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लॉ अब सिर्फ वकालत नहीं, जज से लीगल एडवाइजर तक करियर के कई शानदार मौके, एक्सपर्ट से जानें प्रोसेस

कोटा. देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे पारंपरिक करियर विकल्पों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अब छात्रों का रुझान तेजी से नए और सम्मानजनक करियर विकल्पों की ओर बढ़ रहा है. इन्हीं में से एक है लॉ एजुकेशन, जो करियर के कई दरवाजे भी खोलता है. हर साल कई छात्र अपने कानूनी करियर की मजबूत शुरुआत कर रहे हैं. मोदी लॉ कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. शिप्रा गुप्ता ने 12वीं के बाद करियर को लेकर उलझन में पड़े छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

उनका कहना है कि आज के समय में लॉ एक ऐसा क्षेत्र बन चुका है, जहां अवसरों की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है सही दिशा की. अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि लॉ की पढ़ाई के लिए बहुत अधिक अंक या कठिन प्रवेश परीक्षा जरूरी होती है. लेकिन डॉ. शिप्रा गुप्ता के अनुसार, यदि किसी छात्र ने 12वीं में न्यूनतम 50% अंक प्राप्त किए हैं, तो वह सीधे BA LLB जैसे इंटीग्रेटेड कोर्स में दाखिला ले सकता है.

12वीं के बाद BA LLB बेहतर विकल्पों में से एक है

खास बात यह है कि यह कोर्स हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में उपलब्ध है, जिससे विभिन्न बैकग्राउंड के छात्रों को समान अवसर मिलता है. डॉ. गुप्ता बताती हैं कि 12वीं के बाद BA LLB (5 वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स) छात्रों के लिए सबसे बेहतर विकल्पों में से एक है. इस कोर्स के माध्यम से छात्र एक साथ ग्रेजुएशन और लॉ की डिग्री हासिल करते हैं. इससे समय की बचत होती है और करियर की शुरुआत भी जल्दी हो जाती है.

लॉ का दायरा अब कोर्ट तक सीमित नहीं

लॉ की पढ़ाई को लेकर एक आम धारणा यह भी है कि यह केवल वकालत तक सीमित है. लेकिन हकीकत काफी अलग है. डॉ. शिप्रा गुप्ता के अनुसार, लॉ करने के बाद छात्र कई क्षेत्रों में अपना करियर बना सकते हैं. न्यायिक सेवा यानी ज्यूडिशियल सर्विस में जाकर सिविल जज बनना आज भी सबसे प्रतिष्ठित विकल्पों में से एक है. इसके अलावा भारतीय सेना में लॉ ऑफिसर बनने का भी अवसर मिलता है, जहां देश सेवा के साथ सम्मानजनक करियर मिलता है.

कॉर्पोरेट सेक्टर में लीगल एडवाइजर के रूप में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को लाखों रुपये का पैकेज मिलता है. सरकारी विभागों जैसे बिजली विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और RIICO में भी विधि अधिकारियों की भारी मांग है. इसके अलावा लीगल जर्नलिज्म, ह्यूमन राइट्स, बैंकिंग और इंटरनेशनल लॉ जैसे क्षेत्रों में भी करियर के नए रास्ते खुल चुके हैं.

कोटा में मिल रही वर्ल्ड क्लास लॉ एजुकेशन

एक समय था जब राजस्थान के छात्रों को लॉ की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था. लेकिन 2018 के बाद कोटा में ही गुणवत्तापूर्ण लॉ एजुकेशन उपलब्ध होने लगी है. मोदी लॉ कॉलेज ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. कॉलेज में छात्रों को केवल थ्योरी तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज भी दी जाती है. मूट कोर्ट के जरिए छात्रों को वास्तविक अदालत जैसा माहौल मिलता है, जिससे उनकी प्रेजेंटेशन और तर्क क्षमता विकसित होती है. इसके साथ ही छात्रों को मानवाधिकार आयोग और Competition Commission of India जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में इंटर्नशिप के अवसर भी दिए जाते हैं.

करियर के लिए जरूरी स्किल्स पर करें फोकस

डॉ. शिप्रा गुप्ता का मानना है कि लॉ में सफल होने के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि तर्क शक्ति, विश्लेषण क्षमता और कम्युनिकेशन स्किल्स भी बेहद जरूरी हैं. कॉलेज में इन स्किल्स को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि छात्र प्रोफेशनल लाइफ में भी सफल हो सकें.

हर स्ट्रीम के छात्रों के लिए खुला है रास्ता

लॉ एक ऐसा करियर है जो साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों स्ट्रीम के छात्रों के लिए समान रूप से उपलब्ध है. यदि किसी छात्र में न्याय के प्रति लगाव है और वह समाज में बदलाव लाना चाहता है, तो लॉ उसके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. बदलते समय के साथ करियर के विकल्प भी बदल रहे हैं, और लॉ आज के युवाओं के लिए भविष्य का रास्ता बनकर उभर रहा है.

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