Rajasthan

जयपुर की अनोखी विरासत! जहां अंतिम संस्कार स्थल भी बन गया पर्यटन का बड़ा आकर्षण, देखने आते हैं हजारों सैलानी

Last Updated:June 16, 2026, 13:32 IST

Jaipur Royal Cremation Ground: जयपुर अपनी भव्य हवेलियों, किलों और महलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां स्थित शाही श्मशान घाट भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. प्रसिद्ध गेटोर की छतरियां (Gaitore Ki Chhatriyan) कछवाहा राजवंश के राजा-महाराजाओं और रानियों की स्मृति में निर्मित भव्य स्मारक हैं. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थल अपनी बारीक नक्काशी, राजपूत और मुगल स्थापत्य शैली के सुंदर मिश्रण तथा शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां बनी संगमरमर और बलुआ पत्थर की कलात्मक छतरियां राजघराने के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करती हैं. पर्यटक यहां न केवल वास्तुकला की सुंदरता को निहारने आते हैं.

जयपुर अपने राजाओं और उनके द्वारा बनाई गई ऐतिहासिक इमारतों के लिए सबसे ज्यादा फेमस है. जयपुर के राजा महाराजाओं ने अपने जीवन काल में रहते हुए जयपुर में कई किले, महल, हवेलियों बावड़ियों और गढ़ों का निर्माण करवाया, साथ ही अपने खुद के इतिहास को जीवित रखने के लिए उन्होंने इमारतों के रूप में भव्य छतरियां बनवाईं जो अब जयपुर के रॉयल श्मशान घाट के साथ अब पर्यटन स्थल भी हैं. जयपुर में जयपुर के नाहरगढ़ और गढ़गणेश पहाड़ी की तलहटी में जयपुर के सभी राजा, महाराजाओं की छतरियां और मकबरे बने हुए है. जो आज जयपुर रियासत के राजाओं के मुख्य श्मशान घाट हैं.

जयपुर के गढ़ गणेश मंदिर के पास बनी छतरियां जयपुर में गेटोर की छतरियों के नाम से प्रसिद्ध हैं. जहां पहाड़ी की तलहटी पर बना यह श्मशान घाट मानों प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज हैं. गेटोर की छतरियों में खासतौर पर जयपुर रियासत और जयपुर राजपरिवार के सभी राजा महाराजाओं और सदस्यों की छतरियां बनी हुई है. इस जगह को रिसायत के श्मशान के रूप में सबसे पहले राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में चुना था और 1733 के बाद हर कछवाहा राजा का अंतिम संस्कार इस स्थान पर किया गया. जिसमें जयपुर के संस्थापक राजा सवाई जय सिंह द्वितीय से लेकर अंतिम शासक महाराजा माधो सिंह द्वितीय तक की छतरियां यहां बनी हुई हैं.

गेटोर की छतरियों में कुल 24 छतरियां बनी हैं जो हिंदू राजपूत वैदिक वास्तुकला और पारंपरिक मुगल शैली के बेजोड़ संगम की प्रतीक के रूप में बनी हुई हैं. जिनकी खूबसूरती देखने के लिए पूरी दुनिया भर से यहां पर्यटक आते हैं. इन छतरियों में सभी राजाओं से संबंधित राजा के व्यक्तित्व और उनकी पदवी के अनुसार भव्यता से उनका इतिहास लिखा हुआ देख सकते हैं. हर छतरी अलग-अलग क्षेत्र में बनी हुई हैं जिसके चलते पूरा श्मशान घाट बड़े क्षेत्र में बना हुआ है‌. गेटोर की छतरियों में सवाई जय सिंह, सवाई जय सिंह द्वितीय, सवाई राम सिंह, सवाई माधो सिंह, सवाई प्रताप सिंह सहित सभी राजाओं की छतरियां बनी हुई है.

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गेटोंर की छतरियों को शाही श्मशान घाट भी कहा जाता हैं. क्योंकि जयपुरी के राजाओं का दाह-संस्कार इसी स्थान पर किया जाता था और उनकी याद में एक छतरियां बनवाई जाती थी. जो हमेशा उनके इतिहास को अमर रखने में लिए यादगार स्मृति के रूप में सबसे जरुरी था. इन छतरियों में वास्तुकला का जबरदस्त नमूना देखनें को मिलता हैं, जिसमें हर छतरी में राजा की वीरता और उनके व्यक्तित्व की परिभाषा को उकेरा गया है. इन सभी छतरियों का निर्माण संगमरमर और बालुआ पत्थर से किया गया है.

गेटोंर की छतरियों में जयपुर राजघराने के सभी राजाओं की अलग-अलग छतरियां बनी हुई है. जिसमें सबसे सुन्दर स्मारक सवाई जयसिंह का है. इसकी छतरियों में व्हीट मशरूम के संगमरमर का उपयोग किया गया हैं. साथ ही इन छतरियों में हिंदू देवताओं और प्रांगण में राजशाही समय के नौकरानियों, संगीतकारों और अन्य लोगों की मूर्तियां भव्यता से उकेरी गई है जो दिखने में सुंदर लगती है.

जयपुर में राजा महाराजाओं के अलावा रानियों के लिए अलग श्मशान घाट हैं जो जयपुर के जलमहल और जोरावर सिंह गेट के पास आमेर रोड़ पर स्थित हैं. जिसे लोग महाराजा सवाई मान सिंह संग्रहालय ट्रस्ट सिटी पैलेस या महारानी की छतरियों के नाम से जानते हैं. महारानी की छतरियों में सभी महारानियों की बनी हुई हैं. जिन्हें देखने के लिए भी खूब पर्यटक आते हैं. गेटोर की तरह यहां भी अलग-अलग रानियों की छतरियां बनी हुई हैं.

महारानी की छतरियां में वैसे तो जयपुर के राजाओं की सभी रानियों की छतरियां बनी हुई हैं लेकिन इनमें सबसे मुख्य महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय की तीनों पत्नियां जिनमें महारानी मरुधर कंवर, महारानी किशोर कंवर और तीसरी पत्नी महारानी गायत्री देवी की छतरियां बनी हुई है. इसके अलावा महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय की महारानी जादौन की छतरी भी बनी हुई हैं इसके अलावा बुआ-भतीजी, जोधी रानी, महारानी चन्दावत, महारानी झाली की छतरियां भी खास हैं.

महारानी की छतरियों में महाराजाओं की छतरियों की तरह बेहतरीन वास्तुकला और नक्काशी की सुंदरता नजर आती हैं बड़ी छतरियों पर गुंबद बने हुए हैं. जिसके चारों कोनों में गुमटियां बनी हुई हैं. सभी छतरियों के स्तम्भों पर फूल पत्तियाँ, पत्थरों पर विद्यमान राजचिन्ह एवं वाद्य-यंत्र यथा विणा, सारंगी, मृदंग, ढोलक, मंजीरे इत्यादी को बजाते वादकों का अंकन तत्कालीन राजा महाराजाओं व महारानियों के संगीत व कला के प्रति रूचि प्रदर्शित करती है.

जयपुर के इन दोनों शाही श्मशान घाट में बनी इन छतरियों को देखने के लिए पर्यटकों को टिकट खरीदकर देखना पड़ता हैं. गेटोर और महारानी की छतरियों को देखने के लिए भारतीयों के लिए टिकट दर 30 रूपये हैं और विदेशी पर्यटकों के लिए 50 रूपये हैं. इसके अलावा छोटे बच्चों की एंट्री बिल्कुल फ्री रहती हैं। इन छतरियों को लोग सुबह 9:30 बजे से शाम 6:30बजे तक देख सकते हैं.

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