हार्ट अटैक की तरह साइबर फ्रॉड में भी घटना के बाद हर मिनट होता है कीमती, जानें बचने का फॉर्मूला

Last Updated:June 26, 2026, 11:51 IST
Cyber Fraud Avoid Tips : राजस्थान में साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. ऑनलाइन धोखाधड़ी के केसेज से कई लोग बर्बादी के कगार पर पहुंच रहे हैं. इन पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान में अब साइबर ठगी से बचाने वाली हेल्पलाइन नंबर 1930 की लाइनों में इजाफा किया जाएगा. इन लाइनों की संख्या 32 से बढ़ाकर 60 की जाएगी. इसके साथ ही साइबर थानों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी. राजस्थान पुलिस की साइबर सेल के DIG शांतनु कुमार सिंह के मुताबिक घटना के 20 मिनट से एक घंटे के भीतर शिकायत दर्ज होने पर रकम बचने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है.
जयपुर. बैंकिंग सेक्टर हो या फिर सोशल सेक्टर सब स्थानों पर इंटरनेट के मायाजाल से देश दुनिया आपस में जुड़ी है. लेकिन जितनी सुविधा बढ़ी उतना ही साइबर अपराध भी बढ़ गया है. साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अगर आपके साथ साइबर ठगी हो जाए तो समय रहते एक फोन कॉल करने से आपकी मेहनत की कमाई बच सकती है. राजस्थान पुलिस का दावा है की साइबर फ्रॉड का सबसे बड़ा हथियार है हेल्पलाइन 1930. यदि गोल्डन ऑवर में इसकी शिकायत दर्ज हो जाए तो आपका पैसे आपके वापस पास आ सकता है. साइबर ठगी की बढ़ती वारदातों को देखते हुए अब कॉल लाइनों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जा रही है. इसके साथ ही दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि अगर सूचना समय पर दी गई तो रिकवरी शत प्रतिशत होगी.
आपके साथ किसी भी तरह की साइबर ठगी हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि तुरंत एक्शन लेनी की आवश्यकता है. राजस्थान पुलिस की साइबर सेल के अनुसार जैसे ही किसी के साथ साइबर फ्रॉड हो उसे बिना देरी किए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करनी चाहिए. शिकायत दर्ज होते ही API आधारित सिस्टम के जरिए संबंधित बैंकों को अलर्ट भेजा जाता है और जिस खाते में रकम पहुंची है वहां ट्रांजेक्शन को होल्ड करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अगर पैसा दूसरे खाते में ट्रांसफर हो भी चुका है तो वहां भी तत्काल सूचना भेजी जाती है.
घटना होने के 20 मिनट से एक घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कराएंसाइबर सेल के DIG शांतनु कुमार सिंह ने बताया की साइबर ठगी के मामले में भी ‘गोल्डन ऑवर’ होता है. यानी घटना के 20 मिनट से एक घंटे के भीतर शिकायत दर्ज होने पर रकम बचने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है. इसके बाद पुलिस खातों, मोबाइल नंबरों और इस्तेमाल किए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच कर साइबर अपराधियों तक पहुंचती है. बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए राजस्थान में साइबर हेल्पलाइन की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है. पहले जहां 32 कॉल लाइनों की व्यवस्था थी वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 60 तक की जा रही है ताकि कोई भी शिकायत और कॉल छूट न जाए.
साइबर थानों की संख्या को बढ़ाया जाएगा
वर्तमान में पुलिस मुख्यालय, जयपुर कमिश्नरेट और चार रेंज मुख्यालयों पर कॉल टेकर्स और डिस्पैचर तैनात हैं. आंकड़े बताते हैं कि रोजाना करीब 6 हजार कॉल साइबर ठगी से जुड़ी हुई आती हैं और लगभग रोजाना 2 करोड़ की साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज होती हैं. जांच के बाद बड़ी संख्या में मामलों में रकम होल्ड कराई जाती है. अब तक करीब 26 प्रतिशत राशि पीड़ितों को वापस दिलाने में सफलता मिली है. इसके लिए मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के जरिए बैंकिंग प्रक्रिया पूरी कर रकम वापस कराई जाती है. राजस्थान में फिलहाल 46 साइबर पुलिस स्टेशन संचालित हैं. उन्हें जल्द बढ़ाकर 49 किया जाएगा.
आपका एक त्वरित एक्शन आपकी रकम को बचा सकता हैडीआईजी शांतनु कुमार के अनुसार 5 लाख से अधिक के डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट स्कैम जैसे मामलों में स्वतः एफआईआर दर्ज की जाती है. साइबर अपराधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’, ‘साइबर कवच’, ‘एंटी वायरस’ और ‘वज्र प्रहार’ जैसे विशेष अभियान भी लगातार चलाए जा रहे हैं. बकौल शांतनु कुमार याद रखिए जिस तरह से हार्ट अटैक के दौरान हर मिनट कीमती है ठीक उसी तरह साइबर ठगी के मामले में हर मिनट कीमती है. अगर आपके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो सबसे पहले 1930 पर कॉल करें. आपका एक त्वरित एक्शन न सिर्फ आपकी रकम बचा सकती है, बल्कि साइबर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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