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दूसरी जगह से आ रहे हैं डेंगू के वायरस, DNA विश्लेषण में मिला नया ठिकाना, कितना खतरनाक है ये स्ट्रैन

Last Updated:August 17, 2026, 18:11 IST

Dengue Virus: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक खोज में पाया गया है कि जब किसी को डेंगू की बीमारी होती है तो उसके वायरस वहां का स्थानीय नहीं होता बल्कि वे किसी दूसरे राज्य या यहां तक दूसरे देश से आए हुए होते हैं. डेंगू के वायरस जब स्थानीय न होकर दूसरी जगहों के हो तो क्या यह ज्यादा खतरनाक होता है. इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने सी के बिड़ला अस्पताल, गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसीन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. तुषाल से बात की. आइए इसके बारे में जानते हैं.दूसरी जगह से आ रहे हैं डेंगू के वायरस, DNA विश्लेषण में मिला नया ठिकाना Zoomबाहर से कैसे पहुंच रहे हैं डेंगू वायरस.

Dengue Virus: डेंगू बेहद खतरनाक बीमारी है. हर साल इससे हजारों की जान जाती है. जब भी कहीं डेंगू का प्रकोप होता है तो स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई का अभियान चलाया जाता है लेकिन एक नई जीनोमिक सीक्वेंसिंग या वायरल फाइपोजेनेटिक्स स्टडी में कहा गया है कि लोगों को जो डेंगू होती है उसका स्ट्रेन स्थानीय न होकर बाहरी होते हैं. यानी उनके शरीर में लगा डेंगू के वायरस कहीं दूर से आ रहे हैं. शोधकर्ताओं ने जब अलग-अलग इलाकों के मरीजों के सैंपल का जीनोम मैपिंग किया, तो पाया कि कई शहरों में फैला डेंगू का वायरस वहां का मूल स्थानीय वायरस नहीं था. इसके बजाय वह देश के अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से यात्रा करने वाले लोगों के माध्यम से उस इलाके में पहुंचा था. अब सवाल यह है कि क्या ये वाले डेंगू के वायरस ज्यादा खतरनाक होते हैं. इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने सी के बिड़ला अस्पताल, गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसीन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल से बात की.

दूसरी जगह वाला वायरस कितना गंभीर

डॉ. तुषार तायल ने बताया कि डेंगू के 4 सेरोटाइप होते हैं. DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 हैं. इसलिए पूरी जिंदगी में आपको डेंगू के चार बार इंफेक्शन हो सकते हैं. जिस सेरेटाइप वाला मच्छर एक बार काट लिया तो उसी वक्त आपको इंफेक्शन होगा. इसके बाद उस सेरोटाइप वाले वायरस से कभी डेंगू नहीं होगा. भले ही वह बाहर से आया हुआ वायरस ही क्यों न हो. जिस सेरोटाइप के वायरस से आपको पहले इंफेक्शन हो चुका है वो वाला दोबारा तो नहीं होगा लेकिन अगर बाहर से कोई दूसरा सेरोटाइप वाला वायरस मच्छर में है तो उससे हो सकता है. आईसीएमआर की रिपोर्ट्स के अनुसार अब भारत के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चारों सीरोटाइप एक साथ फैल रहे हैं. जब बाहर से आया कोई नया स्ट्रेन पहले से मौजूद स्ट्रेन से मिलता है तो लोगों में सेकेंडरी इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है जो अधिक गंभीर रूप ले लेता है. डॉ. तुषार तायल बताते हैं कि डेंगू का इंफेक्शन एक चक्र में होता है. यानी एक बार अगर हल्का हुआ तो दूसरी बार गंभीर हो सकता है. इसलिए यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को इससे पहले कितनी बार डेंगू का इंफेक्शन हुआ है और किस श्रेणी में हुआ है. जहां तक तक दूसरी जगह से आया हुआ स्ट्रैन है तो जाहिर है ये थोड़ा गंभीर होगा ही.

