Animal Eye Disease: बारिश के बाद पशुओं की आंखों में बढ़ा खतरा, ऐसे पहचानें कीमोसिस के लक्षण

नागौर. बारिश का मौसम खत्म होने के बाद पशुओं में आंखों से जुड़ी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. गाय-भैंस में इन दिनों बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण, परजीवी, धूल-मिट्टी और एलर्जी के कारण आंखों में सूजन की समस्या देखने को मिलती है. इन्हीं में से एक समस्या कीमोसिस है. पशु चिकित्सक विनोद चौधरी ने बताया कि इसमें आंख की बाहरी झिल्ली यानी कंजंक्टिवा में जरूरत से ज्यादा सूजन आ जाती है. कई बार आंख के आसपास का हिस्सा इतना फूल जाता है कि यह छाले या जेली जैसी संरचना के रूप में दिखाई देने लगता है.
समय पर ध्यान नहीं देने पर इसका असर कॉर्निया पर भी पड़ सकता है और पशु की आंखों की रोशनी प्रभावित होने का खतरा रहता है. उन्होंने बताया कि कीमोसिस को सामान्य भाषा में आंख की झिल्ली में सूजन की समस्या समझा जा सकता है. कंजंक्टिवा के ऊतकों में जब अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ जमा होने लगता है तो आंख के आसपास का हिस्सा फूल जाता है. शुरुआत में आंख से पानी आना और हल्की लालिमा दिखाई दे सकती है, लेकिन संक्रमण या एलर्जी बढ़ने पर सूजन काफी स्पष्ट नजर आने लगती है.
कई कारणों से हो सकती है समस्या
पशु चिकित्सक विनोद चौधरी के अनुसार बारिश के बाद वातावरण में नमी, गंदगी, धूल और कीट-पतंगों की सक्रियता बढ़ने से पशुओं में आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए पशुपालकों को आंखों में होने वाले छोटे बदलाव को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पशुओं में कीमोसिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं. संक्रामक बोवाइन राइनोट्रेकाइटिस जैसे वायरल संक्रमण में भी आंखों में सूजन की समस्या सामने आ सकती है. इसके अलावा चरते समय तिनके या घास की नोक आंख में लगने से चोट हो सकती है. धूल-मिट्टी, परागकण, धुआं और कुछ रासायनिक कीटनाशक भी आंखों में एलर्जी और जलन पैदा कर सकते हैं.
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
परजीवी भी आंखों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं. थेलेजिया नामक गोलकृमि पलकों के नीचे, कंजंक्टिवा और आंसू नली के आसपास पाए जा सकते हैं. इनकी मौजूदगी से लगातार रगड़ और जलन होती है. इससे कंजंक्टिवा में सूजन के साथ कॉर्निया पर घाव या अल्सर बनने की आशंका रहती है. कीमोसिस होने पर पशु की आंख की पलक के अंदर और पुतली के आसपास का सफेद हिस्सा जेली जैसा या फूला हुआ दिखाई दे सकता है. आंख से लगातार पानी आना, पीला स्राव निकलना, लालिमा और सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं. संक्रमण ज्यादा होने पर पशु को बुखार भी आ सकता है.
इलाज में इन बातों का रखें ध्यान
यदि आंख में परजीवी मौजूद हैं तो कभी-कभी छोटे कीड़े साफ दिखाई दे सकते हैं. तेज रोशनी में पशु आंखें बंद करने की कोशिश करता है. दर्द और जलन के कारण वह बार-बार आंखें मिचमिचाता है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार के बजाय पशु चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है. कीमोसिस के उपचार का मुख्य उद्देश्य आंख की सूजन कम करना, संक्रमण या परजीवी को नियंत्रित करना और कॉर्निया को सुरक्षित रखना है. आंख को सामान्य सेलाइन या पशु चिकित्सक की सलाह से उपयुक्त ऑप्थाल्मिक इरिगेशन सॉल्यूशन से साफ किया जा सकता है. यदि कॉर्निया पर अल्सर बन गया है तो बिना पशु चिकित्सक की सलाह के कॉर्टिकोस्टेरॉइड वाली आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में गलत दवा आंख को नुकसान पहुंचा सकती है. आंख की सफाई के लिए हल्के बोरिक एसिड सॉल्यूशन का इस्तेमाल भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.
बाड़े की सफाई पर भी दें ध्यान
पशु चिकित्सक डॉ. विनोद चौधरी के अनुसार पशुपालकों को पशु बाड़े में धूल, गंदगी और एलर्जी पैदा करने वाले कारणों को कम करना चाहिए. बाड़े के आसपास नियमित साफ-सफाई रखें और मक्खियों की संख्या नियंत्रित करें. प्रभावित पशु को धूल और तेज धूप से बचाना चाहिए. पशु के आहार में विटामिन-ए युक्त खनिज मिश्रण देना भी लाभदायक हो सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि आंख में सूजन, लगातार पानी या पीला स्राव, तेज दर्द अथवा कॉर्निया पर सफेद धब्बा दिखाई दे तो इलाज में देरी न करें.



