1971 की जीत का हीरो अब बनेगा शहीद स्मारक की शान, चावंडिया पहुंचेगा टी-55 टैंक

Last Updated:August 07, 2026, 08:44 IST
Martyr Jagdish Singh Memorial: डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना उपखंड स्थित चावंडिया गांव में शहीद जगदीश सिंह स्मारक अब भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान का नया प्रतीक बनने जा रहा है. वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाला टी-55 युद्धक टैंक यहां स्थापित किया जाएगा. रक्षा मंत्रालय ने पंचायत समिति मकराना को इस टैंक के आवंटन की मंजूरी दे दी है और यह पुणे से चावंडिया के लिए रवाना हो चुका है. खास बात यह है कि टैंक को लाने का करीब दो लाख रुपये का खर्च शहीद के छोटे भाई पृथ्वी सिंह अपनी निजी बचत से उठा रहे हैं. वहीं स्थापना के लिए प्लेटफॉर्म निर्माण के लिए विधायक निधि से चार लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं. यह टैंक युवाओं को भारतीय सेना के इतिहास, 1971 के युद्ध और सैनिकों के अदम्य साहस से रूबरू कराएगा.
डीडवाना कुचामन के मकराना उपखंड के चावंडिया में स्थित शहीद जगदीश सिंह स्मारक भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और बलिदान का प्रतीक बनने वाला है. साल 1971 के भारत-पाक युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाला टी-55 युद्धक टैंक अब इस स्मारक की पहचान बनेगा. रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय, नई दिल्ली ने पंचायत समिति मकराना के नाम इस टैंक के आवंटन की स्वीकृति जारी कर दी है. पुणे स्थित सीएएफवीडी (CAFVD) किरकी डिपो से टैंक चावंडिया के लिए रवाना हो चुका है और शनिवार सुबह इसके पहुंचने की संभावना है.
टी-55 टैंक की स्थापना के बाद नागौर जिले में यह तीसरा युद्धक टैंक होगा. इससे पहले नागौर और डीडवाना जिला सैनिक मुख्यालय में भी ऐसे युद्धक टैंक स्थापित किए जा चुके हैं. रक्षा मंत्रालय ने इस टैंक को मोटिवेशनल डिस्प्ले यानी के उद्देश्य से पंचायत समिति मकराना को आवंटित किया है. भारतीय सेना की ओर से टैंक निशुल्क उपलब्ध कराया गया है, ताकि आम नागरिक, विशेष रूप से युवा पीढ़ी, भारतीय सैनिकों के साहस और युद्ध इतिहास को करीब से जान सके.
इस टैंक को पुणे से चावंडिया तक लाने का लगभग दो लाख रुपए का परिवहन खर्च स्वयं शहीद जगदीश सिंह के परिवार द्वारा वहन किया जा रहा है. शहीद के छोटे भाई पृथ्वी सिंह ने अपनी निजी बचत से यह राशि देने का निर्णय लिया है. वहीं टैंक की स्थापना के लिए आवश्यक प्लेटफॉर्म निर्माण हेतु मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने विधायक कोष से चार लाख रुपए स्वीकृत किए हैं. इस टैंक के आने के बाद इसे संपूर्ण विधि विधान के साथ शहीद स्मारक पर स्थापित किया जाएगा.
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भारतीय सेना में कार्यरत संदीप सिंह के अनुसार टी-55 भारतीय सेना का युद्धक टैंक रहा है. वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में इस टैंक ने भारतीय सेना की विजय में अहम भूमिका निभाई थी. युद्ध के बाद भी यह कई वर्षों तक सेना की सेवा में बना रहा. यह टैंक अब सेना से सेवानिवृत्त किए जा चुके इन टैंकों को देशभर के शहीद स्मारकों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित किया जा रहा है, ताकि लोग केवल हथियार नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान की कहानी भी समझ सकें.
उन्होंने बताया उस समय तकनीकी दृष्टि से भी टी-55 अपने समय का बेहद प्रभावशाली युद्धक टैंक माना जाता था. लगभग 37 टन वजनी इस टैंक में चार सैनिक तैनात रहते हैं, जिनकी युद्ध के दौरान अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं. यह 2.7 मीटर चौड़ी खाई पार करने में सक्षम है और इसकी अधिकतम गति लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटा है. इसमें लगी 105 मिमी की मुख्य तोप करीब ढाई किलोमीटर तक सटीक निशाना साध सकती है. इसके अलावा यह टैंक परमाणु, रासायनिक और जैविक हमलों से सुरक्षा की क्षमता भी रखता है.
चावंडिया के ग्रामीणों का मानना है कि शहीद जगदीश सिंह स्मारक पर टी-55 टैंक की स्थापना केवल एक सैन्य प्रदर्शनी नहीं होगी, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा. यहां आने वाले स्टूडेंट्स, युवा और पर्यटक भारतीय सेना के इतिहास, 1971 के युद्ध की गौरवगाथा तथा सैनिकों के बलिदान के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. इससे युवाओं में राष्ट्रसेवा और सेना के प्रति सम्मान की भावना और अधिक मजबूत होगी. स्मारक क्षेत्र में देशभक्ति से जुड़े आयोजनों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा.
शहीद जगदीश सिंह के छोटे भाई पृथ्वी सिंह ने बताया कि आजादी के अमृतकाल में जब देश अपने वीर सपूतों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, तब चावंडिया में टी-55 टैंक की स्थापना उसी दिशा में एक अहम कदम साबित होगा. उन्होंने कहा कि यह टैंक केवल लोहे का युद्धक मशीन नहीं है, बल्कि सैनिकों के साहस और जज्बे का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि वे हमेशा इस टैंक के रखरखाव का ध्यान रखेंगे.
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August 07, 2026, 08:44 IST



