Chopda Pujan: कंप्यूटर के दौर में भी कायम है कलम-दवात का मान, जयपुर के व्यापारी ऐसे करते हैं नए साल का आगाज

Last Updated:November 04, 2026, 19:26 IST
Chopda Pujan: जयपुर में दीपावली पर सदियों पुरानी चोपड़ा पूजन की परंपरा आज भी कायम है. कागजी बहीखातों से लेकर कंप्यूटर और डिजिटल अकाउंटिंग तक कारोबार का तरीका बदल गया, लेकिन व्यापारियों की आस्था नहीं बदली. जानिए कैसे गणेश-लक्ष्मी पूजन के साथ व्यापारी नए कारोबारी साल की शुरुआत करते हैं.चोपड़ा पूजन की सदियों पुरानी परंपरा
जयपुर. दीपावली का त्योहार जहां आम लोगों के लिए खुशियों और रोशनी का पर्व है, वहीं व्यापारिक परिवारों के लिए यह नए कारोबारी साल की शुरुआत का भी खास अवसर होता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में दीपावली पर सदियों पुरानी चोपड़ा पूजन यानी बहीखाता पूजन की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। व्यापारी भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर नए बहीखातों का शुभारंभ कर रहे हैं। खास बात यह है कि समय के साथ कारोबार का तरीका भले ही बदल गया हो, लेकिन व्यापारियों की आस्था और परंपरा आज भी वैसी ही बनी हुई है।
जयपुर के पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दीपावली के अवसर पर चोपड़ा पूजन को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में पूजा की थाली, कलम-दवात और नए बहीखातों के साथ विधि-विधान से पूजा कर रहे हैं। इस दौरान भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का पूजन कर परिवार और कारोबार की सुख-समृद्धि की कामना की जा रही है। व्यापारी नए कारोबारी साल की शुरुआत शुभ मुहूर्त में करना चाहते हैं, ताकि पूरे साल व्यापार में बरकत और तरक्की बनी रहे।
केसर से स्वास्तिक बनाकर करते हैं नए खातों की शुरुआत
चोपड़ा पूजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि व्यापारिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। मान्यता के अनुसार व्यापारी पुराने साल का हिसाब-किताब पूरा करने के बाद नए बहीखातों की शुरुआत करते हैं। इसके लिए नए खाते पर केसर या कुमकुम से स्वास्तिक बनाया जाता है और शुभ-लाभ लिखा जाता है। इसके बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा कर नए कारोबारी साल का शुभारंभ किया जाता है। पहले व्यापारी जनरल, लेजर और अन्य लेखा पुस्तकों का पूजन करते थे। यह परंपरा पीढ़ियों से व्यापारिक परिवारों में चली आ रही है।
अब कंप्यूटर और लैपटॉप का भी होता है पूजन
बदलते दौर में कारोबार करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां व्यापारी लाल कपड़े में लिपटे बहीखातों में हाथ से पूरा हिसाब-किताब लिखते थे, वहीं अब कंप्यूटर, लैपटॉप और डिजिटल अकाउंटिंग का इस्तेमाल बढ़ गया है। इसके बावजूद चोपड़ा पूजन की परंपरा में कोई कमी नहीं आई है। अब व्यापारी अपने डिजिटल कारोबार और हिसाब-किताब से जुड़े उपकरणों का भी पूजन करते हैं। आधुनिक तकनीक को अपनाने के साथ धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को भी पूरी श्रद्धा से निभाया जा रहा है।
बुजुर्गों से नई पीढ़ी तक पहुंच रही परंपरा
जयपुर के पुराने व्यापारिक परिवारों में चोपड़ा पूजन को लेकर एक अलग ही भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिलता है। परिवार के बुजुर्गों के साथ युवा पीढ़ी भी इस पूजा में शामिल होती है। इससे नई पीढ़ी को अपनी व्यापारिक विरासत, संस्कारों और परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। कागजी बहीखातों से डिजिटल अकाउंटिंग तक सफर तय करने के बावजूद जयपुर के व्यापारी चोपड़ा पूजन के जरिए अपनी पुरानी परंपरा को संजोए हुए हैं। यही वजह है कि आधुनिकता के दौर में भी यह परंपरा व्यापारिक संस्कृति की पहचान बनी हुई है।
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 04, 2026, 19:26 IST



