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Agriculture: किसान सिर्फ सरसों-गेहूं तक सीमित न रहें, इन फसलों से भी बढ़ा सकते हैं कमाई, जानें खेती का तरीका

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किसान सिर्फ सरसों-गेहूं तक सीमित न रहें, इन फसलों से भी बढ़ा सकते हैं कमाई

Last Updated:October 16, 2026, 11:18 IST

Rabi Crops Sowing Tips: भरतपुर जिले में सरसों और गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसलें हैं, लेकिन किसान चना, जौ, दलहनी फसलों और सब्जियों की खेती से भी आमदनी बढ़ाने के विकल्प तलाश सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ डॉ. उदयभान सिंह के अनुसार, फसल का चयन स्थानीय जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की सुविधा और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर करना चाहिए. सरसों की बुवाई के लिए सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर और गेहूं के लिए नवंबर का समय सामान्य रूप से उपयुक्त माना जाता है. वहीं, चने की बुवाई अक्टूबर से नवंबर और जौ की बुवाई अक्टूबर के अंत से नवंबर के दौरान की जा सकती है. किसानों को बुवाई से पहले मिट्टी की जांच, प्रमाणित बीजों का चयन और खेत की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए. फसल विविधीकरण अपनाकर किसान खेती के विकल्प बढ़ा सकते हैं और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं.

भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर जिले में सरसों और गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसलें हैं. यहां बड़ी संख्या में किसान इन फसलों की खेती करते हैं, लेकिन इनके अलावा भी कई ऐसी फसलें हैं जिनकी खेती करके किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के अवसर तलाश सकते हैं. इनमें चना, जौ, दलहनी फसलें और विभिन्न प्रकार की सब्जियां शामिल हैं. सही फसल का चुनाव बुवाई का उचित समय और कृषि विशेषज्ञों की सलाह किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.

कृषि विशेषज्ञ डॉ. उदयभान सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि भरतपुर क्षेत्र में सरसों और गेहूं रबी सीजन की मुख्य फसलें हैं. यहां सरसों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है.इसके साथ ही किसान चना, जौ और अन्य दलहनी फसलों की खेती भी कर सकते हैं. क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार इन फसलों का उत्पादन किया जा सकता है. फसल विविधीकरण अपनाकर किसान केवल सरसों और गेहूं पर निर्भर रहने के बजाय अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं.

अंतिम सितंबर से अक्टूबर तक सरसों की बुवाई का अदर्श समय

डॉ. उदयभान सिंह ने बताया कि भरतपुर में रबी सीजन के दौरान सरसों की बुवाई के लिए सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर का समय सामान्यत उपयुक्त रहता है. गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर का महीना प्रमुख माना जाता है. वहीं चने की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच और जौ की बुवाई अक्टूबर के अंत से नवंबर के दौरान की जा सकती है. हालांकि सही समय का निर्धारण स्थानीय मौसम मिट्टी में नमी और फसल की किस्म के आधार पर करना चाहिए. इसके अलावा किसान अपने खेतों की स्थिति और उपलब्ध सिंचाई सुविधाओं के अनुसार दलहनी फसलों तथा सब्जियों की खेती भी कर सकते हैं. इससे खेती के विकल्प बढ़ सकते हैं.और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनने का अवसर मिलता है.

खेती शुरू करने से पहले इस आधर पर फसलों का करें चयन

किसानों को बुवाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी करनी चाहिए प्रमाणित बीजों का चयन मिट्टी की जांच संतुलित खाद एवं उर्वरकों का उपयोग और समय पर सिंचाई अच्छी फसल के लिए महत्वपूर्ण हैं. साथ ही फसल में रोग और कीटों की निगरानी करते रहना चाहिए कि किसान अपनी पानी की उपलब्धता और स्थानीय बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसलों का चयन करें इससे खेती की लागत और संभावित लाभ बेहतर हो सकता है. भरतपुर के किसान सरसों और गेहूं के साथ अन्य उपयुक्त फसलों को अपनाकर अपनी खेती को अधिक विविध और लाभकारी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Bharatpur,Rajasthan

First Published :

October 16, 2026, 11:18 IST

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