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इतिहास की धूल हटते ही चमका गौरव! महलाका बाई चंदा का मकबरा फिर बना हैदराबाद की शान, पर्यटकों की बढ़ी भीड़

Last Updated:April 19, 2026, 18:45 IST

Hyderabad Hindi News: हैदराबाद की प्रसिद्ध शख्सियत महलाका बाई चंदा का ऐतिहासिक मकबरा एक बार फिर चर्चा में है. वर्षों तक गुमनामी में रहने के बाद अब इस धरोहर को नई पहचान मिल रही है. निजाम काल की यह विरासत न केवल स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि महलाका बाई की सांस्कृतिक और साहित्यिक योगदान की याद भी दिलाती है. हाल ही में इसके संरक्षण और सौंदर्यीकरण के प्रयासों से मकबरा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. यह स्थान अब हैदराबाद के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में अपनी जगह बना रहा है.

हैदराबाद की मौला अली पहाड़ी के पास स्थित महलाका बाई चंदा का मकबरा महज एक स्मारक नहीं बल्कि 18वीं सदी की उस असाधारण महिला की कहानी है, जिसने अपने दौर की रूढ़ियों को तोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई थी. एक कवयित्री, घुड़सवार और निजाम की चहेती सलाहकार रही महलाका बाई का यह मकबरा आज हैदराबाद की सांस्कृतिक धरोहर का मूक गवाह बना हुआ है.

यह स्मारक परिसर 1792 में महलाका बाई ने अपनी मां राज कुंवर बाई की स्मृति में बनवाया था. वास्तुकला की दृष्टि से यह मकबरा मुगल और राजस्थानी शैली का अद्भुत मिश्रण है. इसकी नक्काशीदार दीवारों और मेहराबों में उस दौर की बारीकी झलकती है. मकबरे के चारों ओर एक विशाल बगीचा है जो कभी मुशायरों और महफिलों का केंद्र हुआ करता था.

इस मकबरे की सबसे खास बात यह है कि यह केवल महलाका बाई का नहीं बल्कि उनकी मां का भी अंतिम विश्राम स्थल है. 1824 में अपने निधन के बाद, महलाका बाई को उनकी इच्छा के अनुसार उनकी मां के बगल में ही दफनाया गया. यह मज़ार उनके अटूट प्रेम और सम्मान का प्रतीक है.

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बीते दशकों में देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर खंडहर में तब्दील होने लगी थी. समय की मार ने इसकी नक्काशी को धूमिल कर दिया था. हालांकि, 2010 में अमेरिकी सरकार के एम्बेसडर फंड फॉर कल्चरल प्रिजर्वेशन के माध्यम से इसे एक नई जीवनरेखा मिली. विशेषज्ञों की टीम ने इसकी मूल भव्यता को लौटाने के लिए बारीकी से काम किया.

यह स्थान केवल एक कब्रगाह नहीं, बल्कि एक आशूरखाना और मस्जिद का केंद्र भी है. यहाँ की वास्तुकला यह बताती है कि उस समय हैदराबाद में कला, संस्कृति और धर्म का कितना अनूठा संगम था. इतिहासकारों का मानना है कि यह स्थल महिलाओं की उस आत्मनिर्भरता को दर्शाता है जो उस युग में शायद ही कहीं और देखने को मिलती थी.

आज यह स्थान उन लोगों के लिए एक छिपा हुआ खजाना है, जो हैदराबाद के इतिहास को गहराई से जानना चाहते हैं. मौला अली पहाड़ी की तलहटी में स्थित होने के कारण, यहां का शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है. यह उन चुनिंदा स्थलों में है जहाँ आप इतिहास को करीब से महसूस कर सकते हैं बिना शहर की भीड़-भाड़ के.

महलाका बाई चंदा का मकबरा हमें यह याद दिलाता है कि इतिहास को सहेजना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी साझा संस्कृति को बचाने की मुहिम है. एक ऐसी महिला की यादें, जिसने अपनी कलम और साहस से अपना नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखवाया आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.

First Published :

April 19, 2026, 18:45 IST

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