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Last Updated:August 26, 2026, 08:43 IST
Mount Abu Kedarnath Badrinath Dham: सिरोही जिले के माउंट आबू स्थित गुरुशिखर के पास उतराज गांव में बने केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर इन दिनों भक्तों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं. अरावली की पहाड़ियों में बसे इस ‘राजस्थान के उत्तराखंड’ तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 4 किमी का कठिन पैदल रास्ता तय करना पड़ता है. श्रावण मास में रोजाना 500 से 800 लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मानसून में यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता और ट्रेकिंग के लिए भी बेहद लोकप्रिय है.
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Mount Abu: श्रावण मास में जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर जाते हैं, वहीं राजस्थान में भी एक ऐसा धाम है जिसे अरावली का ‘उत्तराखंड’ कहा जाता है. सिरोही जिले में माउंट आबू की दुर्गम अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों के दर्शन के लिए इन दिनों आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. रोजाना 500 से 800 श्रद्धालु 4 किलोमीटर की बेहद कठिन और पथरीली पैदल यात्रा तय करके यहां पहुंच रहे हैं.
इस पवित्र स्थान तक पहुंचने के लिए कोई पक्का सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है. राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी और माउंट आबू से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित गुरुशिखर से इस यात्रा की शुरुआत होती है. गुरुशिखर पहुंचने के बाद भक्तों को करीब 4 किलोमीटर पैदल ढलान उतरकर जाना पड़ता है. दुर्गम पहाड़ियों और पथरीले रास्तों के बावजूद बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का उत्साह देखते ही बनता है. सिरोही के अलावा पाली, जालोर, उदयपुर और पड़ोसी राज्य गुजरात से भी भारी संख्या में श्रद्धालु यहां आ रहे हैं.
उतराज गांव के पास प्राचीन गुफा और बद्रीनारायण मंदिर
स्थानीय निवासी नीरज रावल के अनुसार, ये दोनों मंदिर गुरुशिखर के पास स्थित उतराज गांव के समीप बने हैं. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम जितना ही पुण्य प्राप्त होता है. यहां बने केदारनाथ मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा है, जहां संत निवास करते हैं. आगे चलकर उतराज गांव से होते हुए श्रद्धालु बद्रीनारायण मंदिर पहुंचते हैं, जहां भगवान बद्रीनाथ के साथ भगवान विष्णु की दिव्य प्रतिमा विराजमान है.
नेचर लवर्स और ट्रेकिंग के लिए पसंदीदा जगह, शाम 5 बजे बाद आवाजाही बंद
मानसून के मौसम में अरावली की वादियां किसी स्वर्ग से कम नजर नहीं आतीं. घने बादलों की धुंध, बहते झरने और हरे-भरे पहाड़ नेचर लवर्स और ट्रेकर्स को खूब आकर्षित करते हैं. हालांकि, यह इलाका घने वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां रात में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है और रास्ता भटकने की भी संभावना रहती है. इसी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शाम 5 बजे के बाद इस मार्ग पर श्रद्धालुओं के जाने पर पूरी तरह रोक रहती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
और पढ़ेंLocation :
Mount Abu,Sirohi,Rajasthan
First Published :
August 26, 2026, 08:43 IST



