Kotdi Shyam Temple: यहां साल में एक बार किसान बनकर भक्तों के बीच आते हैं भगवान, देखने उमड़ता है पूरा शहर

Last Updated:September 23, 2026, 15:01 IST
Kotdi Shyam Temple: भीलवाड़ा के कोटड़ी श्याम मंदिर में जलझूलनी एकादशी पर अनोखी परंपरा देखने को मिली. ठाकुरजी किसान का रूप धारण कर रजत रेवाड़ी में नगर भ्रमण पर निकले। चौकी मंदिर में बड़े भाई चारभुजानाथ से उनका मिलन हुआ, जिसे श्रद्धालुओं ने राम-भरत मिलन जैसा बताया. हजारों दीपों और भजनों के बीच निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में भक्त उमड़े.
भीलवाड़ा. मेवाड़ के सुप्रसिद्ध आराध्य देव श्री कोटड़ी श्याम मंदिर अपने आप में बहुत खास हैं. देश का यह इकलौता ऐसा मन्दिर हैं जहां साल में एक बार जलझूलनी एकादशी पर कोटड़ी चारभुजा नाथ अपने निज मंदिर से किसान का रूप धारण करके भक्तों के बीच पहुंचते हैं. भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी कस्बे में जलझूलनी एकादशी का पर्व श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया. इस मौके पर कोटड़ी चारभुजानाथ मंदिर से भगवान चारभुजानाथ की भव्य शोभायात्रा निकाली गई. ठाकुरजी किसान के रूप में रजत रेवाड़ी में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले. भगवान के दर्शन के लिए कस्बे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े.
मंदिर में सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ठाकुरजी का दुग्धाभिषेक किया गया और त्रिवेणीधाम से लाए गए पवित्र जल से अभिषेक हुआ. इसके बाद भगवान को स्वर्णाभूषण और विशेष पोशाक पहनाकर किसान का स्वरूप दिया गया. शोभायात्रा बाजारों से होती हुई चौकी मंदिर पहुंची, जहां कोटड़ी श्याम का उनके बड़े भाई चौकी मंदिर के चारभुजानाथ से मिलन हुआ. इस दौरान श्रद्धालुओं ने इसे राम-भरत मिलन जैसा अलौकिक दृश्य बताया. इसके बाद कस्बे के विभिन्न मंदिरों से निकले 11 बेवाण भी कोटड़ी श्याम के विमान के साथ जलझूलनी के लिए रवाना हुए.
जल में ठाकुरजी को झुलाने के दौरान हजारों दीपों की रोशनी और भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. भगवान करीब 18 घंटे तक भक्तों के बीच रहकर नगर भ्रमण करेंगे और सुबह निज धाम लौटेंगे. जलझूलनी के दौरान कोटड़ी श्याम पूरे कस्बे में भक्तों के कंधों पर विराजमान होकर प्रत्येक घर तक पहुंचे. हर घर के बाहर ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की गई और ग्रामीणों ने उत्सुकता से उनके आगमन की प्रतीक्षा की. जगह-जगह आरतियां संपन्न हुई और भक्तों ने ठाकुरजी की सेवा हेतु विविध प्रकार के पेय और भोग अर्पित किए. यह उत्सव भक्ति, समर्पण और ठाकुरजी की महिमा का सजीव प्रतीक बन गया. कोटड़ी श्याम की जलझूलनी एकादशी का यह उत्सव भक्ति और भव्यता का अनुपम संगम है. रजत रेवाड़ी में सवार ठाकुरजी का किसान रूप, चौकी मंदिर में बड़े भाई संग उनका मिलन और भक्तों का उत्साह—इन सबने इस उत्सव को अविस्मरणीय बना दिया. यह महोत्सव कोटड़ी के लिए गौरव का क्षण है जो भक्तों को ठाकुरजी के चरणों में समर्पित होने का दिव्य अवसर प्रदान करता है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Bhilwara,Rajasthan
First Published :
September 23, 2026, 15:01 IST



