ठंड में गेहूं की पत्तियां क्यों पड़ रही हैं पीली? बीमारी नहीं, कृषि विभाग ने बताई असली वजह

Last Updated:December 29, 2025, 15:31 IST
Bharatpur News : भरतपुर में ठंड और कोहरे के कारण गेहूं की फसल में पीलापन दिखा, कृषि विभाग ने इसे अस्थायी बताया और किसानों को अनावश्यक दवाइयों से बचने की सलाह दी. कृषि अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में तापमान में गिरावट, अधिक नमी और लगातार कोहरे की स्थिति के कारण फसलों की बढ़वार कुछ समय के लिए धीमी हो जाती है.
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भरतपुर. ठंड के मौसम और कोहरे के दौरान गेहूं की फसल में पत्तियों का हल्का पीलापन किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है. खेतों में हरी-भरी फसल में अचानक पीलापन दिखने से कई किसान इसे बीमारी या कीट प्रकोप का संकेत मान रहे हैं. हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं बताते हुए कहा है कि यह स्थिति मौसम में आए बदलाव और पोषक तत्वों की कुछ अस्थायी कमियों के कारण होती है.
कृषि अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में तापमान में गिरावट, अधिक नमी और लगातार कोहरे की स्थिति के कारण फसलों की बढ़वार कुछ समय के लिए धीमी हो जाती है. इस दौरान पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पत्तियां हल्की पीली नजर आने लगती हैं. यह स्थिति अस्थायी होती है और मौसम सामान्य होते ही फसल फिर से हरी-भरी और स्वस्थ हो जाती है. अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस पीलापन को रोग समझकर अनावश्यक दवाइयों या कीटनाशकों का छिड़काव न करें.
गेहूं में क्यों आ जाता है पीलापनकृषि विभाग के अधिकारियों ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि गेहूं की फसल की पत्तियों के पीले पड़ने के तीन से चार प्रमुख कारण हो सकते हैं. पहला कारण फसल की मांग के अनुसार नाइट्रोजन की पर्याप्त मात्रा न मिलना है. नाइट्रोजन की कमी से पौधों की बढ़वार रुक जाती है और पत्तियों का रंग हल्का पड़ने लगता है. दूसरा कारण खेत में जिंक तत्व की कमी हो सकता है, जिससे पत्तियों में पीलापन दिखाई देता है और पौधे कमजोर हो जाते हैं. तीसरा कारण समय पर सिंचाई न होना है. यदि फसल को आवश्यकता के अनुसार पानी नहीं मिलता तो पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है. चौथा कारण खेत में दीमक की मौजूदगी भी हो सकती है, जिससे जड़ें प्रभावित होती हैं और फसल पीली पड़ने लगती है.
समाधान और कृषि विभाग की सलाहकृषि अधिकारियों ने किसानों को इन समस्याओं के समाधान भी बताए हैं. यदि जिंक की कमी है तो किसान अपने खेतों में जिंक सल्फेट का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं. नाइट्रोजन की कमी होने पर संतुलित मात्रा में यूरिया का प्रयोग किया जा सकता है. इसके साथ ही समय पर सिंचाई करना और खेत की नियमित निगरानी करना जरूरी है. अधिकारियों का कहना है कि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही खेती करें और किसी भी शंका की स्थिति में कृषि विभाग से संपर्क करें, ताकि गेहूं की फसल सुरक्षित रहे और उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Bharatpur,Rajasthan
First Published :
December 29, 2025, 15:31 IST
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