Animal Care Advisory | How to protect livestock from heatstroke during the summer | Animal Care Tips for Summer Heatwave

Last Updated:May 01, 2026, 11:45 IST
Animal Care Tips for Summer Heatwave by KVK Bikaner: बीकानेर कृषि विज्ञान केन्द्र ने भीषण गर्मी में पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए एडवायजरी जारी की है. इसमें पशुशाला को हवादार रखने, खिड़कियों पर गीली बोरी लगाने और फोगर के उपयोग की सलाह दी गई है. पशुओं को हर 2 घंटे में ठंडा पानी पिलाने और सुबह-शाम ही चारा खिलाने पर जोर दिया गया है. संतुलित आहार में नमक और खनिज मिश्रण शामिल करने के साथ-साथ मानसून से पहले टीकाकरण की भी अपील की गई है. चराई का समय बदलकर और उचित टीकाकरण के जरिए पशुपालक अपने पशुधन को हीट स्ट्रोक से बचा सकते हैं.
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गर्मी में पशुओं की देखभाल के उपाय
Animal Care Tips for Summer Heatwave by KVK Bikaner: बीकानेर में लगातार बढ़ते तापमान और लू (Heatwave) के प्रकोप को देखते हुए आईसीएआर (ICAR) के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र ने पशुपालकों के लिए एक विस्तृत एडवायजरी जारी की है. एडवायजरी के अनुसार, सबसे पहले पशुशाला (Shed) के प्रबंधन पर ध्यान देना अनिवार्य है. पशुशाला को हवादार बनाना चाहिए और तापमान नियंत्रित करने के लिए फोगर, फव्वारे या कूलर का उपयोग करना चाहिए. यदि ये संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, तो खिड़कियों और दरवाजों पर गीली बोरी या टाट लगाकर प्राकृतिक रूप से ठंडक पैदा की जा सकती है. नई पशुशाला का निर्माण करते समय छत की ऊँचाई कम से कम 15 फीट रखनी चाहिए और उसे पूर्व-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए ताकि सीधी धूप का असर कम हो.
भीषण गर्मी में पानी की कमी से पशुओं में निर्जलीकरण (Dehydration) और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि पशुओं को हर 1 से 2 घंटे के अंतराल पर स्वच्छ और ठंडा पानी पिलाना चाहिए. भैंसों के शरीर का तापमान कम करने के लिए उन्हें सुबह और शाम नहलाना बेहद लाभकारी रहता है. आहार प्रबंधन के तहत पशुओं को चारा और दाना दोपहर की बजाय सुबह, शाम या रात के समय ही खिलाना चाहिए. संतुलित आहार में हरा चारा, सूखा चारा, और खनिज मिश्रण (Mineral Mixture) शामिल करना जरूरी है. शरीर में लवणों की कमी न हो, इसके लिए प्रतिदिन 50 ग्राम खनिज मिश्रण और 30 ग्राम नमक देना आवश्यक बताया गया है.
चराई और विशेष सावधानीएडवायजरी में स्पष्ट किया गया है कि भेड़-बकरियों और अन्य पशुओं को दोपहर की चिलचिलाती धूप में चराने से बचना चाहिए. उन्हें केवल सुबह या शाम के समय ही बाहर ले जाएं और दोपहर में छायादार स्थान पर रखें. भेड़ों की ऊन समय पर उतारने से उन्हें गर्मी से राहत मिलती है. छोटे पशुओं और चूजों के लिए लू जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए उन्हें सीधे धूप के संपर्क में न आने दें. यदि पशु सुस्त नजर आए या उसे भूख कम लगे, तो यह हीट स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं; ऐसी स्थिति में बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
रोग नियंत्रण और टीकाकरणमानसून से पूर्व पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाना भी इस एडवायजरी का प्रमुख हिस्सा है. गाय और भैंसों में गलघोटू, मुंहपका-खुरपका और लंगड़ा बुखार जैसे रोगों के टीके समय पर लगवाने की सलाह दी गई है. साथ ही, गर्मी के मौसम में चिचड़, किलनी और पेट के कीड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिनसे बचाव के लिए नियमित दवाओं का उपयोग करना चाहिए. पशुशाला के आसपास छायादार पेड़ लगाना एक दीर्घकालिक और प्रभावी उपाय है जो प्राकृतिक रूप से लू के प्रभाव को कम करता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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