Jodhpur News: मेहरानगढ़ में दिखेगा प्रकृति और इतिहास का अनोखा संगम, 250 लोग करेंगे हैरिटेज वाल्क

जोधपुर. इस शहर की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक किलों और महलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की चट्टानों, पहाड़ियों, जल स्रोतों और भूगर्भीय संरचना में भी हजारों साल पुरानी कहानी छिपी है. इसी भू-विरासत को आमजन तक पहुंचाने और इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 6 अक्टूबर को मेहरानगढ़ दुर्ग में अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस दौरान हेरिटेज वॉक के जरिए प्रतिभागियों को मेहरानगढ़ की प्राकृतिक, भूगर्भीय और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया जाएगा. साथ ही मेहरानगढ़ को भारत का पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनाने की दिशा में जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा.
अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस के अवसर पर 6 अक्टूबर 2026 को मेहरानगढ़ दुर्ग में जियोहेरिटेज अवेयरनेस प्रोग्राम और हेरिटेज वॉक आयोजित की जाएगी. इस वर्ष दिवस की थीम ‘हमारे दरवाजे पर भू-विविधता’ रखी गई है. कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को अपने आसपास मौजूद चट्टानों, भू-आकृतियों, जल स्रोतों और प्राकृतिक संरचनाओं के महत्व से परिचित कराना है. आयोजन समिति के डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम में विद्यार्थी, शोधकर्ता, पर्यटक गाइड, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग, स्थानीय समुदाय और आमजन शामिल होंगे.
भारत में अब तक नहीं है यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्कविश्व के कई देशों में भू-विरासत के संरक्षण और जियो-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. वर्तमान में 51 देशों में 241 यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क हैं, जबकि भारत में अभी तक एक भी यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क नहीं है. ऐसे में मेहरानगढ़ और जोधपुर की भू-विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. क्षेत्र की भूगर्भीय, भू-आकृतिक, जल और सांस्कृतिक विशेषताओं को जियोपार्क की संभावनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है.
सुबह 6:30 बजे शुरू होगी हेरिटेज वॉककार्यक्रम के तहत सुबह 6:30 बजे हेरिटेज वॉक शुरू होगी, इस दौरान मेहरानगढ़ दुर्ग और आसपास के छह महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा. विशेषज्ञ प्रतिभागियों को जोधपुर की चट्टानी संरचना, भू-आकृतिक विशेषताओं, पारंपरिक जल स्रोतों और दुर्ग की स्थापत्य विरासत के बीच संबंधों की जानकारी देंगे. मेहरानगढ़ को केवल ऐतिहासिक दुर्ग के रूप में नहीं, बल्कि भूगर्भीय और सांस्कृतिक विरासत के अनूठे संगम के तौर पर समझाने का प्रयास किया जाएगा.
भू-विरासत संरक्षण के साथ जियो-टूरिज्म पर जोरआयोजन समिति के अनुसार, किसी क्षेत्र की विरासत केवल स्मारकों और भवनों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे मौजूद प्राकृतिक और भूगर्भीय विरासत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. कार्यक्रम में भू-विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश चंद्र माथुर, डॉ. शिव सिंह राठौड़, मेहरानगढ़ म्यूजियम के डॉ. महेंद्र सिंह तंवर, कर्नल अजय सिंह शेखावत और जयपुर से डॉ. सौरभ माथुर सहित विशेषज्ञ शामिल होंगे. करीब 250 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है, आयोजन के माध्यम से मेहरानगढ़ की भू-विरासत के संरक्षण, शोध, शिक्षा और जियो-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ इसे भविष्य में भारत के पहले यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क के रूप में विकसित करने की दिशा में जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.



