Bhilwara White Cobra Rescue | भीलवाड़ा के घर में मिला दुर्लभ सफेद कोबरा

Last Updated:September 13, 2026, 09:07 IST
White Cobra Rescue In Bhilwara: भीलवाड़ा के सांगानेर स्थित रावला चौक में एक घर के सोफे के नीचे दुर्लभ सफेद कोबरा मिलने से दहशत फैल गई. वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के कुलदीप सिंह राणावत ने इसका सुरक्षित रेस्क्यू किया. आनुवंशिक बदलाव और मेलेनिन की कमी से इसका रंग सफेद था, पर काली आंखों के कारण यह पूर्ण एल्बिनो नहीं है. रेस्क्यू टीम ने इसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया. टीम ने लोगों से वन्यजीवों को न मारने और दिखने पर वन विभाग को सूचना देने की अपील की है.
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White Cobra Surprise: भीलवाड़ा के घर में सोफे के नीचे मिला ऐसा कोबरा, देखकर रेस्क्यू टीम भी चौंकी
Bhilwara: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के सांगानेर गांव में उस वक्त भारी अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया, जब एक रिहायशी मकान के अंदर अचानक सांप घुसने की खबर सामने आई. आमतौर पर घरों में सांप निकलने की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन यह मामला बेहद अलग और चौंकाने वाला था. जैसे ही घर के सदस्यों को सांप की भनक लगी, उन्होंने तुरंत वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम बिना कोई समय गंवाए मौके पर पहुंच गई. जब कमरे के अंदर सोफे के नीचे छिपे इस जहरीले मेहमान को बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें फटी की फटी रह गईं. इसका सबसे बड़ा कारण उस सांप का रंग था. यह कोई सामान्य काले या भूरे रंग का कोबरा नहीं था, बल्कि यह एक बेहद दुर्लभ और आकर्षक सफेद रंग का कोबरा का बच्चा था.
यह पूरी घटना सांगानेर गांव के रावला चौक इलाके की है. घर में सांप के होने की सूचना से पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया था. वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की तरफ से वन्यजीव विशेषज्ञ कुलदीप सिंह राणावत अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे. उन्होंने बहुत ही सावधानी और पेशेवर तरीके से कमरे में तलाश शुरू की. कुछ ही देर की मशक्कत के बाद सांप सोफे के नीचे कुंडली मारे बैठा हुआ मिल गया. जैसे ही रेस्क्यू टीम की नजर उस सांप पर पड़ी, उसका चमकदार सफेद रंग देखकर वे भी एक पल के लिए चौंक गए. टीम ने पूरी एहतियात बरतते हुए स्नैक कैचर की मदद से उस दुर्लभ सफेद कोबरा को काबू में लिया और उसे सुरक्षित डिब्बे में बंद कर दिया.
क्या है सफेद कोबरा का वैज्ञानिक रहस्य?इस खास सांप के बारे में जानकारी देते हुए वन्यजीव विशेषज्ञ कुलदीप सिंह राणावत ने बताया कि आमतौर पर भारतीय कोबरा गहरे काले, भूरे या गेहूंए रंग के होते हैं. लेकिन आनुवंशिक बदलाव (Genetic Mutation) के चलते कुछ सांपों में एक विशेष प्रकार का पिगमेंट जिसे ‘मेलेनिन’ कहा जाता है, उसका निर्माण बहुत कम होता है या बिल्कुल नहीं होता. इसी मेलेनिन की कमी के कारण सांप की त्वचा का रंग सफेद या बेहद हल्का पीला दिखाई दे सकता है. राणावत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सांप पूरी तरह से एल्बिनो (Albino) श्रेणी का नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है कि इस सफेद कोबरा की आंखें सामान्य रूप से काली हैं. जीव विज्ञान के अनुसार, पूर्ण एल्बिनिज्म (Albinism) होने पर जीवों की आंखों का रंग आमतौर पर लाल या गुलाबी दिखाई देता है.
प्राकृतिक आवास में मंडराता है जान का खतरासफेद रंग का यह कोबरा देखने में जितना सुंदर और दुर्लभ लगता है, प्राकृतिक वातावरण में इसके लिए जीवन उतना ही कठिन होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य रंग वाले सांप जंगल में मिट्टी, पत्तों और चट्टानों के बीच खुद को आसानी से छिपा (Camouflage) लेते हैं, जिससे वे शिकारियों की नजरों से बचे रहते हैं. लेकिन सफेद रंग होने के कारण ऐसे सांपों के लिए जंगल में खुद को छिपाना बेहद मुश्किल हो जाता है. वे आसानी से चील, बाज और अन्य शिकारियों की नजर में आ जाते हैं. इसी वजह से प्राकृतिक रूप से इनके लंबे समय तक जीवित रहने का खतरा काफी बढ़ जाता है.
धार्मिक आस्था और रेस्क्यू टीम की विशेष अपीलभारत में सांपों को, विशेषकर कोबरा प्रजाति को, गहरी धार्मिक आस्था के साथ भी देखा जाता है. हिंदू धर्म में भगवान शिव के गले में नागराज का वास माना जाता है, इसलिए नाग को देवतुल्य मानकर पूजा जाता है. इस दुर्लभ कोबरा को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ जुट गई थी. सफल रेस्क्यू के बाद टीम ने इस दुर्लभ सफेद कोबरा को आबादी क्षेत्र से काफी दूर एक सुरक्षित प्राकृतिक और जंगली स्थान पर आजाद कर दिया. वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने आम जनता से एक खास अपील भी की है. उन्होंने कहा कि आबादी वाले क्षेत्रों या घरों में सांप या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उसे पकड़ने या मारने की कोशिश करें. वन्यजीव हमारे पर्यावरण का अहम हिस्सा हैं. ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग या प्रशिक्षित वन्यजीव रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि इंसान और वन्यजीव दोनों को सुरक्षित रखा जा सके.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
September 13, 2026, 09:07 IST



