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तपस्या के आगे गर्मी फेल! विदेशी साध्वी ने पुष्कर में शुरू की प्राचीन नौ धूणी अग्नि साधना, लोगों का खींचा ध्यान

Last Updated:May 14, 2026, 13:06 IST

Ajmer Hindi News: राजस्थान के तीर्थराज पुष्कर में भीषण गर्मी के बीच एक विदेशी साध्वी द्वारा की जा रही प्राचीन नौ धूणी अग्नि साधना चर्चा का विषय बनी हुई है. तेज धूप और ऊंचे तापमान के बावजूद साध्वी अग्नि के बीच बैठकर कठोर तपस्या कर रही हैं, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है. यह साधना भारतीय सनातन परंपरा की प्राचीन तपस्या विधियों में से एक मानी जाती है, जिसमें साधक चारों ओर अग्नि जलाकर ध्यान और तप करता है. माना जाता है कि इस साधना से मानसिक एकाग्रता, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है.

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अजमेर. ब्रह्म नगरी पुष्कर की धरती पर इन दिनों आस्था, साधना और आत्मबल का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. भीषण गर्मी के बीच जहां आमजन गर्म हवाओं से बचने के उपाय ढूंढ रहे हैं, वहीं ब्रह्मा नगरी में एक विदेशी साध्वी अपनी कठोर तपस्या से सभी को आश्चर्यचकित कर रही है. ब्रह्मा मंदिर के लिए प्रसिद्ध इस तीर्थस्थल में साधु-संतों की साधना कोई नई बात नहीं है लेकिन रूस में जन्मी योगिनी अन्नपूर्णा नाथ की तपस्या विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

योगिनी अन्नपूर्णा नाथ नाथ संप्रदाय की दीक्षित साध्वी हैं जो पिछले 17 वर्षों से भारत में रहकर आध्यात्मिक साधना में लीन हैं. भारतीय संस्कृति योग और सनातन परंपराओं से प्रभावित होकर उन्होंने लगभग 10 वर्ष पूर्व नाथ संप्रदाय को अपनाया और तब से निरंतर साधना पथ पर अग्रसर हैं. इससे पहले भी उन्होंने नवरात्रि के दौरान 9 दिनों तक जयपुर घाट पर खड़े रहकर खड़ेश्वरी तप किया था.

सवा तीन घंटे तक करती है तपस्या वर्तमान में वे 21 दिनों तक चलने वाली अत्यंत कठिन नौ धूणी अग्नि तपस्या कर रही हैं. इस तपस्या के दौरान वह प्रतिदिन लगभग सवा तीन घंटे तक नौ जलती हुई धूनियों के बीच बैठकर गुरु बीज मंत्र का जाप करती हैं. इस दौरान उनके शरीर पर गौमय भस्म का लेप किया जाता है और धूनियों को गोबर के कंडों से प्रज्वलित किया जाता है. विशेष बात यह है कि हर दिन इन कंडों की संख्या बढ़ाई जाती है .

नाथ संप्रदाय के योगी गुरु दीपक नाथ ने बताया कि यह तपस्या अत्यंत प्राचीन परंपरा का हिस्सा है, जिसे संत-महात्मा अनादि काल से करते आए हैं. उन्होंने बताया कि इस साधना का उद्देश्य केवल आत्मशुद्धि नहीं, बल्कि जनकल्याण और विश्व कल्याण भी है.

इसलिए चुना पुष्कर को योगी गुरु दीपक नाथ ने बताया कि वह कई जगह तपस्या कर चुके हैं लेकिन उन्होंने पुष्कर को इसलिए चुना क्योंकि यहां से सृष्टि की रचना हुई है यहां पर साधु संतों का सम्मान होता है . उन्होंने कहा कि उनका सौभाग्य है कि वह पुष्कर की पावन धरती पर यह तपस्या कर रहे हैं .

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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