Entertainment

राह चलते शायर ने लिखकर दी गजल, बेगम अख्तर ने उस पर बना दी सुरीली धुन, महफिलों की आज भी है जान

Last Updated:October 06, 2026, 22:07 IST

गाने वाले तो इस दुनिया में बहुत हुए लेकिन कुछ आवाजें सिर्फ कानों तक नहीं पहुंचतीं बल्कि सीधे दिल में उतर जाती हैं. बेगम अख्तर की आवाज भी ऐसी ही थी. उनकी गजल सुनते वक्त ऐसा लगता था जैसे कोई सामने बैठकर आपके दिल का दर्द बयां कर रहा हो. उनकी गायकी में मोहब्बत की मिठास भी थी और जुदाई का दर्द भी. उन्हें ‘मल्लिका-ए-गजल’ बनाने में एक गजल का बड़ा रोल है, जिसे राह चलते एक शायर ने लिखकर दिया था. उन्होंने भी रास्ते में गजल पर खूबसूरत धुन बनाकर दी. वह गजल आज भी महफिलों की जान है.

ख़बरें फटाफट

राह चलते शायर ने लिखकर दी गजल, बेगम अख्तर ने उस पर बना दी सुरीली धुनZoomबेगम अख्तर ने कई यादगार गजलें गाई हैं. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: बेगम अख्तर जब गाती थीं तो महफिल में बैठे लोग सिर्फ सुनते नहीं थे बल्कि उस एहसास को जीने लगते थे. उनकी मशहूर गजल ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया’ आज भी संगीत प्रेमियों के दिल में उसी तरह बसी हुई है. उन्हें यह गजल एक शायर ने राह चलते दी थी, जिसे बेगम अख्तर ने ट्रेन में ही कंपोज कर दिया था.

बेगम अख्तर का जन्म 7 अक्टूबर 1914 को फैजाबाद में हुआ था. उनका असली नाम अख्तरी बाई फैजाबादी था. बचपन से ही उन्हें संगीत में दिलचस्पी थी. कम उम्र में उन्होंने संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उनकी आवाज लोगों के बीच पहचानी जाने लगी. महज 14 साल की उम्र में उन्होंने सार्वजनिक रूप से गायन की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी. आगे चलकर यही आवाज गजल, ठुमरी और दादरा की दुनिया की पहचान बन गई.

बेगम अख्तर की खासियत सिर्फ उनकी आवाज नहीं थी. वह जिस शायरी को गाती थीं, उसे पहले महसूस करती थीं. वह शब्दों का चुनाव बेहद सोच-समझकर करती थीं. उन्हें लगता था कि अगर शायरी गायक के दिल को नहीं छूती, तो वह सुनने वाले के दिल तक भी नहीं पहुंच सकती. उनकी जिंदगी भी हमेशा आसान नहीं रही. निजी जिंदगी के कई उतार-चढ़ावों ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया. 1945 में उन्होंने बैरिस्टर इश्तियाक अहमद अब्बासी से निकाह किया. मां के निधन के बाद वह गहरे सदमे में चली गईं और कुछ समय के लिए गायकी से दूर हो गईं. बाद में पति के कहने पर उन्होंने दोबारा संगीत की दुनिया में वापसी की. इसके बाद उनकी आवाज और भी ज्यादा गहराई लेकर सामने आई.

जब बेगम अख्तर को रास्ते में मिले शायरअब बात उस गजल की, जिसने बेगम अख्तर की पहचान को और मजबूत किया- ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया.’ इस गजल के पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. कहा जाता है कि जब बेगम अख्तर मुंबई से लखनऊ लौट रही थीं, तब रास्ते में एक शायर उनसे मिले. उन्होंने अपनी लिखी हुई शायरी को बेगम अख्तर की आवाज देने की गुजारिश की और कागज का एक टुकड़ा उन्हें दे दिया. बेगम अख्तर ने उस कागज को संभालकर अपने पर्स में रख लिया. सफर आगे बढ़ा और जब ट्रेन भोपाल के आसपास पहुंची तो अचानक उन्हें उस शायरी का ख्याल आया. उन्होंने हारमोनियम निकाला और शायरी के शब्दों के लिए सुर तलाशने लगीं. धीरे-धीरे धुन तैयार हुई और फिर वही रचना एक ऐसी गजल बन गई, जिसे सुनकर आज भी लोग भावुक हो जाते हैं.

आज भी महफिलों में बजती हैं गजलें गजल के आखिर में शायर का तखल्लुस भी आता है- ‘शकील’. दरअसल, इसके रचनाकार मशहूर शायर शकील बदायूंनी थे. बेगम अख्तर ने उनकी शायरी को जिस तरह अपनी आवाज दी, उसने शब्दों को एक अलग ही जिंदगी दे दी. फिल्म स्टार नाना पाटेकर ने एक बार उनके बारे में कहा कि एक कार्यक्रम में बेगम अख्तर ने गजल खत्म की तो दर्शकों की तरफ से तालियां नहीं बजीं. आमतौर पर उनकी प्रस्तुति के बाद जोरदार तालियां गूंजती थीं लेकिन उस दिन पूरी महफिल में सन्नाटा था. किसी ने इसकी वजह पूछी तो बेगम अख्तर ने मुस्कुराकर कहा कि इसी सन्नाटे के लिए हम जीते हैं. सामने वाला भूल गया कि उसे ताली भी बजानी है. बेगम अख्तर 30 अक्टूबर 1974 को इस दुनिया से विदा हो गईं लेकिन उनकी आवाज आज भी जिंदा है. उनकी गजलें आज भी महफिलों में बजती हैं, नए संगीत प्रेमी उन्हें सुनते हैं और पुराने चाहने वाले उनकी आवाज में अपना बीता हुआ वक्त तलाशते हैं.

About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

और पढ़ेंLocation :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

October 06, 2026, 22:07 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj