Ajab Gajab: भीलवाड़ा में मैकेनिक का कमाल! ड्रम से बनाया लो-कॉस्ट कूलर, देसी जुगाड़ वायरल

Last Updated:May 15, 2026, 15:29 IST
Desi Cooler: भीलवाड़ा के मैकेनिक रमेश कुमावत ने भीषण गर्मी के बीच पुराने प्लास्टिक ड्रम से देसी कूलर तैयार कर लोगों को चौंका दिया है. कम लागत में बने इस कूलर में छोटा पंखा, मोटर और घास-जाली का उपयोग किया गया है, जिससे ठंडी हवा मिलती है. खास बात यह है कि इसकी बिजली खपत भी बेहद कम है. महंगे एसी और कूलर के बीच यह देसी जुगाड़ ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहत का सस्ता विकल्प बनकर सामने आया है. आसपास के लोग इसे देखने और बनाने का तरीका सीखने पहुंच रहे हैं.
भीषण गर्मी के इस दौर में शहर के एक मैकेनिक ने अपनी समझ और मेहनत से देसी जुगाड़ तैयार किया है जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. महंगे कूलर और एसी के बीच इस जुगाड़ ने साबित किया कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है और कम संसाधनों में भी समाधान संभव है. मैकेनिक का कहना है कि हर समस्या के लिए बड़ी मशीनों या आधुनिक तकनीक की जरूरत नहीं होती. साधारण चीजों का सही उपयोग भी बेहतर परिणाम दे सकता है और यह जुगाड़ प्रेरणा देता है. यह तरीका दूसरों को भी नवाचार के लिए प्रेरित करता है.
इस जुगाड़ में सबसे खास बात यह है कि इसमें बहुत कम खर्च आया है, जो आम आदमी के बजट में आसानी से फिट हो सकता है. जहां बाजार में मिलने वाले कूलर हजारों रुपए के होते हैं, वहीं यह देसी कूलर बहुत कम पैसों में तैयार हो गया है. इतना ही नहीं, इसकी बिजली खपत भी कम है क्योंकि इसमें छोटा मोटर और पंखा लगाया गया है. इस वजह से यह न केवल सस्ता है बल्कि बिजली की बचत करने में भी मददगार साबित हो रहा है, जो आज के समय में एक बड़ी जरूरत बन गई है.
इस देसी ड्रम कूलर को बनाने के लिए मैकेनिक ने एक पुराने और बेकार पड़े प्लास्टिक ड्रम का उपयोग किया. उसने ड्रम के एक हिस्से को काटकर उसमें एक पंखा फिट किया, जिससे हवा बाहर निकल सके. इसके अलावा ड्रम के तीनों तरफ घास या जाली लगाई गई है, जो पानी को सोखकर ठंडी हवा पैदा करती है. ऊपर की तरफ पानी डालने के लिए जगह बनाई गई है, ताकि घास लगातार गीली बनी रहे और ठंडी हवा मिलती रहे. इस तरह यह पूरा सिस्टम एक साधारण लेकिन प्रभावी कूलिंग मशीन बन गया है.
Add as Preferred Source on Google
भीषण गर्मी के इस दौर में जहां तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और आमजन गर्म हवाओं से परेशान हैं, वहीं भीलवाड़ा शहर के मैकेनिक रमेश कुमावत ने अपनी समझ और मेहनत से ऐसा देसी जुगाड़ तैयार किया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. महंगे कूलर और एसी के बीच इस देसी जुगाड़ ने यह साबित कर दिया है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है. अगर सोच अलग हो तो कम संसाधनों में भी बड़ा समाधान निकाला जा सकता है. एक साधारण प्लास्टिक ड्रम को कूलर में बदल देना अपने आप में अनोखी बात है. इसे देखने के बाद हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है और इस मैकेनिक की काबिलियत को सराह रहा है.
जहां एक तरफ बाजार में लोहे और लकड़ी के महंगे कूलर आ रहे हैं, वहीं भीलवाड़ा के इस मैकेनिक का देसी कूलर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. यह सिर्फ देसी तकनीक का उदाहरण नहीं, बल्कि कम खर्च में बड़ा समाधान देने वाला अनोखा जुगाड़ भी है. मैकेनिक ने अपने इस नवाचार से साबित कर दिया कि नई सोच और मेहनत के दम पर कोई भी व्यक्ति उपयोगी आविष्कार कर सकता है. आम लोग भी सीमित संसाधनों में अपने स्तर पर नया और काम का समाधान तैयार कर सकते हैं. यही वजह है कि लोग इस देसी कूलर की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
गर्मी के मौसम में खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. हर घर में एसी नहीं होता और महंगे कूलर खरीदना भी सभी के बस की बात नहीं है. ऐसे में यह देसी कूलर लोगों के लिए सस्ता और उपयोगी विकल्प बनकर सामने आया है. कम लागत में तैयार होने वाला यह जुगाड़ गर्मी से राहत देने में मददगार साबित हो सकता है. इसकी खास बात यह है कि इसे स्थानीय स्तर पर आसानी से बनाया जा सकता है. यही कारण है कि लोग इस देसी तकनीक की सराहना कर रहे हैं और इसे आम आदमी के लिए फायदेमंद बता रहे हैं.
इस अनोखे कूलर को देखने के लिए आस-पास के लोग लगातार पहुंच रहे हैं और इसे करीब से समझने की कोशिश कर रहे हैं. कई लोग मैकेनिक से इसे बनाने का तरीका भी पूछ रहे हैं, ताकि वे भी अपने घर के लिए ऐसा कूलर तैयार कर सकें. यह देसी जुगाड़ खासकर उन लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और महंगे कूलर या एसी खरीदने में सक्षम नहीं हैं. कम खर्च में तैयार होने वाला यह कूलर लोगों को गर्मी से राहत देने का आसान विकल्प बन गया है. यही वजह है कि इसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



