दीपावली पर स्वदेशी की बयार, मिट्टी के दीये और कलश की बढ़ी मांग, कुम्हारों के चेहरों पर आई मुस्कान

Last Updated:November 07, 2026, 11:42 IST
Jhunjhunu News: झुंझुनूं के बाजारों में इस बार दीपावली पर स्वदेशी उत्पादों और मिट्टी के दीयों-कलश की भारी मांग देखने को मिल रही है. मांग बढ़ने से कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गई है और वे दिन-रात डिजाइनर दीये व कलश बनाने में जुटे हैं. स्थानीय लोगों द्वारा स्वदेशी को प्राथमिकता देने से कुंभकार परिवारों के चेहरों पर मुस्कान आ गई है और उन्हें इस त्योहारी सीजन में अच्छी आमदनी की उम्मीद है.
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झुंझुनूं में स्वदेशी की मांग, मिट्टी के दीयों से रोशन हुए कुम्हारों के चेहरे
झुंझुनूं. दीपोत्सव के पावन पर्व पर झुंझुनूं जिले के बाजारों में इस बार स्वदेशी उत्पादों की जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है. चायनीज लाइटों की चकाचौंध के बीच लोग अपने घरों को सजाने और पूजा-पाठ के लिए पारंपरिक स्वदेशी वस्तुओं को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं. विशेष रूप से मिट्टी के बने दीयों और कलश की बढ़ी मांग ने वर्षों से इस कला को सहेज रहे कुम्हारों के चेहरों पर खुशी ला दी है.
मांग में आई इस अचानक तेजी से मिट्टी को नया रूप देने वाले कारीगरों के चाक की रफ्तार भी तेज हो गई है. स्थानीय कुंभकार दिन-रात मेहनत करके खूबसूरत दीये और बर्तन तैयार करने में जुटे हैं.
मिट्टी को तराशने में जुटे कुम्हार, बाजारों में डिजाइनर दीयों की भारी मांगचिकनी मिट्टी को अपने हुनर से आकर्षक डिजाइनों में ढालने का काम इन दिनों झुंझुनूं के कुम्हार मोहल्लों में जोर-शोर से चल रहा है. कुंभकार परिवार दिन-रात एक करके मिट्टी के दीये, कलश, मटकियां और सजावटी सामान तैयार कर रहे हैं. इस बार बाजारों में पारंपरिक दीयों के अलावा आधुनिक और रंग-बिरंगे डिजाइनर दीयों की भी खूब धूम मची हुई है. इसके साथ ही दीपावली पूजन के लिए इस्तेमाल में आने वाले छोटे और बड़े आकार के मिट्टी के कलशों की खरीदारी को लेकर भी ग्राहकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है.
‘वोकल फॉर लोकल’ से कुम्हार परिवारों को अच्छी आमदनी की उम्मीदबाजार में मिट्टी के बर्तन और दीये खरीदने पहुंचे स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वदेशी दीये जलाना न केवल शुभ माना जाता है, बल्कि इससे स्थानीय कारीगरों को भी सीधा समर्थन मिलता है. वहीं, स्थानीय कुंभकारों ने बताया कि इस बार दीपावली पर मिट्टी के उत्पादों की मांग काफी बेहतर है, जिससे उन्हें अच्छी बिक्री और आमदनी की पूरी उम्मीद है. ग्राहकों की बढ़ती पसंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस बार पहले से ज्यादा माल तैयार करना पड़ रहा है.
स्वदेशी परंपरा और आजीविका का संबल बने मिट्टी के दीयेमिट्टी के दीये केवल दीपावली पर घरों को रोशन करने का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये हमारी पीढ़ियों पुरानी कला, संस्कृति और परंपरा के संवाहक भी हैं. मिट्टी के दीयों की खरीदारी से एक ओर जहां ‘वोकल फॉर लोकल’ और स्वदेशी परंपरा को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर कुम्हार परिवारों की आजीविका को भी मजबूती मिल रही है. इस बार दीपोत्सव की खुशियां बाजारों के साथ-साथ झुंझुनूं के कुंभकार परिवारों के घरों में भी नई समृद्धि और रोशनी की उम्मीद लेकर आई हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
November 07, 2026, 11:42 IST



