Health

COVISHIELD लगवा चुके लोगों पर अश्वगंधा की स्टडी, 1,200 लोगों में 24 हफ्ते बाद लिवर-किडनी पर क्या असर हुआ?

अश्वगंधा का इस्तेमाल आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है, लेकिन लंबे समय तक इसके सेवन की सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिक आंकड़ों पर अक्सर चर्चा होती रही है. अब Frontiers in Medicine में प्रकाशित एक नई क्लिनिकल स्टडी में मानकीकृत अश्वगंधा रूट एक्सट्रैक्ट के 24 हफ्तों तक इस्तेमाल की सुरक्षा और शरीर द्वारा इसे सहन करने की क्षमता का अध्ययन किया गया है. यह रिसर्च 20 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुई.

इस मल्टीसेंटर, रैंडमाइज्ड और प्लेसीबो-कंट्रोल्ड ट्रायल में 18 से 70 साल की उम्र के 1,200 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया. सभी प्रतिभागियों को COVISHIELD वैक्सीन की पहली, दूसरी या बूस्टर डोज मिल चुकी थी. रिसर्च भारत के सात केंद्रों पर की गई और प्रतिभागियों की 28 हफ्तों तक निगरानी की गई. इनमें शुरुआती 24 हफ्तों तक अश्वगंधा या प्लेसीबो दिया गया और इसके बाद चार हफ्तों तक फॉलो-अप किया गया.

स्टडी में प्रतिभागियों को दो मुख्य समूहों में बांटा गया. एक समूह को रोजाना 500 mg मानकीकृत जलीय अश्वगंधा रूट एक्सट्रैक्ट दिया गया, जबकि दूसरे को उसी तरह दिखने वाला प्लेसीबो दिया गया. 1,200 प्रतिभागियों में से 1,032 यानी करीब 86% ने पूरी स्टडी पूरी की.

लिवर और किडनी की जांच में क्या मिला?

रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों के कई स्वास्थ्य मानकों की नियमित जांच की गई. इसमें ब्लड टेस्ट के जरिए लिवर और किडनी की कार्यक्षमता से जुड़े पैरामीटर भी देखे गए. स्टडी के मुताबिक, हेमेटोलॉजी, ब्लड शुगर, लिवर फंक्शन, किडनी फंक्शन और लिपिड से जुड़े जांच परिणाम निर्धारित रेफरेंस रेंज में रहे. यानी 24 हफ्तों तक अध्ययन में इस्तेमाल किए गए मानकीकृत अश्वगंधा एक्सट्रैक्ट को लेने वाले स्वस्थ प्रतिभागियों में लिवर या किडनी की कार्यक्षमता में ऐसा बदलाव नहीं देखा गया जिसे शोधकर्ताओं ने दवा से जुड़ा नुकसान माना हो.

क्या कोई साइड इफेक्ट भी सामने आया?

स्टडी में अश्वगंधा लेने वाले कुछ प्रतिभागियों में हल्के से मध्यम adverse events दर्ज किए गए. इनमें वजन में बदलाव, मुंह में छाले, पेट से जुड़ी परेशानी, ज्यादा नींद आना और चक्कर जैसा महसूस होना शामिल था. शोधकर्ताओं के अनुसार, ये घटनाएं गंभीर नहीं थीं और कुल मिलाकर अश्वगंधा तथा प्लेसीबो समूहों की tolerability प्रोफाइल तुलनीय रही. स्टडी में आठ गंभीर adverse events भी रिपोर्ट हुए, लेकिन शोधकर्ताओं ने इनमें से किसी को अध्ययन में दी गई अश्वगंधा से संबंधित नहीं माना. किसी प्रतिभागी की मौत भी नहीं हुई.

क्या अश्वगंधा ने वैक्सीन की इम्युनिटी बढ़ाई?

रिसर्च में यह भी देखा गया कि अश्वगंधा का COVISHIELD वैक्सीन के बाद बनने वाली इम्यून प्रतिक्रिया पर कोई अतिरिक्त प्रभाव पड़ता है या नहीं. दोनों समूहों में वायरस को निष्क्रिय करने वाली एंटीबॉडी प्रतिक्रिया का स्तर ऊंचा रहा और neutralizing activity 85% से अधिक थी.

हालांकि, अश्वगंधा लेने से वैक्सीन के बाद बनने वाली इम्युनिटी में कोई स्पष्ट और statistically significant अतिरिक्त फायदा साबित नहीं हुआ. शोधकर्ताओं ने इसके लिए अध्ययन में पहले से मौजूद मजबूत वैक्सीन इम्यून रिस्पॉन्स और कई प्रतिभागियों में पुराने SARS-CoV-2 संक्रमण के संकेतों को संभावित कारणों में शामिल किया.

स्टडी की सबसे बड़ी बात क्या है?

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन स्वस्थ और मुख्य रूप से युवा वयस्कों में 500 mg मानकीकृत अश्वगंधा रूट एक्सट्रैक्ट के 24 हफ्तों के इस्तेमाल की safety और tolerability को लेकर उपयोगी डेटा देता है. लेकिन इसके नतीजों को हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता.

स्टडी में इस्तेमाल किया गया खास standardized aqueous root extract, उसकी निर्धारित मात्रा और अध्ययन में शामिल स्वस्थ लोगों की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है. बुजुर्गों, दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों या अलग-अलग अश्वगंधा उत्पादों का इस्तेमाल करने वालों में परिणाम अलग हो सकते हैं. इसलिए इस रिसर्च को अश्वगंधा के हर रूप और हर व्यक्ति के लिए लंबे समय तक सेवन की सुरक्षा का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता.

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