लाखों की गाड़ियों को छोड़ा पीछे… सोजत रोड से सहवाज तक ऊंटों पर निकली शाही बारात, देखकर दंग रह गए लोग!

Last Updated:May 03, 2026, 07:16 IST
Sojat Road Camel Wedding Procession: राजस्थान में एक अनोखी और आकर्षक बारात ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. सोजत रोड से सहवाज तक निकली इस बारात में लग्जरी गाड़ियों की जगह ऊंटों का काफिला नजर आया, जिसने पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति की झलक पेश की. बिजनेसमैन के बेटे की इस शादी में बाराती रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंटों पर सवार होकर पहुंचे, जिससे यह आयोजन बेहद खास बन गया. इस अनोखी बारात को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ जुट गई और यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है. इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के बीच भी पारंपरिक तरीकों को अपनाकर खास और यादगार पल बनाए जा सकते हैं.
आधुनिकता के इस दौर में जहाँ शादियों में महंगी गाड़ियों और लग्जरी कारों का शोर रहता है, वहीं पाली जिले के सोजत रोड कस्बे में एक ऐसी बारात निकली जिसने इतिहास को जीवंत कर दिया.बेंगलुरु में कपड़ों का बड़ा कारोबार करने वाले सोहनलाल प्रजापत ने अपने छोटे बेटे कमल की शादी को यादगार बनाने के लिए पुरानी राजस्थानी परंपराओं को चुना. इस बारात का आकर्षण ‘रेगिस्तान का जहाज’ यानी ऊंट थे, जिन पर सवार होकर बाराती सोजत रोड से सहवाज गांव पहुंचे.
बेंगलुरु में कपड़ा कारोबार करने वाले सोहनलाल प्रजापत ने अपने छोटे बेटे कमल की शादी को यादगार बनाने के लिए एक अनूठी मिसाल पेश की.लग्जरी कारों के काफिले को दरकिनार कर, खास पुष्कर से 11 ऊंटगाड़ियां मंगवाई गईं.ढोल-धमाकों और पारंपरिक गीतों के बीच जब यह बारात 10 किलोमीटर दूर सहवाज गांव के लिए रवाना हुई, तो रास्तें में खड़ा हर शख्स इस पल को अपने मोबाइल में कैद करने लगा.
सोहनलाल प्रजापत ने बताया कि उन्होंने इस बारात के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और पशुधन के महत्व को दर्शाने का प्रयास किया है.पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों के बजाय ऊंट गाड़ियों का उपयोग कर उन्होंने यह संदेश दिया कि हम अपनी प्राचीन विरासत को सहेजते हुए भी खुशियां मना सकते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं.गौरतलब है कि प्रजापत परिवार ने परंपराओं को निभाने का यह सिलसिला पिछले साल ही शुरू कर दिया था. सोहनलाल ने अपने बड़े बेटे भारत की शादी में 21 बैलगाड़ियों का काफिला निकाला था, जो सोजत रोड से सोजत तक गया था.
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इस अनूठी बारात के लिए विशेष रूप से पुष्कर से 11 सजावटी ऊंट गाड़ियाँ मंगवाई गई थीं। दूल्हा कमल ऊंट पर सवार होकर अपनी दुल्हनिया लेने निकला, तो उसके पीछे ऊंट गाड़ियों का लंबा काफिला चल पड़ा। 10 किलोमीटर के इस सफर के दौरान ऊंट गाड़ियों पर बैठे बाराती डीजे की धुन पर झूमते नजर आए। वहीं, परिवार की महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर पूरे माहौल को मारवाड़ी संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
इस शादी के पीछे का मुख्य उद्देश्य अपनी जड़ों और पुरानी संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ना था। दूल्हा कमल, जो स्वयं अपने परिवार के साथ बेंगलुरु में व्यवसाय संभालता है, उसने भी इस पारंपरिक अंदाज को सहर्ष स्वीकार किया। रास्ते में जिसने भी इस मंजर को देखा, वह ठिठक गया। लोगों ने न केवल इस बारात का स्वागत किया, बल्कि अपनी संस्कृति के प्रति इस प्रेम की जमकर सराहना भी की.
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