Monsoon News | Agriculture News | मानसून से पहले किसानों को प्राकृतिक खेती का मंत्र, वैज्ञानिकों ने सिखाए कम लागत में ज्यादा उत्पादन के तरीके

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मानसून से पहले किसानों को प्राकृतिक खेती का मंत्र, कम लागत में ज्यादा उत्पादन
Last Updated:June 27, 2026, 12:55 IST
जोधपुर के बिंजवाड़िया गांव में कृषि विश्वविद्यालय के किसान कौशल विकास केंद्र ने प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण दिया, जैविक खाद, रोग प्रबंधन और टिकाऊ खेती पर जोर
जोधपुर. मानसून का मौसम खेती-किसानी के लिए सबसे अहम माना जाता है और ऐसे समय में यदि किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक सलाह के साथ प्राकृतिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण मिले, तो उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है.इसी उद्देश्य से कृषि विश्वविद्यालय के किसान कौशल विकास केंद्र ने जोधपुर जिले की तिंवरी तहसील के बिंजवाड़िया गांव में प्राकृतिक खेती जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जहां किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, कीट एवं रोग प्रबंधन सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी.
कार्यक्रम में किसान कौशल विकास केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका स्वामी ने किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व से अवगत कराया.उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है, खेती की लागत घटती है और फसलों की उत्पादकता भी लंबे समय तक बनी रहती है. उन्होंने किसानों से कृषि विश्वविद्यालय और किसान कौशल विकास केंद्र से जुड़कर समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ लेने का आह्वान किया.
जैविक खाद और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों पर जोरप्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैविक खाद बनाने और उसके वैज्ञानिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई. प्रशिक्षण अधिकारी नीलिमा मकवाना ने पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रासायनिक कृषि आदानों का संतुलित उपयोग करना समय की आवश्यकता है. उन्होंने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कृषि भूमि उपजाऊ बनी रहे.
उन्नत फसल किस्मों और खेतों में निरीक्षणकार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञ सुभाष बाजिया ने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप उन्नत फसल किस्मों तथा उनकी वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी. प्रशिक्षण के बाद विशेषज्ञों की टीम किसानों के खेतों तक पहुंची और फसलों का निरीक्षण कर किसानों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान किसानों को मौके पर ही फसल प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए, जिससे वे मानसून के दौरान बेहतर खेती कर सकें.
रोगग्रस्त पौधों की जांच, किसानों ने की पहल की सराहनाखेत भ्रमण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने रोगग्रस्त पौधों के नमूने एकत्र किए.कृषि अनुसंधान केंद्र के सह आचार्य डॉ. अशोक मीणा ने इन नमूनों की जांच कर किसानों को विभिन्न रोगों की पहचान, उनके कारण और प्राकृतिक व वैज्ञानिक उपचार के तरीकों की जानकारी दी. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक खेती से जुड़ी नई तकनीकों को सीखने में रुचि दिखाई. किसानों ने कृषि विश्वविद्यालय एवं किसान कौशल विकास केंद्र की इस पहल को समय की जरूरत बताते हुए इसकी सराहना की और भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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