Bol Majisa Temple Bali Fort

Last Updated:August 20, 2026, 13:21 IST
Bol Majisa Temple Bali Fort: पाली के बाली किले में 20 फीट की ऊंचाई पर स्थित 850 साल पुराना बोल माजीसा मंदिर आस्था का केंद्र है. विक्रम संवत 1206 का यह धाम पति देवपाल रायगुर के शहीद होने पर माता वचनादेह के सती होते समय दिव्य वाणी बोलने के कारण ‘बोल माजीसा’ कहलाया. मंदिर में गुफानुमा चट्टान में माताजी और तोता-नागदेव की दुर्लभ मूर्ति स्थापित है. चैत्र शुक्ल बीज पर यहाँ विशेष पूजा और ध्वजारोहण किया जाता है.
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Pali News: राजस्थान के पाली जिले के ऐतिहासिक बाली किले में 20 फीट की ऊंचाई पर स्थित 850 साल पुराना बोल माजीसा मंदिर आस्था, अलौकिक चमत्कार और गौरवशाली इतिहास का एक अद्भुत संगम है. विक्रम संवत 1206 से जुड़ा यह पावन सिद्ध पीठ ऐतिहासिक बाली किले के निर्माण से भी प्राचीन माना जाता है. राजपुरोहित समाज की कुलदेवी के रूप में पूजनीय माता वचनादेह का यह भव्य और दिव्य स्थान अपनी अनूठी मान्यताओं, दुर्लभ वास्तुकला और प्राचीन गाथाओं के लिए पूरे मारवाड़ क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है.
माताजी के वंशज चुन्नीलाल राजपुरोहित के अनुसार, राजा-महाराजाओं के समय में माता वचनादेह के पति देवपाल रायगुर रणभूमि में वीरतापूर्वक दुश्मनों का सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे. जब माता वचनादेह अपने पति की चिता के साथ सती होने जा रही थीं, तब उस पावन स्थल पर एक अलौकिक और अद्भुत चमत्कार घटित हुआ. सती होते समय माता के मुख से स्वतः ही दिव्य वाणी यानी वचन प्रकट हुए थे. सती होते समय मुख से दिव्य बोल (वचन) निकलने के कारण ही उन्हें आगे चलकर “बोल माजीसा” के नाम से पूजा जाने लगा और वह स्थल एक महान सिद्ध पीठ के रूप में प्रतिष्ठित हो गया.
गुफानुमा चट्टान में विराजमान हैं माताजी, तोता-नागदेव की दुर्लभ प्रतिमा
इस चमत्कारिक घटना के पश्चात तत्कालीन स्थानीय राजा और राजपरिवार के सदस्यों ने मिलकर इस स्थान पर एक भव्य और सुंदर मंदिर का निर्माण करवाया था. मंदिर की सबसे बड़ी भौगोलिक और स्थापत्य खासियत यह है कि माताजी आज भी एक गुफानुमा प्राकृतिक चट्टान के अंदर विराजमान हैं, जिसके ठीक ऊपर मुख्य मंदिर की भव्य संरचना निर्मित की गई है. प्राकृतिक गुफा के साथ-साथ मंदिर परिसर के समीप ही पत्थर की एक बेहद प्राचीन व दुर्लभ मूर्ति स्थापित है, जिसके एक ओर तोता और दूसरी ओर नागदेव की आकृति स्पष्ट रूप से अंकित है.
पूजा-अर्चना, परंपराएं और चैत्र शुक्ल बीज का विशेष महत्व
वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक मंदिर की संपूर्ण देखरेख राजपुरोहित समाज और परिवार द्वारा की जाती है. मंदिर के पुजारी पंडित अवधेश महाराज (श्रीमाली) द्वारा प्रतिदिन सुबह और शाम नियम-निष्ठा के साथ माताजी की विशेष पूजा-आरती संपन्न की जाती है. हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया (बीज) तिथि को राजपुरोहित समाज और दूर-दराज से आए भारी संख्या में श्रद्धालु यहाँ एकत्र होते हैं. इस पावन अवसर पर माताजी को विशेष पोशाक अर्पित की जाती है, मंदिर के शिखर पर नई ध्वजा चढ़ाई जाती है और क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pali,Pali,Rajasthan
First Published :
August 20, 2026, 13:21 IST



