Rajasthan

Agriculture: खेती की मिट्टी कमजोर हो रही है? ये 7 तरीके अपनाएं, बढ़ जाएगी जमीन की उपज क्षमता

नागौर. खेती-किसान की रीढ़ मिट्टी होती है. यदि खेत की मिट्टी स्वस्थ और उपजाऊ है, तो फसलों की पैदावार भी अच्छी होती है. लेकिन वर्तमान समय में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल के साथ खेती के बदलते तौर-तरीकों के कारण मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. कई क्षेत्रों में लगातार एक ही फसल उगाने और जरूरत से ज्यादा जुताई करने से भूमि की उर्वरक क्षमता कम होती जा रही है. इसका सीधा असर फसल उत्पादन और किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है. ऐसे में किसान पारंपरिक कृषि ज्ञान के साथ वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर मिट्टी की सेहत सुधार सकते हैं.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट रामनिवास शर्मा ने बताया कि खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने के लिए सबसे पहले उसकी जांच करवाना जरूरी है. मिट्टी परीक्षण से पता चलता है कि जमीन में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कितनी मात्रा मौजूद है. साथ ही किन पोषक तत्वों की कमी है, इसकी भी जानकारी मिलती है. किसान नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या सरकारी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में मिट्टी के नमूने की जांच करवा सकते हैं. जांच रिपोर्ट के आधार पर ही खेत में खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे अनावश्यक खाद का खर्च कम होगा और फसल को जरूरत के अनुसार पोषण मिल सकेगा.

जैविक खाद से बढ़ाएं मिट्टी की ताकत

मिट्टी की सेहत सुधारने में जैविक खाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. किसान खेतों में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल करें. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और उसकी संरचना बेहतर होती है. साथ ही मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता में भी सुधार होता है. प्राकृतिक खेती करने वाले किसान बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग भी कर सकते हैं.

फसल चक्र अपनाकर बढ़ाएं उर्वरक क्षमता

लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी में कुछ खास पोषक तत्वों की कमी होने लगती है. इससे बचने के लिए किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए. धान और गेहूं जैसी फसलों के बीच मूंग, उड़द, चना, मटर और बरसीम जैसी दलहनी फसलें उगाना लाभदायक होता है. इन फसलों की जड़ों में मौजूद राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. इसके अलावा ढैंचा की बुवाई करके फूल आने से पहले उसे खेत में जोतकर मिला देने से मिट्टी में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है.

खेत में नमी बनाए रखना भी जरूरी

मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सिंचाई और जल प्रबंधन पर भी ध्यान देना चाहिए। जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने से पोषक तत्व पानी के साथ नीचे जा सकते हैं. वहीं कम पानी मिलने से फसलों की वृद्धि प्रभावित होती है. इसलिए फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार सिंचाई करें. खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था भी रखें, ताकि पानी जमा न हो.

पराली जलाने के बजाय खेत में करें उपयोग

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि किसान फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों और पराली को जलाने से बचें. इन्हें खेत में सड़ने के लिए छोड़ने या मल्चिंग के रूप में इस्तेमाल करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिलती है. इसके साथ ही बार-बार गहरी जुताई करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मिट्टी की प्राकृतिक संरचना और लाभदायक सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं.

संतुलित प्रबंधन से मिलेगा बेहतर परिणाम

मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसान नियमित मिट्टी परीक्षण, जैविक खाद का उपयोग, फसल चक्र, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और उचित सिंचाई जैसे उपाय अपनाएं. इन तरीकों से जमीन की उपजाऊ क्षमता लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी. स्वस्थ मिट्टी से फसलों की अच्छी पैदावार होगी और खेती की लागत कम करने में भी सहायता मिलेगी.

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