तय समय से 5 साल पहले मार ली बाजी! पीएम मोदी के ग्रीन विजन ने दुनिया को चौंकाया; कैसे बदली ऊर्जा की तस्वीर?

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक पावरहाउस बनकर उभरा है. राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026’ के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भारत की इस शानदार सक्सेस स्टोरी को दुनिया के सामने रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है बल्कि पर्यावरण संरक्षण के मामले में दुनिया का नेतृत्व भी कर रहा है.
लक्ष्य से आगे भागता भारतमंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है उसे पाने के लिए काम युद्धस्तर पर जारी है. सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि गैर-जीवाश्म (नॉन-फॉसिल) स्रोतों से 50% बिजली उत्पादन का लक्ष्य भारत ने तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है. यह प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों और सटीक क्रियान्वयन का ही परिणाम है.
भारत की ऊर्जा क्रांति
· ऐतिहासिक पीक डिमांड: हाल ही में पीक डिमांड के दौरान भारत की दो-तिहाई बिजली जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी की गईं.
· मिश्रित ऊर्जा स्रोत: पवन, सौर, बैटरी स्टोरेज और पंप स्टोरेज जैसे माध्यमों से देश की 30% बिजली पैदा हो रही है.
· आयात पर लगाम: स्वदेशी कोयले के उत्पादन को बढ़ावा देकर सरकार ने उस कोयले के आयात को काफी हद तक कम कर दिया है जो देश में उपलब्ध है.
· यूटिलिटी-लेड मॉडल: 2027 तक के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ‘यूटिलिटी-लेड मॉडल’ पर तेजी से काम कर रही है.
क्यों खास है यह उपलब्धि?
भारत की प्रगति से यह साफ है कि केंद्र सरकार ने एनर्जी सिक्योरिटी और सस्टेनेबिलिटी के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया है.
1. आत्मनिर्भरता: कोयले के आयात में कमी लाना न केवल विदेशी मुद्रा बचाता है बल्कि देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाता है.
2. इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती: केवल बिजली उत्पादन ही नहीं बढ़ा है बल्कि ट्रांसमिशन और ग्रिड स्टेबिलिटी पर भी मोदी सरकार ने रिकॉर्ड निवेश किया है.
3. वैश्विक विश्वसनीयता: पेरिस समझौते के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख को और मजबूत करता है.
सवाल-जवाब
2030 तक भारत का नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट (GW) अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है.
भारत ने कौन सा बड़ा लक्ष्य समय से 5 साल पहले हासिल कर लिया?
गैर-जीवाश्म स्रोतों (सौर, पवन आदि) से कुल बिजली उत्पादन का 50% हिस्सा प्राप्त करने का लक्ष्य भारत ने निर्धारित समय से पांच साल पहले ही पूरा कर लिया है.
कोयला आयात को लेकर मंत्री ने क्या स्पष्ट किया?
प्रह्लाद जोशी के अनुसार, भारत ने उस कोयले का आयात घटा दिया है जिसका विकल्प देश के भीतर ही उपलब्ध है. अब केवल विशिष्ट उद्योगों (जैसे मेटल और विशेष पावर प्लांट) के लिए ही अनिवार्य आयात किया जा रहा है.
निष्कर्ष
प्रह्लाद जोशी का यह संबोधन इस बात की पुष्टि करता है कि मोदी सरकार की ‘ग्रीन एनर्जी’ नीतियां केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर बिजली की रोशनी बनकर उतर रही हैं. 2027 और 2030 के लक्ष्यों की ओर बढ़ते भारत के कदम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आने वाली पीढ़ियों को एक प्रदूषण मुक्त और ऊर्जा संपन्न राष्ट्र मिलेगा.



