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माउंट आबू घूमने जा रहे हैं? देलवाड़ा से गुरूशिखर तक इन 5 जगहों को जरूर करें एक्सप्लोर, खर्च भी है सीमित

Last Updated:April 20, 2026, 06:35 IST

Mount Abu Places to Visit: गर्मी की छुट्टियों में अगर आप भी परिवार के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आज हम आपको राजस्थान के सबसे ठंडे शहर हिल स्टेशन माउंट आबू के कुछ बजट फ्रेंडली टूरिस्ट प्वाइंट के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आप मात्र 500 रुपए के बजट में घूम सकते हैं. माउंट आबू के ये टूरिस्ट प्लेस बजट फ्रेंडली होने के साथ ही प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में शामिल हैं .यह एकमात्र हिल स्टेशन है, जो प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है. यहां देलवाड़ा जैन मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी और स्थापत्य कला के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है. पर्यटक रेंटल बाइक या टैक्सी से इन जगहों को आसानी से घूम सकते हैं और शानदार अनुभव ले सकते हैं.

माउंट आबू की प्रसिद्ध जगहों को घूमने के लिए आप रेंटल बाइक या टैक्सी का सहारा ले सकते हैं. यह हिल स्टेशन अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. माउंट आबू से करीब 5 किलोमीटर दूर देलवाड़ा में स्थित जैन मंदिर पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है. इस मंदिर की तुलना आगरा के ताजमहल से की जाती है. संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी और अद्भुत कलाकृतियां यहां आने वाले हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. धार्मिक आस्था के साथ यह जगह स्थापत्य कला का भी बेहतरीन उदाहरण है.

देलवाड़ा जैन मंदिर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. इस मंदिर में संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी, जीवंत मूर्तियां और आकर्षक डिजाइन इसे खास बनाते हैं. यह मंदिर परिसर कुल पांच मंदिरों का समूह है. इनमें प्रमुख विमल वसाही मंदिर का निर्माण 1031 ई. में और लूना वसाही मंदिर का निर्माण 1230 ई. में कराया गया था. इन भव्य मंदिरों का निर्माण सोलंकी शासकों के मंत्रियों विमल शाह और वास्तुपाल-तेजपाल ने करवाया था. यहां की कला और शिल्प हर पर्यटक को प्रभावित करते हैं.

माउंट आबू के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शक्तिपीठ अधर देवी मंदिर खास महत्व रखता है. यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित एक प्राकृतिक गुफा में बना है, जहां मां कात्यायनी विराजमान हैं. मान्यता है कि यहां माता सती के अधर गिरे थे, इसी कारण इसका नाम अधर देवी पड़ा. श्रद्धालु अपनी यात्रा को पूर्ण मानने के लिए यहां दर्शन जरूर करते हैं. मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 250 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो इसे और रोमांचक बनाती हैं. धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का यह संगम पर्यटकों को खास अनुभव देता है.

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माउंट आबू की प्रसिद्ध नक्की लेक के पास स्थित यह व्यू पॉइंट अरावली पर्वतमाला के बीच डूबते सूरज के मनमोहक नजारे के लिए जाना जाता है. यहां से सूर्यास्त का दृश्य पर्यटकों को खास अनुभव देता है. इस स्थान पर घूमने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है, जिससे यह सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. चारों ओर हरियाली, ठंडी हवाएं और पहाड़ों का सुंदर दृश्य यहां शांति और सुकून का एहसास कराता है. प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह बेहद खास मानी जाती है.

माउंट आबू से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित यह प्रसिद्ध पर्यटन स्थल अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. यहां महाराणा कुम्भा का महल, राजा भृतहरि महल, गोपीचंद की गुफा, मीरा बाई की कुटिया और अचलेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं. अचलेश्वर मंदिर की खास बात यह है कि यहां भगवान शिव के शिवलिंग की नहीं, बल्कि उनके अंगूठे की पूजा की जाती है. यह अनोखी परंपरा इसे देश के अन्य मंदिरों से अलग बनाती है. इतिहास और आस्था का यह संगम पर्यटकों को खास अनुभव प्रदान करता है.

अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी गुरुशिखर माउंट आबू से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है. समुद्र तल से 1722 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. यहां भगवान दत्तात्रेय की गुफा और उनका तपस्या स्थल दर्शनीय हैं. इसके अलावा अनुसूया मंदिर, चरण पादुका मंदिर और गुरुशिखर व्यू पॉइंट भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. यहां से आसपास के पहाड़ों और घाटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है, जो हर पर्यटक को खास अनुभव देता है.

गुरुशिखर पर स्थित गुरु दत्तात्रेय गुफा में अखंड धूना निरंतर जलता रहता है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. यहां पहुंचने के लिए करीब 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिससे यात्रा थोड़ी रोमांचक बन जाती है. इतनी ऊंचाई पर भी पर्यटकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है. यहां पार्किंग, खाने-पीने की दुकानों और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं. खास बात यह है कि पार्किंग के अलावा इस स्थल पर घूमने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता है. धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का यह संगम पर्यटकों को खास अनुभव देता है.

First Published :

April 20, 2026, 06:35 IST

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