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Alwar News | Delivery in 108 Ambulance

Last Updated:September 12, 2026, 11:55 IST

Alwar News: अलवर के प्रतापगढ़ सीएचसी की लचर व्यवस्था के कारण जयपुर रेफर की गई दो गर्भवती महिलाओं को रास्ते में ही 108 एंबुलेंस में प्रसव करना पड़ा. पडाकछापली की उषा ने अपनी सातवीं संतान बेटी को और गुवाडा गुगली की धौली देवी ने अपने सातवें बच्चे के रूप में बेटे को जन्म दिया. एंबुलेंस कर्मियों की सूझबूझ से सुरक्षित प्रसव हो सका. अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिनी बलाई ने माना है कि प्रसूति वार्ड में सुविधाओं के अभाव के कारण सामान्य डिलीवरी कराना भी मुश्किल हो रहा है.

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Alwar: एक ही CHC से रेफर हुईं 2 गर्भवती, रास्ते में एंबुलेंस बनी डिलीवरीZoomAlwar News: एंबुलेंस में गूंजी किलकारियां, CHC पर उठे सवाल

Alwar News: अलवर जिले के प्रतापगढ़ कस्बे में स्वास्थ्य विभाग की भारी लापरवाही और बदहाल चिकित्सा व्यवस्था का एक बड़ा मामला सामने आया है. यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से गंभीर हालत बताकर जयपुर रेफर की गई दो अलग-अलग गर्भवती महिलाओं ने बीच रास्ते में ही 108 एंबुलेंस के अंदर बच्चों को जन्म दे दिया. गनीमत यह रही कि एंबुलेंस में तैनात कर्मचारियों की सूझबूझ से दोनों प्रसूताओं की सुरक्षित डिलीवरी हो गई और जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं. लेकिन इन दो बड़ी घटनाओं के एक साथ सामने आने के बाद प्रतापगढ़ सीएचसी की प्रसूति व्यवस्था और बिना इलाज दिए मरीजों को सीधे रेफर करने की प्रक्रिया पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

पहला मामला प्रतापगढ़ इलाके के पडाकछापली गांव का है. यहां की रहने वाली 33 वर्षीय गर्भवती महिला उषा पत्नी रमेश को प्रसव पीड़ा होने पर प्रतापगढ़ सीएचसी लाया गया था. लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने उसकी हालत गंभीर बताकर उसे तुरंत जयपुर के गणगौरी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया. जब 108 एंबुलेंस महिला को लेकर जयपुर जा रही थी, तभी गणगौरी अस्पताल से करीब 20 किलोमीटर पहले सड़वा मोड़ के पास उषा को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी. दर्द बढ़ता देख एंबुलेंस को सड़क किनारे सुरक्षित रोका गया. इसके बाद 108 एंबुलेंस के ईएमटी अमित कुमार सैनी ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए महिला की सुरक्षित डिलीवरी करवाई. इस कार्य में एंबुलेंस पायलट मनोज कुमार शर्मा ने भी पूरा सहयोग किया. उषा ने अपनी सातवीं संतान के रूप में एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया. इससे पहले उनकी छह बेटियां हैं.

भानपुर मोड़ के पास हुआ दूसरे बच्चे का जन्मठीक इसी तरह का दूसरा मामला भी प्रतापगढ़ सीएचसी से ही जुड़ा हुआ है. यह घटना गुवाडा गुगली निवासी 30 वर्षीय गर्भवती महिला धौली देवी पत्नी गिर्राज प्रसाद योगी के साथ हुई. धौली देवी को भी प्रसव के लिए प्रतापगढ़ के सरकारी अस्पताल लाया गया था, जहां से उसे भी बिना उचित इलाज दिए आगे जयपुर के लिए रेफर कर दिया गया. जब 108 एंबुलेंस उसे लेकर जयपुर की तरफ बढ़ रही थी, तभी जयपुर से करीब 30 किलोमीटर पहले भानपुर मोड़ के पास महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई. स्थिति की नजाकत को समझते हुए स्टाफ ने एंबुलेंस को रुकवाया और गाड़ी के अंदर ही डिलीवरी करवाई. धौली देवी ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. यह उनकी भी सातवीं डिलीवरी थी. इससे पहले उनके पांच बेटियां और एक बेटा है.

स्त्री रोग विशेषज्ञ ने खुद मानी अस्पताल की कमियांइन घटनाओं के बाद जब अस्पताल की सुविधाओं की पड़ताल की गई तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. सीएचसी प्रतापगढ़ में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिनी बलाई ने खुद अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं में भारी कमी होने की बात स्वीकारी है. उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि प्रसूति वार्ड में जरूरी और पर्याप्त सुविधाएं बिल्कुल नहीं हैं. उपकरणों और संसाधनों के भारी अभाव के कारण यहां सामान्य डिलीवरी कराना भी काफी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में थोड़ी सी भी जटिलता होने पर जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए मरीजों को बड़े अस्पताल के लिए रेफर करना ही एकमात्र विकल्प बचता है. स्थानीय ग्रामीणों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि प्रतापगढ़ सीएचसी में तुरंत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं ताकि भविष्य में किसी भी गर्भवती महिला की जान जोखिम में न पड़े.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Alwar,Alwar,Rajasthan

First Published :

September 12, 2026, 11:55 IST

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