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प्री-मानसून की कमी के बीच खेतों में किसान कर रहे जुताई और बुवाई की तैयारी

Last Updated:June 20, 2026, 20:40 IST

बारिश में देरी के बावजूद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की तैयारियां पूरी रफ्तार से जारी हैं. खेतों में मेड़बंदी, गहरी जुताई और गोबर व जैविक खाद का उपयोग कर मिट्टी को बुवाई के लिए तैयार किया जा रहा है. किसान मानसून की पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिसे ‘हलोतरा’ कहा जाता है, ताकि बाजरा, मूंग और ग्वार जैसी फसलों की समय पर बुवाई की जा सके. समय पर की गई ये तैयारियां कम बारिश में भी बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने में मदद कर सकती हैं.

बारिश में देरी ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन खेतों में तैयारियों की रफ्तार थमी नहीं है. जिले के ग्रामीण इलाकों में किसान सुबह और शाम के समय खेतों में मेड़बंदी कर रहे हैं, ताकि जब बारिश हो तो पानी खेत में ही रुके और बहकर बाहर न जाए. इससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और फसल को बेहतर शुरुआत मिलती है. कई किसान ट्रैक्टर और हल की मदद से गहरी जुताई कर रहे हैं, जिससे जमीन नरम हो और बीज अंकुरण में आसानी हो सके.

किसानों के बीच ‘हलोतरा’ का इंतजार भी बना हुआ है, यानी ऐसी पहली अच्छी बारिश जो बुवाई के लिए उपयुक्त हो. स्थानीय मान्यता के अनुसार जब एक इंच से ज्यादा बारिश होती है, तभी किसान बीज डालने का निर्णय लेते हैं. इससे पहले बुवाई करने पर बीज खराब होने का खतरा रहता है. यही कारण है कि किसान जल्दबाजी नहीं कर रहे और सही समय का इंतजार करते हुए तैयारी पूरी कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लेना चाहिए. बीजों का चयन, खाद प्रबंधन और खेत की तैयारी यदि सही तरीके से की जाए तो कम बारिश में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है. ऐसे में किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मानसून भले देर से आए, लेकिन अच्छी बारिश के साथ फसलों के लिए बेहतर हालात जरूर बनाए.

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