दूसरी जगह से कैसे आता है वायरस

डॉ. तुषार तायल बताते हैं कि डेंगू का वायरस खुद उड़कर नहीं आ सकता. इसे फैलाने वाले एडीज मच्छर अपने जीवनकाल में केवल 100 से 400 मीटर के दायरे में ही उड़ते हैं. यह एक इलाके से दूसरे इलाके में इंसानों और आवागमन के जरिए पहुंचता है. जैसे बिहार का कोई व्यक्ति तमिलनाडु गया. वहां उसे एडीज मच्छर ने काट लिया. यहां के एडीज मच्छर में डेंगू के जो वायरस है अगर वह व्यक्ति पहले से संक्रमित नहीं है तो इस मच्छर के काटने से वह उसके शरीर में घुस जाएगा. अब जब वह दोबारा बिहार आएगा तो कोई अन्य एडीज मच्छर उसे काट लेगा. इससे एडीज मच्छर इस नए स्ट्रेन वाले डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाएगा. अब यदि यही मच्छर वहां पर किसी दूसरे व्यक्ति को काट ले तो उसे यह नया स्ट्रेन वाला डेंगू हो जाएगा जो पहले के मुकाबले थोड़ा गंभीर होगा. इसके साथ ही ट्रकों, ट्रेनों और उड़ानों के जरिए संक्रमित मच्छरों या उनके अंडों का एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचने पर भी नया स्ट्रेन वहां पहुंच सकता है.

यह वायरस ज्यादा खतरनाक क्यों

मान लीजिए आपको पहले से डेंगू के सेरोटाइप DENV-1 का इंफेक्शन अपने इलाके में पहले से हो चुका है, तो आपका शरीर उसके खिलाफ लाइफलोंग इम्यूनिटी बना लेता है. लेकिन जब किसी दूसरे राज्य से आया नया स्ट्रेन जैसे DENV-2 आपके शरीर में प्रवेश करता है, तो पुरानी एंटीबॉडीज नए वायरस को मारने के बजाय उसे कोशिकाओं में तेजी से घुसने में मदद करती हैं. इसे सेकेंडरी इंफेक्शन कहते हैं. इससे डेंगू हेमोरेजिक फीवर, प्लेटलेट्स का तेजी से गिरना और इंटरनल ब्लीडिंग जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती है. वहीं वायरस जब नए वातावरण और नई आबादी में यात्रा करता है, तो उसमें जीनेटिक बदलाव अधिक होते हैं. कई बार बाहर से आई नई लिनिएज हमारे इम्यून सिस्टम को चकमा देने में अधिक सक्षम होती हैं. यही कारण है कि ये वाला वायरस ज्यादा खतरनाक होता है.

डेंगू से बचने के लिए क्या करें

डॉ. तुषार तायल बताते हैं कि डेंगू से बचने के लिए आपको एडीज मच्छर के काटने से खुद को बचाना होगा. इसके लिए सबसे जरूरी बात यह है कि अपने आसपास मच्छर न पनपने दें. अपने घर और आसपास के गमलों, कूलरों, छतों तथा पुराने बर्तनों में कभी भी साफ पानी जमा न होने दें. पानी की टंकियों और हौदियों को हमेशा अच्छी तरह ढककर रखें. हर सप्ताह कूलरों की सफाई करें और उन्हें सूखा रखें. एडीज मच्छर दिन के समय काटते हैं, इसलिए बाहर निकलते समय पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें. शरीर के खुले हिस्सों पर मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम या तेल का इस्तेमाल करें. घर की खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जालियां लगवाएं. सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें. तेज बुखार, जोड़ों में तेज दर्द या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. बिना डॉक्टरी सलाह के कभी भी एस्पिरिन या इबूप्रोफेन जैसी पेनकिलर दवाएं न लें. भरपूर मात्रा में नारियल पानी, छाछ और ओआरएस घोल पीकर शरीर को हाइड्रेटेड रखें.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

August 17, 2026, 18:11 IST

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