एक गांव, 1000 युवा और खाड़ी देशों तक पहुंची मेहनत की पहचान, जानें रायमाता की मान्यता से फेमस गांगियासर की कहानी

झुंझुनू: शेखावाटी के गांवों की पहचान केवल उनकी हवेलियों और ऐतिहासिक विरासत से नहीं, बल्कि यहां के लोगों की मेहनत, आस्था और आपसी भाईचारे से भी है. ऐसा ही एक गांव है गांगियासर। बिसाऊ से करीब 10 किलोमीटर दूर बसे इस गांव की पहचान प्रसिद्ध रायमाता मंदिर से है. यहां की एक पुरानी लोककथा आज भी लोगों की जुबान पर है. वहीं गांव के करीब एक हजार युवा खाड़ी देशों में रोजगार कर अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की अर्थव्यवस्था में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.
गांगियासर में रायमाता मंदिर को लेकर एक प्रचलित लोककथा है. गांव में कही जाने वाली कहावत है- ‘जय जननी मातेश्वरी गांगियासर की राय, भक्त जान संकट हर्यो करी बैल से गाय.’ लोकमान्यता के अनुसार, एक चोर किसी गांव से बैल चुराकर गांगियासर आ गया. पीछे-पीछे बैल का मालिक भी पहुंच रहा था. पकड़े जाने के डर से चोर ने बैल को रायमाता मंदिर के बाहर बांध दिया और खुद मंदिर में जाकर माता से रक्षा की प्रार्थना करने लगा. मान्यता है कि माता ने बैल को गाय में बदल दिया. इस घटना के बाद से रायमाता के प्रति लोगों की आस्था और बढ़ गई. आज यहां लगने वाला प्रसिद्ध मेला दूर-दराज से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.
खाड़ी देशों में एक हजार युवा, विदेश की कमाई से संवर रहे घरकरीब 9,500 की आबादी वाले गांगियासर की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार विदेशों में काम करने वाले युवा हैं. गांव के करीब एक हजार युवा खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे हैं. उनकी मेहनत से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. खेती भी यहां आजीविका का प्रमुख साधन है. बाजरा, गेहूं, चना, मूंग, ग्वार और सरसों की फसलें गांव की कृषि व्यवस्था का आधार हैं. विदेशों में रोजगार और खेती के मेल से गांव की आर्थिक गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं.
महाजन परिवारों ने विकास में निभाई अहम भूमिकागांगियासर के विकास में यहां के महाजन परिवारों का विशेष योगदान रहा है. राज ठिकाने के सदस्य मैनपाल सिंह शेखावत के अनुसार, गांव के महाजन परिवारों ने स्कूल, अस्पताल और अतिथि भवन बनवाने में सहयोग दिया. इसके अलावा जलापूर्ति और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के लिए भी आर्थिक मदद की. शिक्षा के क्षेत्र में भी गांव ने अच्छी पहचान बनाई है. यहां के 15 युवा देश-विदेश में डॉक्टर बन चुके हैं. सेना, पुलिस, प्रशासन, शिक्षा और बैंकिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी गांव के लोग महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे रहे हैं.
मुहर्रम में भाईचारे की मिसाल, होली पर सात दिन गूंजती है चंगगांगियासर की सबसे खूबसूरत पहचान यहां का हिंदू-मुस्लिम भाईचारा है. मुहर्रम के दौरान ताजिये के जुलूस में हिंदू परिवार भी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार, कई हिंदू माताएं अपने नवजात बच्चों को स्वास्थ्य की कामना से ताजिये के नीचे से निकालती हैं. वहीं रायमाता के प्रसिद्ध मेले में आयोजित कुश्ती दंगल में मुस्लिम पहलवान भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. वे पहलवानी के दांव-पेंच दिखाने के साथ रेफरी की भूमिका भी निभाते हैं. मेले में आने वाले लोगों के लिए ठंडे पानी और पेय पदार्थों की निशुल्क व्यवस्था भी की जाती है.
सवारी पूरे लवाजमे के साथ गढ़ से निकलती होली के अवसर पर गांव की एक और पुरानी परंपरा जीवंत हो उठती है. पूर्व राजघराने की ओर से गढ़ परिसर में सात दिवसीय चंग और गींदड़ लोकनृत्य का आयोजन किया जाता है. प्रमोद प्रजापत के अनुसार, होलिका दहन भी गढ़ परिसर में ही होता है. वहीं गणगौर के अवसर पर सवारी पूरे लवाजमे के साथ गढ़ से निकलती है. ये आयोजन गांव की सांस्कृतिक विरासत को आज भी सहेजे हुए हैं.
विकास की उम्मीदों के बीच कुछ बुनियादी समस्याएं भीगांव में विकास की कई उपलब्धियों के बावजूद कुछ समस्याएं अब भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण हैं. इकबाल खान के अनुसार, समुचित निकासी व्यवस्था नहीं होने से बरसाती और गंदा पानी कई जगह लंबे समय तक जमा रहता है. सरकारी अस्पताल में डॉक्टर का पद रिक्त होने से ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए परेशानी उठानी पड़ती है.
युवाओं और गांव की एकजुटता की कहानी बन चुकीकरीब 9,500 की आबादी वाला गांगियासर अपनी धार्मिक आस्था, विदेशों में मेहनत कर रहे युवाओं, शिक्षा में उपलब्धियों और सामाजिक सौहार्द के लिए अलग पहचान रखता है. रायमाता की लोककथा से शुरू हुई पहचान आज विदेशों तक पहुंच चुके युवाओं और गांव की एकजुटता की कहानी बन चुकी है.



