नालियों की व्यवस्था ठीक नहीं थी, साक्षरता दर कम थी और रोजगार के अवसर भी सीमित थे. उन्होंने आसपास के दूसरे विकसित गांवों को देखकर महसूस किया कि उनके गांव में भी विकास की काफी जरूरत है. इसी सोच ने उन्हें पंचायत की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रेरित किया.
पिता और नाना-नानी से मिली राजनीति में आने की प्रेरणा
प्रेरणा नरुका के परिवार का पंचायत और राजनीति से पुराना जुड़ाव रहा है. उनके पिता पहले सरपंच रह चुके हैं. वहीं उनकी ननिहाल में भी पंचायत की जिम्मेदारियां निभाई गई हैं. उनके नाना करीब 10 साल तक सरपंच रहे और उनकी नानी भी सरपंच रह चुकी हैं. इस बार उनके मामा ने भी चुनाव लड़ा था. प्रेरणा ने बताया कि जब उनके पिता सरपंच थे, तब गांव में काफी विकास कार्य हुए थे, लेकिन पिछले कार्यकाल में विकास की रफ्तार कम होती गई. ऐसे में उनके मन में भी गांव के लिए कुछ करने और लोगों की समस्याओं को दूर करने की इच्छा पैदा हुई. उन्होंने कहा कि मेडिकल फील्ड में भी लोगों की मदद करना ही मुख्य उद्देश्य होता है और वह इसी सोच को राजनीति में भी आगे बढ़ाना चाहती हैं. इस फैसले में उनकी मां, बुआ और परिवार के अन्य सदस्यों ने पूरा साथ दिया. परिवार ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि राजनीति में भी मेहनत और जिम्मेदारी के साथ अच्छा करियर बनाया जा सकता है.
बेटियों के लिए गांव में लाइब्रेरी बनवाना चाहती हैं प्रेरणा
प्रेरणा नरुका के विजन में सबसे खास बात गांव की बेटियों की शिक्षा को लेकर है. उनका मानना है कि कई परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांव या शहर जाने की अनुमति नहीं देते. ऐसे में अगर गांव में ही एक अच्छी लाइब्रेरी स्थापित हो जाए तो लड़कियों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सकता है.इंटरव्यू में प्रेरणा ने बताया कि वह अपने गांव में लाइब्रेरी स्थापित करवाना चाहती हैं, ताकि बेटियों को शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े. उनका मानना है कि गांव में ही पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध होने से परिवारों की झिझक कम हो सकती है और लड़कियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर रहेगा जोर
महिलाओं के लिए रोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना भी प्रेरणा की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने कहा कि गांव की कई महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती. इसकी एक वजह शिक्षा और जागरूकता की कमी भी है. कई बार योजनाएं आती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में जरूरतमंद महिलाएं उनका लाभ नहीं उठा पातीं. प्रेरणा चाहती हैं कि महिलाओं को योजनाओं की जानकारी देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम और बैठकें आयोजित की जाएं. जरूरत पड़ी तो वह खुद घर-घर जाकर महिलाओं को योजनाओं के बारे में बताएंगी. उनका उद्देश्य महिलाओं को रोजगार के अवसरों और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं से जोड़ना है.
तीन गांवों की पंचायत में सड़कों की हालत सुधारना चुनौती
विकास के मुद्दे पर प्रेरणा नरुका ने सबसे बड़ी समस्या सड़कों की खराब स्थिति को बताया. उनके अनुसार उनकी पंचायत में कुल तीन गांव हैं. मुख्य गांव की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है, लेकिन पंचायत के बाकी दो गांवों में सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की हालत ज्यादा खराब है. ऐसे में तीनों गांवों तक विकास कार्य पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा. उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए कब्रिस्तान की जगह की समस्या का भी जिक्र किया. इसके अलावा उनकी प्राथमिकताओं में सालार बाबा धाम का विकास भी शामिल है. प्रेरणा का कहना है कि यह एक ऐतिहासिक धाम है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते-जाते हैं. वह चाहती हैं कि यहां आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें और धाम का विकास हो.
युवा और महिलाओं को साथ लेकर चलना चाहती हैं प्रेरणा नरुका
प्रेरणा खुद युवा हैं, इसलिए गांव की नई पीढ़ी और विशेषकर लड़कियों से उनका जुड़ाव भी अहम है. उनका कहना है कि गांव की लड़कियां उन्हें देखकर गर्व महसूस करती हैं और उनका समर्थन करती हैं. वह चाहती हैं कि यह भरोसा और जुड़ाव आगे भी बना रहे. साथ ही वह गांव के युवाओं को भी विकास की प्रक्रिया में शामिल करना चाहती हैं. इंटरव्यू में प्रेरणा ने अपनी एक खास इच्छा भी जाहिर की. उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि गांव के लोग उन्हें सरपंच के नाम से नहीं, बल्कि बेटी के नाम से बुलाएं. उनके लिए यही सबसे बड़ी उपलब्धि होगी कि गांव के लोग उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानें. एक मेडिकल स्टूडेंट के रूप में लोगों की मदद करने की सोच और एक युवा सरपंच के रूप में गांव के विकास का सपना, प्रेरणा नरुका के इस सफर की दो अहम कड़ियां हैं. अब देखना होगा कि शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उनका यह विजन पंचायत में किस तरह जमीन पर उतरता है.



