Famous Temple: राजस्थान का अनोखा हनुमान मंदिर, जहां न चढ़ता है तेल, न सिंदूर, फिर भी पूरी होती हैं मनोकामनाएं

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यहां हनुमानजी को नहीं चढ़ता तेल-सिंदूर, राजस्थान का यह मंदिर है बेहद अनोखा
Last Updated:August 04, 2026, 06:55 IST
Rajasthan Unique Hanuman Temple: बाड़मेर के महाबार रोड स्थित सफेद आकड़ा क्षेत्र में बना दास हनुमान मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां भगवान हनुमान को न तेल चढ़ाया जाता है और न ही सिंदूर अर्पित किया जाता है. श्रद्धालु केवल शुद्ध मन, ध्यान और भक्ति से पूजा-अर्चना करते हैं. वर्ष 2003 में स्थापित इस मंदिर में पिछले 23 वर्षों से अखंड ज्योति जल रही है. जयपुर के सफेद संगमरमर से बनी ध्यान मुद्रा में विराजमान दास हनुमान की प्रतिमा भक्तों के आकर्षण का केंद्र है. मंगलवार और शनिवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
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बाड़मेर. हनुमान मंदिर में न तेल चढ़ाया जाए और न ही सिंदूर अर्पित किया जाए, यह सुनकर शायद आपको हैरानी हो. लेकिन राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक ऐसा अनोखा दास हनुमान मंदिर है, जहां वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार बजरंगबली को न तो तेल चढ़ाया जाता है और न ही सिंदूर अर्पित किया जाता है. यहां श्रद्धालु केवल शुद्ध मन, श्रद्धा और ध्यान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. आमतौर पर देशभर के अधिकांश हनुमान मंदिरों में भक्त तेल, सिंदूर, चमेली का तेल और प्रसाद अर्पित करते हैं, लेकिन इस मंदिर की परंपरा इसे अन्य सभी हनुमान मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है.
महाबार रोड स्थित सफेद आकड़ा क्षेत्र में बने इस दास हनुमान मंदिर में भगवान हनुमान ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से ध्यान और पूजा करने से मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी इस अनूठी परंपरा और मंदिर की आध्यात्मिक आभा से आकर्षित होकर दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
23 साल से आस्था का केंद्र है दास हनुमान मंदिर
इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी. मंदिर कमेटी के सदस्य मांगीलाल संखलेचा की प्रेरणा और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से यहां 23 साल से अंखण्ड ज्योति जल रही है. यह मूर्ति जयपुर के सफेद संगमरमर से तराशी गई दास हनुमान हनुमान की अत्यंत दुर्लभ और शांत ध्यान मुद्रित प्रतिमा विराजमान है. यहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.
दास रूप में हनुमान की सेवा करने से भक्तों के मिटते हैं विकार
मंदिर में सेवारत पंडित ओमप्रकाश जोशी के मुताबिक श्रीरामचरितमानस में हनुमानजी को भगवान श्रीराम का परम दास माना गया है. दास भाव की भक्ति से साधक में नम्रता, समर्पण और भक्ति का भाव जागता है. यहां तेल सिंदूर न चढ़ाकर शुद्ध भाव और ध्यान से पूजा की जाती है जिससे श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती है.
मंगलवार और शनिवार को मेले जैसा रहता है माहौल
इस मंदिर का संचालन श्री सिदेश्वर महादेव विकास समिति की ओर से किया जाता है. इस दास हनुमान मंदिर में मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. यहां हनुमान जयंती व वार्षिकोत्सव पर मेले का आयोजन किया जाता है. पंडित ओमप्रकाश जोशी के मुताबिक इस मंदिर में अंखड ज्योत जल रही है. उनके मुताबिक यहां श्रद्धालु शुद्ध भाव और ध्यान से पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी मनोकामना पूरी होती है. 23 वर्षो से यहां भक्तिमय माहौल है. इतना ही नहीं यहां भक्त सुंदरकांड भी करते हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
August 04, 2026, 06:55 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



