Chauth Mata Temple Bhilwara Rayla : रायला चौथ माता मंदिर

Last Updated:October 15, 2026, 08:09 IST
Chauth Mata Temple Bhilwara Rayla: भीलवाड़ा के रायला में स्थित 200 वर्ष पुराना श्री चौथ मातेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. नवरात्र पर आयोजित मेले में करीब 50 गांवों सहित जयपुर, उदयपुर और बेंगलुरु से भक्त पहुंचे. मंदिर में चौथ माता, चामुंडा माता और भैरवनाथ के दर्शन होते हैं. मेले का मुख्य आकर्षण वीर तेजा नवयुग मंडल द्वारा 16 वर्षों से चढ़ाया जाने वाला 30 फीट का विशाल ध्वज रहा. ढोल-नगाड़ों के साथ लांबिया गेट से निकली ध्वज यात्रा के बाद क्षेत्र की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की गई.
ख़बरें फटाफट
भीलवाड़ा : भीलवाड़ा जिले के रायला कस्बे में स्थित करीब 200 वर्ष प्राचीन श्री चौथ मातेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. नवरात्र के पावन अवसर पर यहां हर वर्ष विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में रायला सहित आसपास के लगभग 50 गांवों के श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए उमड़ते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि चौथ माता के दरबार में शीश नवाकर पूजा-अर्चना करने से परिवार और गांव में सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति बनी रहती है.
इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी धार्मिक विशेषता यह है कि यहां श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में तीन पवित्र स्वरूपों के दर्शन प्राप्त होते हैं. मुख्य मंदिर में श्री चौथ मातेश्वरी विराजमान हैं. इनके साथ ही चामुंडा माता और ठीक सामने भैरवनाथ जी का सिद्ध स्थान स्थित है. तीन देवों के एक साथ दर्शन होने के कारण इस स्थान का धार्मिक महत्व काफी अधिक बढ़ जाता है. नवरात्र के दौरान गांव में माता की जोत निकालने की बरसों पुरानी परंपरा भी बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है.
16 वर्षों से जारी है 30 फीट विशाल ध्वज की परंपराइस वार्षिक मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण 30 फीट ऊंचा विशाल ध्वज होता है. वीर तेजा नवयुग मंडल की ओर से पिछले 16 वर्षों से मंदिर में यह भव्य ध्वज चढ़ाने की परंपरा अटूट रूप से निभाई जा रही है. ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच लांबिया गेट से भव्य ध्वज यात्रा की शुरुआत होती है. दोपहर में ध्वज यात्रा चौथ मातेश्वरी के दरबार में पहुंचती है. इस दौरान पूरा माहौल माता के जयकारों से गूंज उठता है. मंदिर समिति और स्थानीय लोगों द्वारा पूरे क्षेत्र की खुशहाली के लिए ध्वज अर्पित किया जाता है.
दूर-दराज के राज्यों से पहुंचते हैं भक्तस्थानीय निवासी सूरज कुमार ने बताया कि यह मंदिर करीब दो शताब्दी पुराना है. यही कारण है कि केवल स्थानीय ही नहीं बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां आते हैं. इस वर्ष नवरात्र में जयपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, नाथद्वारा, कांकरोली और यहां तक कि बेंगलुरु से भी भक्त माता के दर्शन करने पहुंचे. कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करके तो कई अपने निजी साधनों से दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे. फूलों से सजे माता के दरबार और जगमगाती रोशनी ने मेले की रौनक में चार चांद लगा दिए.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
और पढ़ेंLocation :
Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
October 15, 2026, 08:09 IST



