Sweet Recipe: 30 साल पुराना स्वाद और पहाड़ जैसा आकार, करौली के हाईवे पर UP के इस मिठाई की धूम

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30 साल पुराना स्वाद और पहाड़ जैसा आकार, करौली के हाईवे पर UP के मिठाई की धूम
Last Updated:November 03, 2026, 08:04 IST
Panchmewa Sweet Looks Like Mountain: मिठाइयों की दुनिया में आपने कई तरह की वैरायटी देखी होंगी, लेकिन करौली के नेशनल हाईवे-23 पर इन दिनों पहाड़ जैसी दिखने वाली मिठाई लोगों का ध्यान खींच रही है. इसका नाम पंचमेवा है, जो करीब 30 साल पुरानी पारंपरिक मिठाई है. उत्तर प्रदेश के व्यापारी इसे बड़े आकार में तैयार कर हाईवे के किनारे ठेलों पर बेच रहे हैं. करौली में करीब 9 से 10 व्यापारी पिछले एक सप्ताह से अलग-अलग ठेलों पर इसकी बिक्री कर रहे हैं. पंचमेवा बनाने में नारियल का बुरादा, छुहारा, इलायची, बादाम, किशमिश, चेरी, मूंगफली, सूजी और शक्कर का इस्तेमाल होता है. व्यापारी राजीव सिंह के मुताबिक, इसे तैयार करने में दो से तीन दिन लगते हैं. वे पिछले 10 साल से इस मिठाई को बेच रहे हैं. इसका विशाल आकार देखकर हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालक और राहगीर रुकते हैं और इसके स्वाद के बारे में जानकारी लेते हैं.
मिठाइयों की दुनिया में आपने कई तरह की वैरायटी देखी होंगी, लेकिन क्या आपने कभी पहाड़ जैसी दिखने वाली मिठाई देखी है? इसकी खासियत सिर्फ इसका विशाल आकार ही नहीं, बल्कि इसे बेचने का अनोखा अंदाज भी है. यह मिठाई दुकानों या बड़े बाजारों में नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में नेशनल हाईवे के किनारे देखने को मिलती है.
पंचमेवा करीब 30 साल पुरानी पारंपरिक मिठाई है, जिसका खास स्वाद लोगों को आकर्षित कर रहा है. उत्तर प्रदेश के व्यापारी इसे अनोखे अंदाज में लोगों तक पहुंचा रहे हैं. इन दिनों करौली के नेशनल हाईवे-23 पर भी पंचमेवा की खूब चर्चा है. पारंपरिक स्वाद और खास पहचान के चलते राहगीर भी इस मिठाई को चखने के लिए रुक रहे हैं.
हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों की नजर जैसे ही बड़े पहाड़ के आकार में सजी इस मिठाई पर पड़ती है, वे रुककर इसे देखने और खरीदने के लिए आकर्षित हो जाते हैं. करौली में उत्तर प्रदेश के करीब 9 से 10 व्यापारी अलग-अलग ठेलों पर पंचमेवा बेच रहे है. पिछले करीब एक सप्ताह से यहां इसकी बिक्री की जा रही है.
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पंचमेवा की सबसे बड़ी खासियत इसे तैयार करने की पारंपरिक विधि और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री है. व्यापारी राजीव सिंह बताते हैं कि इसे बनाने में नारियल का बुरादा, छुहारा, इलायची, बादाम, किशमिश, चेरी, मूंगफली, सूजी और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है. इन सभी सामग्रियों को मिलाकर खास तरीके से मिठाई तैयार की जाती है.
इसे बनाने में करीब दो से तीन दिन का समय लगता है. इसका पहाड़ जैसा बड़ा आकार ही इसे दूसरी मिठाइयों से अलग पहचान दिलाता है.उत्तर प्रदेश के सजानपुर से करौली आए व्यापारी राजीव सिंह पिछले करीब 10 वर्षों से पंचमेवा बेचने का काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस मिठाई का स्वाद करीब 20 से 30 साल पुरानी परंपरा से जुड़ा हुआ है.
इसे तैयार करने की विधि और खास सामग्री ही इसकी पहचान है. व्यापारी बातते हैं कि वे अलग-अलग इलाकों में जाकर हाईवे के किनारे इसकी बिक्री करते हैं. व्यापारी अखिलेश सिंह बताते हैं कि पंचमेवा की बिक्री का तरीका दूसरी मिठाइयों से अलग है. वे देश के अलग-अलग हिस्सों में नेशनल हाईवे के किनारे ठेले लगाकर इसे बेचते हैं. हाईवे पर सफर करने वाले लोग जब इसके बड़े आकार को देखते हैं तो उत्सुकतावश रुकते हैं और मिठाई के बारे में जानकारी लेते हैं.यही इसका सबसे बड़ा आकर्षण है.
करौली के नेशनल हाईवे-23 पर करीब 10 ठेलों पर यह मिठाई बेची जा रही है. व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों के साथ सफर करने वाले राहगीर भी इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं. पहाड़ जैसी बनावट, मेवों से तैयार होने वाली सामग्री और पारंपरिक स्वाद के कारण पंचमेवा इन दिनों हाईवे से गुजरने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
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November 03, 2026, 08:03 IST



