Amazon Pink Dolphin : रात में इंसान का रूप बदल लेती है ये डॉल्फिन? देखने में खिलौने जैसी, लेकिन समंदर की ‘शातिर चोर’ है

Last Updated:November 06, 2026, 23:20 IST
अमेज़न की नदियों में पाई जाने वाली गुलाबी रंग की ‘पिंक रिवर डॉल्फिन’ अपने खिलौने जैसे अनोखे रूप और लोककथाओं के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, जहां स्थानीय लोग रात में इसके इंसान का रूप धरकर महिलाओं को किडनैप करने का दावा करते हैं. एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ने पहली बार पानी के नीचे मछुआरों के जाल से मछलियां चुराते हुए इसकी दुर्लभ तस्वीरें कैमरे में कैद की हैं. हालांकि, जाल फाड़ने और मछलियां चुराने की इस आदत की वजह से मछुआरे इनसे नफरत करते हैं, लेकिन बढ़ते प्रदूषण, अवैध खनन और जलवायु परिवर्तन के कारण यह दुर्लभ प्रजाति अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है जिसे बचाने के लिए वैज्ञानिक नए उपकरण और तकनीक का सहारा ले रहे हैं.
इंसान बनने और किडनैप करने का खौफनाक लोककथा: अमेज़न के जंगलों और नदियों के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों के बीच पिंक रिवर डॉल्फिन को लेकर एक बहुत ही अजीब और लोककथा मशहूर है. वहां के लोग मानते हैं कि ये पिंक डॉल्फिन रात होते ही एक गोरे-चिट्टे खूबसूरत इंसान का रूप धारण कर लेती हैं और गांव में जाकर महिलाओं को बहला-फुसलाकर किडनैप कर लेती हैं. (रॉयटर्स)
खिलौने जैसी दिखने वाली दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की डॉल्फिन: दिखने में गुलाबी रंग, तरबूज जैसा उभरा हुआ सिर और 100 दांतों वाली लंबी चोंच के कारण ये डॉल्फिन किसी प्लास्टिक के खिलौने जैसी लगती है. लेकिन हकीकत ये है कि ये दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की डॉल्फिन है, जिसकी लंबाई 8 फीट से ज्यादा और वजन 200 किग्रा तक होता है. (रॉयटर्स)
मछुआरों के जाल से मछली चुराने की ‘शातिर कला’: हाल ही में नेशनल ज्योग्राफिक के वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर थॉमस पेशाक ने पहली बार पानी के अंदर इस डॉल्फिन की ‘चोरी’ को कैमरे में कैद किया है. ये डॉल्फिन इतनी चालाक होती हैं कि नाव की आवाज सुनते ही समझ जाती हैं कि शिकार तैयार है. ये मछुआरों के जाल में सुराख करके अंदर से मछलियां चुरा लेती हैं, इसीलिए इन्हें ‘शातिर चोर’ कहा जा रहा है. (रॉयटर्स)
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माथे के ‘तरबूज’ से बनाती हैं पानी के अंदर का नक्शा: अमेज़न की नदियों का पानी बेहद गंदला और मटमैला होता है, जहां आंखों से देखना मुमकिन नहीं होता. ऐसे में डॉल्फिन के माथे पर बना उभरा हुआ हिस्सा, जिसे मेलन कहा जाता है, एक साउंड एम्प्लीफायर की तरह काम करता है. ये इकोलोकेशन की मदद से पानी के अंदर का पूरा दिमागी नक्शा तैयार कर लेती हैं. (रॉयटर्स)
बदले की आग और मछुआरों का गुस्सा: जाल फाड़ने और मछलियां चुराने की वजह से मछुआरे इनसे भारी नफरत करते हैं. कई इलाकों में मछुआरे अपनी नाव के पंखों और बंदूकों से इन पर हमला कर देते हैं, जिससे हर साल दर्जनों डॉल्फिन दम तोड़ देती हैं. (रॉयटर्स)
जंगल की आग, पारा और माइक्रोप्लास्टिक का जानलेवा खतरा: अमेज़न के जंगलों में लगने वाली भीषण आग के धुएं से इन डॉल्फिनों को फेफड़ों की बीमारी हो रही है. इसके अलावा, सोने के अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाला पारा और प्लास्टिक कचरा इनके खून में घुल रहा है, जिससे इनकी आबादी तेजी से घट रही है और ये खतरे की कैटेगरी में आ चुकी हैं. (रॉयटर्स)
बचाव के लिए लगाया गया ‘बनाना साउंड डिवाइस’: वैज्ञानिक अब इन डॉल्फिनों को बचाने के लिए मछुआरों को साथ लेकर काम कर रहे हैं. मछलियों के जाल में ‘पिंगर्स’ नाम का केले के आकार का एक छोटा सा डिवाइस लगाया जा रहा है, जो ऐसी आवाज निकालता है जिससे डॉल्फिन जाल से दूर रहती हैं. इससे मछुआरों का नुकसान भी रुका है और डॉल्फिन की जान भी बच रही है. (रॉयटर्स)
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November 06, 2026, 23:20 IST



