Sikar News | Rajasthan News

Last Updated:June 27, 2026, 13:46 IST
Sikar famous Village Story : सीकर के पास गुहाला गांव ऐतिहासिक विरासत, बजरी उत्खनन, हांसनला धाम, मंदिरों मस्जिदों और हिंदू मुस्लिम सौहार्द के लिए मशहूर, जयपुर दरबार से जुड़ा इतिहास भी खास है. एक समय ऐसा था जब गुहाला की बजरी जयपुर, बीकानेर, सीकर, नागौर, झुंझुनूं सहित कई जिलों में बड़े पैमाने पर सप्लाई की जाती थी. माना जाता है कि करीब 500 वर्ष पहले कातली नदी के किनारे ग्वाल समुदाय ने इस गांव को बसाया था, जिसके बाद धीरे-धीरे यह क्षेत्र विकसित होता गया.
सीकर जिला मुख्यालय से 65 किमी दूर गुहाला गांव अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण अलग पहचान रखता है. इस गांव का इतिहास कई सदियों पुराना माना जाता है. यहां आज भी पुराने समय की कई धरोहरें, परंपराएं और सामाजिक व्यवस्थाएं जीवंत दिखाई देती हैं. यही वजह है कि गुहाला केवल एक गांव नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति को संजोए हुए एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में जाना जाता है.
गुहाला की सबसे बड़ी पहचान कातली नदी से होने वाला बजरी उत्खनन रहा है. यहां की बजरी अपनी बेहतर गुणवत्ता के कारण प्रदेशभर में मशहूर रही. एक समय ऐसा था जब गुहाला की बजरी जयपुर, बीकानेर, सीकर, नागौर, झुंझुनूं सहित कई जिलों में बड़े पैमाने पर सप्लाई की जाती थी. माना जाता है कि करीब 500 वर्ष पहले कातली नदी के किनारे ग्वाल समुदाय ने इस गांव को बसाया था, जिसके बाद धीरे-धीरे यह क्षेत्र विकसित होता गया.
एडवोकेट कृष्ण कुमार शर्मा के अनुसार वर्ष 1952 में गुहाला को पंचायत का दर्जा मिला था. बुजुर्गों की मानें तो जयपुर दरबार ने गुहाला को बीकानेर के ठाकुर भोपाल सिंह को विरासत में सौंपा था. बाद में संग्राम सिंह और लादूराम सिंह यहां के शासक बने. गांव में आज भी ऐतिहासिक गढ़ मौजूद है, जो राजशाही काल की गौरवशाली विरासत की याद दिलाता है और स्थानीय इतिहास का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है.
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गुहाला की धार्मिक परंपराएं भी बेहद समृद्ध हैं. मान्यता है कि यहां के राजा बीकानेर से गणगौर की प्रतिमाएं लेकर आए थे. तभी से गढ़ से गणगौर की भव्य सवारी निकालने की परंपरा चली आ रही है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण जुटते हैं. गांव में राजशाही दौर के हाकिम, दामामी और पुरोहित परिवार आज भी निवास करते हैं, जो इस ऐतिहासिक विरासत को जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
हांसनला धाम गुहाला क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है. यह स्थान संतों की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है और हर वर्ष 29 जून को यहां विशाल मेले का आयोजन होता है. धाम में बालाजी और श्रीराम दरबार के मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं. इसके अलावा पूरे गांव में चार मस्जिदें तथा 15 से अधिक मंदिर स्थित हैं, जिनमें श्रीगोपीनाथ मंदिर, मंढीवाले बालाजी मंदिर, शनि मंदिर, भूतनाथ मंदिर और बाजार स्थित शिवालय प्रमुख हैं.
गुहाला में धार्मिक आस्था के साथ-साथ गोसेवा की परंपरा भी मजबूत रही है. यहां संचालित श्रीकृष्ण आदर्श गोशाला से बड़ी संख्या में ग्रामीण जुड़े हुए हैं और नियमित रूप से गोसेवा में अपना योगदान देते हैं. इस गांव के पांच सैनी भाइयों ने अपनी बेशकीमती जमीन का एक हिस्सा ईदगाह के विस्तार के लिए दान में दी थी. जिसकी चर्चा पूरे राजस्थानए हुई थी. इस गांव में हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोग मिलजुलकर रहते हैं.
एडवोकेट कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि राजशाही काल में गुहाला को जयपुर शहर की तर्ज पर बसाया गया था. गांव का चौपड़ बाजार इसकी सुव्यवस्थित योजना का प्रमुख उदाहरण माना जाता है. बाजार के मध्य स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर इसकी धार्मिक और स्थापत्य विशेषता को दर्शाता है. चौपड़ के चारों ओर व्यवस्थित बाजार और प्राचीन संरचनाएं आज भी उस दौर की नगर बसावट और दूरदर्शी योजना की कहानी बयां करती हैं, जो गुहाला की ऐतिहासिक पहचान को और अधिक मजबूत बनाती हैं.
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