Free Yoga Training in Kota | कोटा में नि:शुल्क योग प्रशिक्षण

Last Updated:April 27, 2026, 06:10 IST
Free Yoga Training in Kota by Shubhangi Galav: कोटा की शुभांगी गालव योग के माध्यम से समाज में स्वास्थ्य और सकारात्मकता फैला रही हैं. केंद्रीय विद्यालय में योग शिक्षिका होने के बावजूद, वे अपने खाली समय में बच्चों और बुजुर्गों को नि:शुल्क योग प्रशिक्षण देती हैं. पतंजलि यूनिवर्सिटी से योगा साइंस में डिग्री प्राप्त शुभांगी पिछले पांच वर्षों से कोटा के पार्कों और स्कूलों में सक्रिय हैं. अब तक 100 से ज्यादा लोग उनके नि:शुल्क योग शिविरों से लाभान्वित हो चुके हैं. उनका मानना है कि योग मानसिक शांति और शारीरिक फिटनेस के लिए अनिवार्य है. शुभांगी का उद्देश्य शिक्षा और समाज के हर स्तर पर योग को पहुँचाना है ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके.
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Free Yoga Training in Kota by Shubhangi Galav: शिक्षा नगरी कोटा की पहचान अब केवल कोचिंग और पढ़ाई तक सीमित नहीं रह गई है. यहाँ के युवा अब समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी आगे आ रहे हैं. इन्हीं में से एक नाम है शुभांगी गालव का, जो योग के माध्यम से शहरवासियों को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दे रही हैं. शुभांगी न केवल योगा साइंस में डिग्री धारक हैं, बल्कि वे अपनी इस कला का उपयोग बिना किसी स्वार्थ के समाज सेवा में कर रही हैं. वे जिम, सार्वजनिक पार्कों और स्कूलों में जाकर हर आयु वर्ग के लोगों को योग के प्रति जागरूक कर रही हैं.
शुभांगी गालव वर्तमान में कोटा के केंद्रीय विद्यालय नंबर 1 में योग शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं. स्कूल में छात्रों को योग सिखाने के बाद, वे अपने खाली समय को बच्चों और बुजुर्गों की सेवा में लगाती हैं. पिछले पांच वर्षों से वे लगातार योग प्रशिक्षण दे रही हैं. शुभांगी बताती हैं कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने योग की वास्तविक शक्ति और इसके मानसिक लाभों को महसूस किया था. इसी अनुभव ने उन्हें प्रेरित किया कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस प्राचीन पद्धति से जोड़ें ताकि लोग शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें.
विशेष वर्गों पर केंद्रित प्रशिक्षणशुभांगी का विशेष ध्यान बच्चों और बुजुर्गों पर रहता है. उनका मानना है कि बढ़ती उम्र में बुजुर्गों को और विकास के दौर में बच्चों को विशेष मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है. पिछले तीन वर्षों से वे 11 से 18 साल के बच्चों को नियमित योगासन और प्राणायाम सिखा रही हैं. अब तक 100 से अधिक लोग उनके नि:शुल्क शिविरों का लाभ उठा चुके हैं. उनके मार्गदर्शन में योग करने वाले कई लोगों ने स्वीकार किया है कि इससे उनके तनाव में कमी आई है और वे पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं.
शिक्षा में योग की बढ़ती भूमिकापतंजलि यूनिवर्सिटी से शिक्षित शुभांगी गालव का मानना है कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है. वे सरकार और स्कूलों के उस फैसले का पुरजोर समर्थन करती हैं जिसमें योग को शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने की बात कही गई है. उनका कहना है कि यदि बच्चों को बचपन से ही योग की आदत पड़ जाए, तो आने वाली पीढ़ी अधिक आत्मविश्वासी और स्वस्थ होगी. शुभांगी के ये छोटे-छोटे प्रयास आज कोटा में एक बड़े बदलाव की लहर ला रहे हैं और वे कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Kota,Kota,Rajasthan
First Published :
April 27, 2026, 06:10 IST



