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भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद पुलिस पर उठे बड़े सवाल, मनोवैज्ञानिक आर शंकर दी इलाज की सलाह

Last Updated:June 25, 2026, 23:52 IST

हाल ही में पुलिसकर्मी पर एक युवक की हत्या के आरोप वाले वायरल वीडियो के बाद पुलिस के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं. क्या लगातार तनाव, नींद की कमी, छुट्टियों का अभाव और बढ़ता कार्यभार पुलिसकर्मियों के फैसलों को प्रभावित करता है? दुनिया के चर्चित मनोवैज्ञानिक इंजीनियर आर शंकर ने लोकल 18 के पर अपनी राय दी है.

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बेगूसराय: बिहार में भरत तिवारी नाम के युवक के एनकाउंटर पर तमाम तरह के सवाल खड़े हो गए. कुछ लोग जहां एनकाउंटर के जरिए किए जाने वाले न्याय के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं वहीं लोग इस मुद्दे को सामाजिक और राजनैतिक ऐंगल से भी देख रहे हैं. युवक की मौत के मामले में पुलिसकर्मी की भूमिका को लेकर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे सोशल साइट्स पर सबसे ज्यादा पुलिस कर्मियों के दुर्व्यवहार के वीडियो देखने को मिलते हैं. कई वीडियो तो ऐसे भी होते हैं जो लोगों को विचलित भी कर सकते हैं. एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आने के बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर ऐसी पुलिस व्यवस्था, ऐसे सिस्टम और पुलिसकर्मियों का क्या ईलाज है? इस बारे में दुनिया के चर्चित मनोवैज्ञानिक इंजीनियर आर शंकर ने कुछ जरूरी बातें कही है. आर शंकर ने 150 देशों में मनोविज्ञान पर व्याखान दिया और इस क्षेत्र में तमाम काम किया है. उन्होंने मनोविज्ञान विषय पर किताब भी लिखा है.

आज की सदी में सबसे ज्यादा दबाव में पुलिसबेगूसराय के चर्चित मनोवैज्ञानिक इंजीनियर आर शंकर ने लोकल 18 पर बताया आज 21वीं सदी में पुलिस सबसे अधिक दबाव में काम करने वाले विभागों में से एक है. समाज में जहां भी कोई समस्या होती है, वहां सबसे पहले पुलिस को ही भेजा जाता है. पुलिसकर्मी भी सामान्य इंसान हैं. उनका परिवार होता है, बच्चे होते हैं और उनका अपना सामाजिक जीवन भी होता है. लेकिन लगातार तनाव के कारण कई बार व्यक्ति क्षण भर में ऐसा निर्णय ले बैठता है, जिसका उसे बाद में पछतावा होता है.

उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को समय पर छुट्टी नहीं मिल पाती. परिवार के साथ पर्याप्त समय नहीं बिताने और पारिवारिक जुड़ाव कम होने से उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा लगातार ड्यूटी के कारण उन्हें पर्याप्त नींद भी नहीं मिलती. उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ठीक से नींद नहीं लेता है तो अगले दिन उसके मस्तिष्क की कार्यक्षमता काफी प्रभावित हो जाती है. ऐसी स्थिति में याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और व्यवहार पर असर पड़ सकता है.

पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य की नियमित जांचलोकल 18 पर उन्होंने आगे बताया सबसे पहले यह जरूरी है कि पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य की नियमित जांच हो. उनका कहना है कि मस्तिष्क प्रकृति की सबसे जटिल और उन्नत रचना है लेकिन, अभी तक इसे पूरी तरह समझा नहीं जा सका है. इसी कारण कई पुलिसकर्मी तनाव, फ्रस्ट्रेशन और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करते हैं. उन्होंने फ्रस्ट्रेशन और डिप्रेशन को अलग-अलग स्थिति बताते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति की अपेक्षाओं और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर होता है तो उसमें फ्रस्ट्रेशन पैदा हो सकता है. वहीं डिप्रेशन की स्थिति में व्यक्ति उदास रहने लगता है, उसे नींद और भूख प्रभावित होती है तथा सही निर्णय लेने और सामान्य व्यवहार करने में कठिनाई हो सकती है.

पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग की हो व्यवस्थालोकल 18 पर इंजीनियर आर शंकर ने बताया ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग की जानी चाहिए. उनके अनुसार पुलिस व्यवस्था में तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि केवल योग या दौड़ लगाने को ही स्ट्रेस मैनेजमेंट नहीं माना जा सकता. इसके लिए यह समझना जरूरी है कि तनाव क्या है, मस्तिष्क में उसका प्रभाव कैसे पड़ता है और प्रत्येक व्यक्ति के अनुसार उसका समाधान कैसे किया जाए.

स्ट्रेस मैनेजमेंट की व्यवस्था कर सकता है निदानउन्होंने यह भी कहा कि कई पश्चिमी देशों में मानसिक स्वास्थ्य की नियमित जांच, काउंसलिंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट की व्यवस्था मौजूद है. भारत में भी ऐसी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है. पुलिसकर्मियों को समय पर अवकाश, पर्याप्त आराम, पूरी नींद, परिवार के साथ समय और नियमित मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण मिलना चाहिए. उनका कहना है कि यदि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए तो पुलिस व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी और बेहतर बन सकती है.

About the AuthorRajneesh Singh

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