Rajasthan

सरिस्का के जंगलों में छिपा रहस्य! एक ही मंदिर में गर्म-ठंडे कुंड, महाभारत काल से जुड़ी चौंकाने वाली मान्यता

Last Updated:May 03, 2026, 07:29 IST

Alwar Hindi News: राजस्थान के अलवर जिले के सरिस्का क्षेत्र में स्थित तालवृक्ष मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है. इस मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद गर्म और ठंडे पानी के कुंड हैं, जो एक ही स्थान पर होने के बावजूद अलग-अलग तापमान बनाए रखते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और इसे पवित्र एवं चमत्कारी माना जाता है. श्रद्धालु यहां आकर इन कुंडों में स्नान करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं. सरिस्का के प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

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Alwar News: अलवर जिले के सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थित प्राचीन तालवृक्ष मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यह मंदिर ऋषि काल से महाभारत युग का साक्षी रहा है. इलाके के लोग बताते हैं कि यहां ऋषि मांडव ने कठोर तपस्या की थी, जिससे यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां पर महाभारत युग में बड़ी संख्या में लाल के वृक्ष होते थे इसलिए यहां का नाम ताल वृक्ष पड़ गया, जहां पर पूर्व में राजा शाही शासन के दौरान मंदिर का निर्माण करवाया गया था, जो अब अलवर के सरिस्का में आने वाले लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. ताल वृक्ष मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भूतेश्वर महादेव मंदिर, मां गंगा की प्रतिमा के दर्शन करने को मिलते हैं.

मंदिर के महंत नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि ताल वृक्ष मंदिर में सेवा उनकी चौथी पीढ़ी कर रही है. ऋषि मांडव ने प्राचीन तालवृक्ष मंदिर में तपस्या की थी. वही इस दौरान ताल वृक्ष के समीप विराटनगर में विराट नरेश की पांडवों ने सेवा की थी. यहां पर उनके तपो करने पर यहां पर दाएं साइड में ठंडा और बाएं साइड में गर्म पानी है. पौराणिक मान्यता है कि यहां पर मांडव ऋषि की तपोस्थली रही है. यहां पर समाधि के पास मौजूद छतरियां राजपूत शासन काल की हैं. उन्होंने बताया कि देहाती भाषा में तालवृक्ष को अर्जुन वृक्ष कहते हैं.

बारिश के समय में बड़ी संख्या में यहां पर पर्यटक घूमने आतेउन्होंने मांग की ताल वृक्ष मंदिर में खंडहर पड़ी छतरियों को सुधारा जाए. इसके अलावा मंदिर में लाइट की व्यवस्था के साथ शौचालय की अच्छी व्यवस्था की जाए. उन्होंने सरकार से मांग की मंदिर का जीणोद्धार किया जाए. उन्होंने बताया कि इस मंदिर को महाभारत युग का साक्षी माना जाता है. क्योंकि यहां पर महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने हथियारों को लाल के वर्षों में छुपा दिया था. इसके अलावा यहां पर पांडु पुत्र अर्जुन के आराध्य शिव का 7 फीट ऊंचा शिवलिंग विराजित है जो भूतेश्वर महादेव मंदिर के नाम से विख्यात है. मंदिर के महंत ने बताया कि बारिश के समय में बड़ी संख्या में यहां पर पर्यटक घूमने आते हैं.

पीड़ित लोगों को राहत मिलतीअलवर के सरिस्का में स्थित ऐतिहासिक ताल वृक्ष मंदिर में गर्म और ठंडे पानी के कुंड लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है. मंदिर के महंत ने बताया कि यहां के गर्म पानी से दाद, खुजली, फोड़ा, खाज जैसे चर्म रोग से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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