ना देखी उम्र, ना की समाज की परवाह, शादीशुदा महिला को दिया दिल, भारतीय क्रिकेटर की दिलचस्प लव स्टोरी

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ना देखी उम्र, ना की समाज की परवाह, क्रिकेटर ने शादीशुदा महिला को दिया दिल
Last Updated:July 08, 2026, 23:57 IST
Anil Kumble Love Story: क्रिकेट के मैदान पर विरोधी टीम को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले अनिल कुंबले की प्रेम कहानी बेहद अनोखी है. उन्हें पहली ही नजर में एक शादीशुदा महिला चेतना से प्यार हो गया था, जो अपनी शादी से खुश नहीं थीं. समाज की परवाह किए बिना कुंबले ने एक लंबी कानूनी लड़ाई में चेतना का साथ दिया. शादी के बाद उन्होंने चेतना की बेटी को अपना सरनेम देकर सच्चे प्रेम और जिम्मेदारी की एक बेमिसाल मिसाल पेश की.अनिल कुंबले ने तलाकशुदा महिला चेतना से शादी की थी.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी सबसे बड़े मैच विनर्स की बात होगी, तो लेग स्पिनर अनिल कुंबले का नाम सबसे ऊपर की कतार में नजर आएगा. मैदान पर अपनी फिरकी के जादू से दुनिया के बड़े-से-बड़े बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाले ‘जंबो’ की निजी जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. प्यार में दिल हारने वाले भारतीय क्रिकेटरों की फेहरिस्त वैसे तो काफी लंबी है, लेकिन अनिल कुंबले की लव स्टोरी में एक ऐसा ट्विस्ट है जो समाज की रूढ़ियों को तोड़कर एक नई मिसाल पेश करता है. जिस महिला को देखते ही कुंबले अपना दिल हार बैठे थे, वह न सिर्फ शादी-शुदा थीं बल्कि एक बच्ची की मां भी थीं.
आज भले अनिल कुंबले (Anil Kumble) और चेतना रामतीर्था (Chethana Ramatheertha) अपनी खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के सफर में हमसफर हैं, लेकिन एक-दूसरे का साथ पाने की यह राह कांटों से भरी थी. अनिल कुंबले के क्रिकेट करियर से जुड़े अनगिनत ऐसे किस्से हैं, जो आज भी क्रिकेट प्रेमियों के रोंगटे खड़े कर देते हैं. अपनी सटीक लाइन-लेंथ और जादुई गेंदबाजी के दम पर उन्होंने टीम इंडिया को कई असंभव लग रहे मुकाबलों में जीत दिलाई. दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया वह टेस्ट मैच आज भी इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, जहां कुंबले ने अकेले दम पर पूरी पाकिस्तानी टीम को अपनी उंगलियों पर नचा दिया था.
अनिल कुंबले ने तलाकशुदा महिला चेतना से शादी की थी.
एक ही पारी में सभी 10 विकेट चटकाने का जो ऐतिहासिक कारनामा उन्होंने किया, उसे न तो सरहद के उस पार वाले भूल पाए हैं और न ही इस पार वाले. मैदान पर टूटे हुए जबड़े के साथ पट्टी बांधकर गेंदबाजी करने वाले कुंबले के इसी जज्बे ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा मैच विनर बनाया. खैर, क्रिकेट के मैदान पर तो कुंबले ने कई लड़ाइयां जीतीं, लेकिन उनकी असली परीक्षा तो जिंदगी के मैदान पर तब शुरू हुई, जब उन्हें एक ऐसा प्यार मिला जिसमें न तो उम्र की कोई सीमा थी और न ही समाज की परवाह, बल्कि वहां सिर्फ एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली सच्ची जीत थी.
पहली नजर का प्यार और दोस्ती का खूबसूरत सफरयह कहानी उन दिनों की है जब चेतना रामतीर्था बेंगलोर में एक ट्रैवल एजेंसी में काम किया करती थीं. पहले से ही शादीशुदा चेतना पर जब अनिल कुंबले की नजर पड़ी, तो उन्हें पहली ही नजर में उनसे प्यार हो गया. हालांकि, कुंबले जैसे शांत स्वभाव के इंसान के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करना आसान नहीं था. शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत हुई, जो धीरे-धीरे एक गहरी दोस्ती में बदल गई. कुंबले चेतना के स्वभाव और उनके व्यक्तित्व के प्रति पूरी तरह आकर्षित हो चुके थे, लेकिन वे इस बात से भी वाकिफ थे कि चेतना एक जटिल वैवाहिक जीवन से गुजर रही थीं. चेतना अपनी पहली शादीशुदा जिंदगी में बिल्कुल भी खुश नहीं थीं. वैवाहिक जीवन के तनाव और कड़वाहट के कारण उनका प्यार और रिश्तों से भरोसा पूरी तरह उठ चुका था. ऐसे नाजुक मोड़ पर अनिल कुंबले उनकी जिंदगी में एक सच्चे दोस्त और मार्गदर्शक बनकर आए.
टूटे हुए भरोसे को मिला सहारा और तलाक का बड़ा फैसलाकुंबले के निश्छल प्रेम, आदर और सुरक्षा के अहसास ने चेतना के दिल में एक बार फिर प्यार की उम्मीद जगाई. जब चेतना को यह अहसास हुआ कि कुंबले का प्यार सिर्फ एक क्षणिक आकर्षण नहीं बल्कि जीवनभर का साथ है, तो उन्होंने अपनी पुरानी और दर्दनाक शादी को पीछे छोड़ने का एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने अपने पहले पति से तलाक लेने की ठान ली. एक रूढ़िवादी समाज में एक शादीशुदा महिला का किसी दूसरे पुरुष के लिए तलाक लेना और एक मशहूर क्रिकेटर का उस महिला का साथ देना बेहद चुनौतीपूर्ण था. चेतना को अपने पहले पति से अलग होने के लिए एक लंबी और मानसिक रूप से थका देने वाली कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. इस मुश्किल वक्त में अनिल कुंबले एक चट्टान की तरह चेतना के पीछे खड़े रहे. उन्होंने न तो समाज की परवाह की और न ही अपने करियर पर पड़ने वाले किसी असर की.
कानूनी लड़ाई में जीत, विवाह और पिता का फर्जअंततः लंबी कानूनी लड़ाई में जीत हासिल करने के बाद चेतना अपने पहले पति से कानूनी रूप से अलग हुईं और साल 1999 में अनिल कुंबले और चेतना ने शादी कर ली. चेतना को अपने पहले पति से एक बेटी भी थी. तलाक के बाद उस मासूम बेटी की कस्टडी की लड़ाई भी बेहद पेचीदा और लंबी चली. इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान भी कुंबले लगातार चेतना के साथ अदालत के चक्कर काटते रहे और उन्हें हर मोड़ पर संबल दिया. शादी के बाद कुंबले ने न सिर्फ चेतना को अपनी पत्नी के रूप में अपनाया, बल्कि उनकी बेटी को भी पूरे दिल से स्वीकार किया और उसे अपना सरनेम ‘कुंबले’ दिया. आज वह बेटी भी इसी परिवार का हिस्सा है और कुंबले उसे अपनी सगी बेटी की तरह ही प्यार देते हैं. अनिल और चेतना की यह प्रेम कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्यार जिम्मेदारियों से भागना नहीं, बल्कि उन्हें पूरे सम्मान के साथ अपनाना है. आज उनके जन्मदिन पर यह कहानी उनके प्रशंसकों को एक बार फिर उनके प्रति आदर से भर देती है.
About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर
कमलेश राय वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें
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