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450 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर, जहां गजराज पर विराजती हैं मां, 31 इंच की मूर्ति के पीछे छिपा है इतिहास, जानें

Last Updated:November 02, 2026, 14:26 IST

Udaipur Mahalakshmi Mandir: उदयपुर के भटियानी चौहट्टा स्थित करीब 450 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है. यहां मां महालक्ष्मी गजराज पर विराजित हैं. सफेद पत्थर से बनी 31 इंच ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि महाराणा जगत सिंह के शासनकाल में रानी की इच्छा पर मंदिर बनवाया गया था.

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उदयपुर का 450 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर, जहां गजराज पर विराजती हैं मांZoom उदयपुर में 450 साल पुराना मां महालक्ष्मी का अनोखा मंदिर

उदयपुर: उदयपुर के भटियानी चौहट्टा स्थित करीब 450 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक विरासत के लिए खास पहचान रखता है. यहां मां महालक्ष्मी गजराज पर विराजित हैं. सफेद पत्थर से बनी मां की 31 इंच ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि महाराणा जगत सिंह के शासनकाल में रानी की इच्छा पर इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था. माता की इस विशेष प्रतिमा को भीनमाल से लाया गया था. माता महालक्ष्मी पूजन के पर्व दीपावली के अवसर पर देखिए मंदिर का इतिहास और मां के इस दुर्लभ स्वरूप की विशेषता.

झीलों की नगरी उदयपुर में भटियानी चौहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर का विशेष स्थान है. करीब साढ़े चार शताब्दी पुराने इस मंदिर में मां महालक्ष्मी गजराज पर विराजित हैं. सफेद पत्थर से निर्मित 31 इंच ऊंची प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं. श्रीमाली जाति संपत्ति व्यवस्था ट्रस्ट के सदस्य हेमेन्द्र के अनुसार मंदिर का निर्माण महाराणा जगत सिंह के शासनकाल में करवाया गया था. प्रचलित मान्यता के अनुसार उस समय रानी ने इच्छा जताई थी कि जब उदयपुर में भगवान जगदीश का भव्य मंदिर बन रहा है, तो मां लक्ष्मी का मंदिर भी होना चाहिए. रानी की इच्छा पर महाराणा ने महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण करवाया. इसके बाद भीनमाल से मां की प्रतिमा लाकर विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की गई.

मां लक्ष्मी कमल पर विराजित दिखाई देतीमंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजित मां महालक्ष्मी का अनूठा स्वरूप है. आमतौर पर मां लक्ष्मी कमल पर विराजित दिखाई देती हैं, लेकिन यहां मां गजराज पर विराजित हैं. धार्मिक मान्यता में मां के इस स्वरूप को गजलक्ष्मी कहा जाता है. हाथी को ऐश्वर्य, वैभव, शक्ति और शुभता का प्रतीक माना जाता है. करीब 4200 वर्ग फीट में फैला यह मंदिर अपनी प्राचीनता और विशिष्ट प्रतिमा के कारण अलग पहचान रखता है.

मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ हैकरीब 450 साल से अधिक समय से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां आने वाले भक्त मां के दर्शन कर परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. प्राचीन इतिहास, गजराज पर विराजित मां का दुर्लभ स्वरूप और भक्तों की अटूट आस्था इस मंदिर को उदयपुर की धार्मिक विरासत में विशिष्ट स्थान दिलाती है. मां महालक्ष्मी के इस अनूठे स्वरूप के दर्शन करने के लिए सालभर श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहता है. प्राचीन परंपराओं और धार्मिक आस्था को संजोए यह मंदिर आज भी उदयपुर की पहचान का अहम हिस्सा है.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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Udaipur,Rajasthan

First Published :

November 02, 2026, 14:26 IST

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