रोडवेज कर्मचारियों के लिए बड़ा नियम! हर माह 3000 किमी नहीं चले तो रुकेगा वेतन और प्रमोशन भी खतरे में

Last Updated:June 23, 2026, 18:20 IST
Rajasthan Roadways News: राजस्थान रोडवेज में कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और मैनपॉवर के बेहतर उपयोग के लिए बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया जा रहा है. नई तैयारी के तहत परिचालकों के लिए हर माह कम से कम 3,000 किलोमीटर रूट पर ड्यूटी करना अनिवार्य किया जा सकता है. वर्तमान में निर्धारित रूट पर पर्याप्त संचालन नहीं करने वाले कर्मचारियों का वेतन रोके जाने की कार्रवाई भी की जा रही है. अब इस व्यवस्था को पदोन्नति से जोड़ने की तैयारी है. प्रस्ताव के अनुसार यदि कोई परिचालक सालभर में 36,000 किलोमीटर की सेवा पूरी नहीं करता है तो उसकी पदोन्नति प्रभावित हो सकती है. रोडवेज प्रबंधन इसे मैनपॉवर यूटिलाइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है. जल्द ही इस संबंध में प्रस्ताव रोडवेज बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा.
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रोडवेज कर्मचारियों के लिए बड़ा नियम!
जयपुर. राजस्थान रोडवेज (RSRTC) के इतिहास में सालों बाद एक सुखद बदलाव देखने को मिल रहा है. लगातार घाटे से जूझने वाली रोडवेज अब न केवल मुनाफे की पटरी पर लौट आई है, बल्कि कर्मचारियों को समय पर वेतन भी मिलने लगा है. वेतन को लेकर होने वाले महीनों लंबे धरने-प्रदर्शन अब बंद हो चुके हैं. इस ऐतिहासिक सफलता और वित्तीय सुधार को बरकरार रखने के लिए रोडवेज प्रशासन अब बड़े और कड़े फैसले लेने की तैयारी में है. इसी कड़ी में अब दफ्तरों में बैठकर ‘आराम’ फरमाने वाले और सिफारिशी परिचालकों (कंडक्टरों) पर नकेल कसने की तैयारी कर ली गई है.
सालों बाद आए इस आर्थिक सुधार को बनाए रखने के लिए रोडवेज प्रबंधन ने मैनपावर (कर्मचारियों) के अधिकतम उपयोग का खाका तैयार किया है. इसके तहत अब डिपो और दफ्तरों में बैठकर डेस्क वर्क करने वाले परिचालकों को वापस रूट पर भेजा जाएगा. दरअसल, बड़ी संख्या में ऐसे परिचालक हैं जो बसों में सफर करने के बजाय बाबूगिरी या दफ्तर के अन्य कामों में लगे हुए हैं, जिससे बसों के संचालन पर बुरा असर पड़ रहा है.
हर माह 3000 किलोमीटर और सालाना 36 हजार किलोमीटरराजस्थान रोडवेज के पास वर्तमान में लगभग 3400 बसों के संचालन के लिए करीब 3600 नियमित परिचालक मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद विभाग को बस संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसकी प्रमुख वजहों में कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश, स्वास्थ्य कारणों से फील्ड ड्यूटी से दूरी और बड़ी संख्या में परिचालकों का कार्यालय कार्यों में लगाया जाना शामिल है. इस स्थिति के कारण रोडवेज को ठेके पर ‘बस सारथी’ और सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है. इसी समस्या के समाधान के लिए रोडवेज प्रशासन परिचालकों के लिए हर माह 3000 किलोमीटर और सालाना 36 हजार किलोमीटर ड्यूटी को पदोन्नति से जोड़ने की तैयारी कर रहा है. प्रस्ताव के अनुसार निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हो सकती है. यह कदम मैनपॉवर के बेहतर उपयोग और संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है.
रोडवेज कर्मचारियों के लिए सख्त नियमराजस्थान रोडवेज प्रशासन ने परिचालकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और मैनपॉवर के बेहतर उपयोग के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है. करीब छह महीने पहले लागू किए गए मासिक 3,000 किलोमीटर संचालन के नियम को अब वेतन, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक परिचालक को हर महीने कम से कम 3,000 किलोमीटर बस के साथ रूट पर ड्यूटी करनी होगी. इसके अलावा, करियर रिकॉर्ड में न्यूनतम 36,000 किलोमीटर संचालन की लॉगशीट पूरी करना भी आवश्यक होगा. रोडवेज प्रशासन का मानना है कि इससे कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और बस संचालन में आ रही स्टाफ की कमी दूर होगी. यदि कोई परिचालक निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करता है तो उसका प्रमोशन रोका जा सकता है और वेतन संबंधी लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं.
‘नीति मंजूर, लेकिन रिक्त पद भी भरे सरकार’रोडवेज प्रबंधन की इस नई कड़क पॉलिसी से परिचालक पूरी तरह असहमत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपनी व्यावहारिक परेशानियां भी सामने रखी हैं. कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि वे रूट पर चलने के लिए तैयार हैं, लेकिन विभाग में परिचालकों के खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए. रिक्त पद न भरे जाने के कारण मौजूदा स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव बनता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर असर पड़ता है.
About the AuthorJagriti Dubey
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