राजस्थान के लिए खुला मोदी सरकार का खजाना, अमृत योजना के बजट में भारी बढ़ोतरी, 2341 करोड़ से संवरेंगे प्रदेश के शहर

जयपुर. राजस्थान के शहरों को लेकर इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें पैसा भी बड़ा है और काम भी बड़े स्तर पर होने की बात कही जा रही है. बात सिर्फ कागजों की नहीं, बल्कि जमीन पर चल रहे कामों की भी हो रही है. सरकार का दावा है कि आने वाले समय में शहरों की तस्वीर बदलती नजर आएगी. पानी, सीवर और तालाबों जैसे मुद्दों पर एक साथ काम हो रहा है.
असल में ये पूरा मामला अमृत 2.0 योजना से जुड़ा है. इस योजना के तहत राज्य के कई शहरों में काम पहले से चल रहा था, लेकिन अब इसमें और तेजी आने की बात कही जा रही है. केंद्र से बजट बढ़ने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रुके हुए काम भी आगे बढ़ेंगे और नए काम भी शुरू होंगे.
बढ़ा बजट, 200 शहरों में बड़े कामसरकार के अनुसार अमृत 2.0 के तहत राजस्थान में कुल 11 हजार 560 करोड़ रुपए के काम चल रहे हैं. ये काम 200 शहरों और कस्बों में हो रहे हैं, जिनमें 363 परियोजनाएं शामिल हैं. इन परियोजनाओं में पानी की सप्लाई, सीवर व्यवस्था और सफाई से जुड़े काम शामिल हैं.
अब केंद्र सरकार ने साल 2026-27 के लिए 2 हजार 341 करोड़ रुपए का बजट दिया है, जो पहले से ज्यादा है. इससे साफ है कि योजना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इन पैसों से खास तौर पर पानी और सीवर से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने की कोशिश होगी.
इन 11,560 करोड़ में से करीब 5,950 करोड़ रुपए सीवरेज और गंदे पानी के प्रबंधन पर खर्च हो रहे हैं. वहीं 5,099 करोड़ रुपए पानी की सप्लाई से जुड़े कामों पर लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा 505 करोड़ रुपए तालाबों और जलाशयों को सुधारने में लगाए जा रहे हैं.
जयपुर समेत बड़े शहरों में तेजी, तालाबों पर भी फोकसराजधानी जयपुर में ही करीब 2,624 करोड़ रुपए के काम चल रहे हैं. यहां सीवर लाइन ठीक करने, नई लाइन डालने और पानी की सप्लाई मजबूत करने पर काम हो रहा है. जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज दोनों इलाकों में अलग-अलग योजनाएं चल रही हैं. इसके अलावा जोधपुर, कोटा, उदयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, भरतपुर, अजमेर, अलवर और भिवाड़ी जैसे शहरों में भी सैकड़ों करोड़ रुपए के काम जारी हैं. कहीं सीवर लाइन डाली जा रही है तो कहीं पानी की व्यवस्था सुधारी जा रही है.
एक और खास बात ये है कि पुराने तालाब, बावड़ियां और झीलों को भी सुधारा जा रहा है. करीब 134 जगहों पर 505 करोड़ रुपए खर्च कर इन जल स्रोतों को नया रूप देने की कोशिश हो रही है. पाली के सुमेरपुर, नाथद्वारा और बांसवाड़ा जैसे इलाकों में भी ऐसे काम शुरू हो चुके हैं.



